होर्मुज संकट से भारत को लगा ₹2100000000000 का अतिरिक्त झटका, जानिए 6 महीने के युद्ध का पूरा हिसाब
नई दिल्ली।
फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुए संकट का असर दुनिया भर के ईंधन आयातकों पर पड़ा है। इस समुद्री रास्ते से आने वाले कच्चे तेल, तेल उत्पादों और एलएनजी के आयात के लिए वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन आयातकों को भारी अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ी है।इस संकट के बाद के 6 महीनों में भारत को 22.5 अरब डॉलर (करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये) का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। वहीं दुनिया भर के देशों ने अनुमानित तौर पर 330 अरब डॉलर का अतिरिक्त भुगतान किया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद का यह सबसे बड़ा और सबसे लंबे समय तक चलने वाला ऑयल प्राइस शॉक यानी तेल की कीमतों में उछाल है।
ईंधन की कीमतों में उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण ईरानी तट के पास स्थित वैश्विक ऊर्जा व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। CREA के विश्लेषण के मुताबिक, युद्ध से पहले वायदा बाजार की उम्मीदों की तुलना में बाद के 6 महीनों में ईंधन की कीमत में जबरदस्त उछाल आया।
एशियाई एलएनजी (LNG) की कीमतें: 75% अधिक रहीं।
यूरोपीय एलएनजी कीमतें: 60% अधिक रहीं।
डीजल की कीमतें: 59% अधिक रहीं।
कच्चा तेल: 35% अधिक महंगा रहा।
भारत को कितना नुकसान?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से सबसे ज्यादा अतिरिक्त खर्च यूरोपीय संघ को हुआ। ईयू के ईंधन आयात पर करीब 78 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा। इसके बाद चीन को 35 अरब डॉलर और भारत को करीब 22 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
नेट अतिरिक्त लागत: ऊर्जा निर्यात से होने वाली अतिरिक्त कमाई को समायोजित करने के बाद, भारत का शुद्ध अतिरिक्त खर्च 14.4 अरब डॉलर रहा।
जीडीपी का नुकसान: यह 14.4 अरब डॉलर का शुद्ध खर्च भारत की जीडीपी के 0.38% के बराबर है, जो देश की लगभग 1.4 दिनों की राष्ट्रीय आय के नुकसान को दर्शाता है।
कच्चा तेल: मार्च से अगस्त 2026 के दौरान चीन ने कच्चे तेल के लिए 31.3 अरब डॉलर और भारत ने 20.5 अरब डॉलर का शुद्ध अतिरिक्त भुगतान किया।
LPG के लिए भी बढ़ा खर्च
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और होर्मुज संकट का असर इसके एलपीजी आयात पर भी पड़ा।
- CREA के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत का एलपीजी आयात पिछले दो वर्षों के औसत की तुलना में 49% घट गया।
- भारत का कुल एलपीजी आयात बिल इन छह महीनों में करीब 4.7 अरब डॉलर रहा। इसमें लगभग 1.1 अरब डॉलर अतिरिक्त लागत ऐसी थी, जो ईंधन की कीमतों में आए उछाल के कारण हुई।
- मार्च में भारत के एलपीजी आयात की मात्रा पिछले दो वर्षों के औसत स्तर की करीब आधी रह गई थी। जून तक यह औसत स्तर के 86% तक वापस आ गई।
- खाड़ी देशों से आपूर्ति में आई इस कमी को पूरा करने के लिए भारत ने अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ाया। मार्च में अमेरिकी हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 16% और अप्रैल में 32% हो गई।
चीन पहले स्थान पर
होर्मुज संकट के कारण चीन का अतिरिक्त खर्च सबसे ज्यादा रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन का ईंधन आयात बिल 35.5 अरब डॉलर रहा। इस लिस्ट में भारत 22.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं अमेरिका 16.5 अरब डॉलर के साथ तीसरे, नीदरलैंड्स 13.5 अरब डॉलर के साथ चौथे और दक्षिण कोरिया 13.2 अरब डॉलर के साथ 5वें स्थान पर रहा।
