शेयर बाजार के नए नियम, सोमवार से बदल जाएगा 9 से 9:15 बजे का गणित, इन 15 मिनट में क्‍या-क्‍या होगा

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नई दिल्‍ली।

शेयर बाजार में सोमवार से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 7 सितंबर से अपने प्री-ओपन सेशन के लिए बदले हुए नियम लागू करेगा। जबकि सेशन का समय वही रहेगा। यानी 9 से 9:15 बजे का पूरा गणित बदलने वाला है।नए सिस्टम के तहत, ऑर्डर-एंट्री पीरियड को अलग-अलग चरणों में बांटा जाएगा। इसमें दूसरे चरण के दौरान मार्केट ऑर्डर पर रोक होगी। ये बदलाव प्री-ओपन सेशन को इक्विटी कैश मार्केट में सेबी की ओर से शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के अनुरूप बनाने के लिए किए गए हैं।बदले हुए नियमों का मकसद कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट के बीच तालमेल बेहतर करना और बाजार के कामकाज में आसानी से बदलाव लाना भी है।

प्री-ओपन सेशन ऑर्डर के नियम

7 सितंबर से सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक चलने वाले 15 मिनट के प्री-ओपन सेशन को अलग-अलग चरणों में बांटा जाएगा।

सुबह 9:00 बजे से 9:05 बजे तक: पहला चरण सुबह 9:00 बजे से 9:05 बजे तक होगा। इसमें निवेशक लिमिट और मार्केट ऑर्डर दोनों डाल सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे या उन्हें रद्द कर सकेंगे।

सुबह 9:05 बजे से 9:10 बजे तक: दूसरा चरण सुबह 9:05 बजे से 9:10 बजे तक होगा। इसके दौरान केवल लिमिट ऑर्डर ही डाले जा सकेंगे, उनमें बदलाव किया जा सकेगा या उन्हें रद्द किया जा सकेगा।सुबह 9:10 बजे से 9:12 बजे तक: ऑर्डर-मैचिंग और ट्रेड-कन्फर्मेशन सेशन अब सुबह 9:10 बजे से 9:12 बजे तक होगा। यह पहले के सुबह 9:08 बजे से 9:12 बजे वाले समय की जगह लेगा। इस सेशन के दौरान, ओपनिंग प्राइस तय किया जाएगा, ऑर्डर मैच किए जाएंगे और ट्रेड कन्फर्म किए जाएंगे।

सुबह 9:12 बजे से 9:15 बजे तक: इसके बाद सुबह 9:12 बजे से 9:15 बजे तक बफर पीरियड होगा। इससे प्री-ओपन सेशन से रेगुलर लगातार ट्रेडिंग में आसानी से बदलाव हो सकेगा।

नए नियम में कौन सी सिक्योरिटीज शामिल हैं?

शेयर बाजार का नया नियम सिर्फ फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडर्स तक सीमित नहीं है। यह कैश या इक्विटी मार्केट के प्री-ओपन सेशन पर लागू होता है। इसमें कई तरह की सिक्योरिटीज शामिल हैं।बदले हुए नियम मुख्य बोर्ड पर लिस्टेड कंपनियों के अलावा, SME शेयरों, आंशिक रूप से पेड-अप शेयरों, InvITs और REITs जैसी कई इक्विटी सिक्योरिटीज पर भी लागू होंगे। लिहाजा, ये बदलाव सिर्फ लार्ज-कैप या बड़ी लिस्टेड कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहेंगे। छोटी लिस्टेड कंपनियां और दूसरी योग्य इक्विटी सिक्योरिटीज भी नए नियमों के दायरे में आएंगी।

नियमों में क्यों हो रहा है बदलाव?

NSE अपने प्री-ओपन सेशन फ्रेमवर्क में बदलाव कर रहा है ताकि ओपनिंग प्राइस-डिस्कवरी प्रोसेस को इक्विटी कैश मार्केट में 4 अगस्त को शुरू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म के साथ जोड़ा जा सके।CAS फ्रेमवर्क को क्लोजिंग प्राइस-डिस्कवरी प्रोसेस को ज्‍यदा पारदर्शी, कुशल और मजबूत बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उन कैश-मार्केट स्टॉक्स पर लागू होता है जिनके डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए यह ऑक्शन-आधारित मैकेनिज्म का इस्तेमाल करता है। यह खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स को एक ही लिक्विडिटी पूल में जुटाता है।


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