छह महीने भी नहीं टिक सकी नई पीसीसी सड़क, जल-जमाव और बदहाली से जनता त्रस्त
हथुआ (गोपालगंज) ।
विकास के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर देखना हो, तो हथुआ आईटीआई मोड़ से कुसौंधी रोड की वर्तमान स्थिति को देखा जा सकता है। इस मार्ग पर हाल ही में बनी पीसीसी (PCC) सड़क को बने अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन इसने अपनी बदहाली के रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। सड़क की सतह से कंक्रीट उखड़ने लगी है और थोड़ी सी बारिश होते ही कई जगहों पर जल-जमाव एक विकराल समस्या बन जाता है।
इंजीनियरिंग लापरवाही और पुरानी समस्या जस की तस
सामाजिक कार्यकर्त्ता सुनीता साह व अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान इंजीनियरों द्वारा सही लेवलिंग (ढलान और स्तर) का ध्यान नहीं रखा गया। यही कारण है कि सड़क बनने के बाद भी पानी निकासी की पुरानी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। सवाल यह उठता है कि जब सड़क बनने के बाद भी जनता को वही पुरानी समस्याएं झेलनी पड़ें, तो इस विकास कार्य का क्या लाभ?
राहगीरों और चालकों की दुर्दशा
जल-जमाव और टूटी सतह के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले पैदल राहगीरों का चलना मुहाल हो गया है। स्थिति तब और बदतर हो जाती है जब थोड़ी सी बारिश या जल-जमाव के बीच से कोई तेज रफ्तार वाहन गुजरता है, और गंदा पानी उड़कर पैदल चल रहे राहगीरों के कपड़ों पर पड़ता है। आम जनता और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को रोजाना इस जिल्लत का सामना करना पड़ता है।
संबंधित विभाग की उदासीनता
इस पूरी लापरवाही के पीछे निर्माण के दौरान संबंधित विभाग और निगरानी अधिकारियों की उदासीनता और लचर जांच-पड़ताल मुख्य वजह है। बिना मानक और गुणवत्ता की जांच के किए गए ऐसे निर्माण कार्यों से सरकारी धन की बर्बादी हो रही है और जनता को राहत के बजाय आफत मिल रही है।स्थानीय निवासी सुनीता साह, संजय स्वदेश व क्षेत्र के अन्य प्रबुद्ध नागरिकों और आम जनता ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस सड़क की गुणवत्ता और जल-जमाव की समस्या की तुरंत जांच कराई जाए, तथा दोषी ठेकेदार व लापरवाह इंजीनियरों पर कार्रवाई करते हुए सड़क का सुदृढ़ीकरण और सही जल-निकास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
