क्या उम्र बढ़ने के साथ शरीर से आने लगी है अलग सी दुर्गंध? जानें कौन-से कारण हैं जिम्मेदार?
शरीर से पसीने की गंध आना सामान्य है, लेकिन कभी-कभी 40 की उम्र के बाद व्यक्ति को अपनी बॉडी ओडर यानी शरीर की प्राकृतिक गंध में बदलाव महसूस होने लगता है। नहाने, कपड़े बदलने और डियोडरेंट इस्तेमाल करने की आदत पहले जैसी होने के बावजूद गंध पहले से अलग, तेज या ज्यादा देर तक बनी रह सकती है। इसके पीछे केवल पसीना या साफ-सफाई की कमी जिम्मेदार नहीं होती। त्वचा पर मौजूद तेल, स्किन बैक्टीरिया, उम्र के साथ होने वाले बायोलॉजिकल बदलाव और महिलाओं में पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौरान आने वाले हार्मोनल परिवर्तन भी भूमिका निभा सकते हैं।
साफ-सफाई की आदत के बाद भी दुर्गंध क्यों बदल सकती है?
बॉडी ओडर (शरीर की दुर्गंध) को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि पसीना और शरीर की गंध एक ही चीज नहीं हैं। शरीर का ज्यादातर ताजा पसीना लगभग गंधहीन होता है। जब त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया पसीने और त्वचा से निकलने वाले दूसरे पदार्थों को तोड़ते हैं, तब ऐसी गंध पैदा हो सकती है जिसे हम बॉडी ओडर कहते हैं।उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की सतह पर बनने वाले तेल और लिपिड की संरचना, पसीने की परिस्थितियां, त्वचा का माइक्रोबायोम और हार्मोनल गतिविधियां बदल सकती हैं। इसके अलावा तनाव, खानपान, मौसम, दवाएं और कपड़ों का फैब्रिक भी शरीर की गंध को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पहले की तुलना में गंध बदलने का मतलब यह जरूरी नहीं कि व्यक्ति की हाइजीन खराब हो गई है।एनसीबीआई में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार, अंडरआर्म की गंध पर उम्र, हार्मोन, खानपान, पर्यावरण, भावनात्मक स्थिति और त्वचा पर मौजूद सूक्ष्मजीवों सहित कई कारकों का असर पड़ता है। शोधकर्ता यह भी बताते हैं कि इन सभी कारकों की भूमिका को समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।
40 की उम्र के बाद स्किन ऑयल में बदलाव कैसे प्रभावित करता है शरीर की गंध?
त्वचा में मौजूद सेबेशियस ग्लैंड्स सीबम यानी प्राकृतिक तेल बनाती हैं। यह तेल त्वचा की सुरक्षा और नमी बनाए रखने में मदद करता है। सीबम में कई तरह के लिपिड और फैटी एसिड होते हैं। इनकी संरचना में बदलाव होने पर त्वचा की सतह पर मौजूद रासायनिक पदार्थ भी बदल सकते हैं, जिससे शरीर की प्राकृतिक गंध प्रभावित हो सकती है।उम्र और बॉडी ओडर के संबंध पर किए गए एक अध्ययन में 26 से 75 वर्ष की उम्र के लोगों की त्वचा से निकलने वाले गंधयुक्त रसायनों का विश्लेषण किया गया। एनसीबीआई के अनुसार 2-Nonenal नाम का एक यौगिक 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के प्रतिभागियों में पाया गया। अध्ययन में त्वचा की सतह पर मौजूद ओमेगा-7 अनसैचुरेटेड फैटी एसिड और लिपिड पेरॉक्साइड्स की मात्रा के साथ भी इसका संबंध देखा गया।
स्किन बैक्टीरिया पसीने को तेज गंध में कैसे बदलते हैं?
त्वचा पर कई तरह के बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से रहते हैं। ये सभी नुकसानदायक नहीं होते; इनमें से कई त्वचा के सामान्य माइक्रोबायोम का हिस्सा हैं। लेकिन जब कुछ बैक्टीरिया पसीने और त्वचा से निकलने वाले गंधहीन पदार्थों को तोड़ते हैं, तब वाष्पशील रसायन बन सकते हैं। इन्हीं रसायनों के कारण अंडरआर्म में तीखी, खट्टी या सल्फर जैसी गंध महसूस हो सकती है।एनसीबीआई के अनुसार शरीर में पसीने की अलग-अलग ग्रंथियां होती हैं। एक्राइन ग्लैंड्स शरीर के अधिकांश हिस्सों में होती हैं और मुख्य रूप से पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पसीना बनाती हैं। दूसरी ओर, एपोक्राइन ग्लैंड्स खासतौर पर अंडरआर्म और जननांगों के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इनके स्राव में मौजूद कुछ पदार्थ त्वचा के बैक्टीरिया द्वारा टूटने पर गंध पैदा कर सकते हैं।
पेरिमेनोपॉज, मेनोपॉज और हार्मोनल बदलाव से शरीर की गंध क्यों बदल सकती है?
महिलाओं में 40 की उम्र के आसपास पेरिमेनोपॉज शुरू हो सकता है। यह मेनोपॉज से पहले का चरण है, जिसमें एस्ट्रोजन सहित कई हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है। इस दौरान कुछ महिलाओं को हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पसीना बढ़ने से अंडरआर्म में नमी अधिक देर तक बनी रह सकती है, जिससे गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है।हार्मोनल बदलाव के साथ सूंघने की क्षमता या अपनी प्राकृतिक गंध को महसूस करने का अनुभव भी बदल सकता है। इसलिए किसी महिला को मेनोपॉज के दौरान अपनी बॉडी ओडर पहले से अधिक तेज महसूस हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर महिला में मेनोपॉज के कारण शरीर की गंध बदलती ही है। इस विषय पर उपलब्ध जानकारी के कुछ हिस्से क्लिनिकल अनुभव और संभावित जैविक कारणों पर आधारित हैं; हर बदलाव के पीछे हार्मोन को जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, पेरिमेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैशेज और नाइट स्वेट्स से पसीना बढ़ना बॉडी ओडर में बदलाव का एक संभावित कारण हो सकता है। यदि गंध में बदलाव के साथ अचानक बहुत ज्यादा पसीना आना, अनियमित पीरियड्स या दूसरे परेशान करने वाले लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।40 की उम्र के बाद शरीर की प्राकृतिक गंध बदलने के पीछे त्वचा के तेल में बदलाव, 2-Nonenal जैसे रसायनों का बनना, त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और हार्मोनल परिवर्तन जैसे कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं में पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौरान बढ़ा हुआ पसीना भी इसमें भूमिका निभा सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में ये बदलाव नहीं होते और हर नई गंध को उम्र का सामान्य असर नहीं मानना चाहिए। नियमित सफाई, सूखे और आरामदायक कपड़े तथा जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह शरीर की गंध को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
