भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B28 टक्कर के दौरान कितनी सेफ? पास किया यह खतरनाक टेस्ट, 249 km/h होगी स्पीड
नई दिल्ली।
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B28 ने सुरक्षा से जुड़ा एक अहम परीक्षण पास किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक बेंगलुरु में बीईएमएल की फैक्ट्री में ट्रेन का ‘स्क्वीज टेस्ट’ किया गया। इस टेस्ट के जरिए यह जांचा जाता है कि टक्कर या दुर्घटना के दौरान ट्रेन का बाहरी ढांचा तेज दबाव और भारी ताकत को कितना सहन कर सकता है।
क्या होता है स्क्वीज टेस्ट?
स्क्वीज टेस्ट को ट्रेन के बॉडी शेल टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसमें ट्रेन के डिब्बों के बाहरी ढांचे पर दबाव डालकर उसकी मजबूती जांची जाती है। इसका मकसद यह देखना है कि टक्कर के दौरान ट्रेन का ढांचा ज्यादा न मुड़े और यात्रियों के बैठने वाली जगह सुरक्षित बनी रहे।रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेन अभी विकसित की जा रही है। ऐसे में भारत ने अपनी बुलेट ट्रेन सेवा की शुरुआत स्वदेशी B28 ट्रेनसेट से करने का फैसला किया है।
कितनी होगी ट्रेन की स्पीड?
केंद्र सरकार की कंपनी बीईएमएल देश की पहली दो स्वदेशी बुलेट ट्रेन बना रही है। हर ट्रेन में 8 कोच होंगे। इन ट्रेनों को 249 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि इनका परीक्षण 275 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर किया जाएगा।एक अधिकारी के मुताबिक, स्क्वीज टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ट्रेन का प्रोटोटाइप यानी शुरुआती मॉडल छह महीने से भी कम समय में तैयार हो सकता है। उन्होंने बताया कि B28 ट्रेन जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित नहीं है, इसलिए इसके विकास में ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।
मई-जून 2027 में शुरू हो सकते हैं ट्रायल
रेलवे की योजना अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबे हिस्से पर मई-जून 2027 तक B28 ट्रेन का ट्रायल शुरू करने की है। इस हिस्से पर अगस्त 2027 से यात्रियों के लिए ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।रेल मंत्रालय ने बुलेट ट्रेन परियोजना की बढ़ी हुई लागत को मंजूरी देने के लिए कैबिनेट के सामने जो प्रस्ताव रखा था, उसमें दो प्रोटोटाइप ट्रेनों के 2027 की पहली तिमाही तक ट्रायल के लिए तैयार होने की उम्मीद जताई गई थी।
कब तक पूरा होगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर?
रेलवे के मुताबिक, अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के गुजरात वाले हिस्से को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, करीब 508 किलोमीटर लंबे पूरे कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने की योजना है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
बुलेट ट्रेन परियोजना सिर्फ तेज रफ्तार रेल सेवा शुरू करने तक सीमित नहीं है। इससे भारत में हाई स्पीड रेल तकनीक और ट्रेन निर्माण से जुड़ी विशेषज्ञता भी विकसित होगी।मेक इन इंडिया पहल के तहत देश में ट्रेनसेट बनाने और उनके डिजाइन से जुड़ी क्षमताएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। समिति ने परियोजना की नियमित निगरानी करने और बिजली की लाइन, पानी की पाइपलाइन जैसी उपयोगिता सेवाओं को शिफ्ट करने में आने वाली रुकावटों को जल्द दूर करने की भी सिफारिश की है, ताकि काम में देरी और लागत बढ़ने से बचा जा सके।
