https://thefourthmirror.com Fri, 11 Sep 2026 16:10:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 https://thefourthmirror.com/wp-content/uploads/2022/10/cropped-IMG_20221028_135824-32x32.jpg https://thefourthmirror.com 32 32 विकास को गति देने छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव https://thefourthmirror.com/2026/09/11/major-changes-to-land-use-rules-in-chhattisgarh-to-accelerate-development/ https://thefourthmirror.com/2026/09/11/major-changes-to-land-use-rules-in-chhattisgarh-to-accelerate-development/#respond Fri, 11 Sep 2026 16:10:10 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66527 रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को...

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।

आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता

आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन

वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था

कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।

नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन

तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।

नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव

प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।

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प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाखों गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना किया साकार : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान https://thefourthmirror.com/2026/09/11/pradhan-mantri-awas-yojana-has-fulfilled-the-dream-of-permanent-homes-for-lakhs-of-poor-families-union-minister-shivraj-singh-chouhan/ https://thefourthmirror.com/2026/09/11/pradhan-mantri-awas-yojana-has-fulfilled-the-dream-of-permanent-homes-for-lakhs-of-poor-families-union-minister-shivraj-singh-chouhan/#respond Fri, 11 Sep 2026 15:55:43 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66523 रायपुर। छत्तीसगढ़ में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपने को साकार करने...

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपने को साकार करने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा। सक्ती में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में 2 लाख नवनिर्मित आवासों का गृह प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से उनके नए घरों की चाबी सौंपी गई।इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की। केंद्रीय मंत्री चौहान ने अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति संबंधी पत्र मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को सौंपा।

छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात

छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 1600 से अधिक पीएम आवास हो रहे पूर्ण : केंद्रीय मंत्री  चौहान

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प को जमीन पर साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकास कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार जो कहती है, उसे पूरा करके दिखाती है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई गति मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के आवास, सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से गरीब परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, निःशुल्क राशन, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में व्यापक बदलाव लाने का कार्य किया जा रहा है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कर रहे काम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। प्रदेश अब केवल धान के कटोरे के रूप में ही नहीं, बल्कि तेजी से सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं।उन्होंने कहा कि सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और कृषि संबंधी वैज्ञानिक मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।

गरीब का पक्का घर हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री  साय

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि चौहान का छत्तीसगढ़ के प्रति विशेष स्नेह रहा है और उनके प्रत्येक प्रवास से प्रदेश को विकास की नई सौगातें मिली हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आज अपने नए पक्के घर में प्रवेश कर रहे 2 लाख हितग्राही परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।उन्होंने कहा कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के अंतर्गत आवासों के लक्ष्य की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल शेष पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से किया गया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।

13.85 लाख बहनें बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में हमारी माताओं-बहनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे बड़े बदलाव का प्रमाण है।मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को लाभान्वित किया जा रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिजली बिल समाधान योजना के अंतर्गत अब तक 750 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल माफ किए जा चुके हैं।

ग्रामीण विकास के कई अभिनव अभियानों का शुभारंभ

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत निर्मित 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ ही विभिन्न ग्रामीण विकास अभियानों और नवाचारों का भी शुभारंभ किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश की चाबी प्रदान की गई।मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन का शुभारंभ किया गया। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान प्रारंभ किए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 270 नवीन इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन किया गया। साथ ही इन्क्यूबेशन प्रोग्राम ‘अथ उद्यमिता की ओर’ के अंतर्गत चैलेंज फंड इवेंट का शुभारंभ हुआ।कार्यक्रम में आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों एवं डीलर दीदियों तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

अंत्योदय के संकल्प के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : तोखन साहू

केंद्रीय राज्यमंत्री  तोखन साहू ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का चिंतन सरकार के लिए मार्गदर्शक है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसी भावना के अनुरूप गरीब, किसान, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में विकास को नई गति मिली है और गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे : उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। गरीब परिवारों के साथ नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी चिंता की जा रही है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है। 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मुक्तिधाम शेड और आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण भी वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत कराया जाएगा।उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों पर बारकोड लगाया जा रहा है। नागरिक इसे स्कैन कर संबंधित विकास कार्य की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे ग्रामीण विकास में पारदर्शिता बढ़ने के साथ आम नागरिक भी विकास कार्यों की निगरानी में सहभागी बनेंगे।कार्यक्रम के अंत में जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष  द्रौपती कीर्तन चंद्रा सहित जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, लखपति दीदियां, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री साय ने सक्ति जिले में 121.70 करोड़ रुपए के 38 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन https://thefourthmirror.com/2026/09/11/union-minister-shivraj-singh-chouhan-and-chief-minister-sai-inaugurated-and-performed-the-groundbreaking-ceremony-for-38-development-projects-worth-%e2%82%b9121-70-crore-in-sakti-district/ https://thefourthmirror.com/2026/09/11/union-minister-shivraj-singh-chouhan-and-chief-minister-sai-inaugurated-and-performed-the-groundbreaking-ceremony-for-38-development-projects-worth-%e2%82%b9121-70-crore-in-sakti-district/#respond Fri, 11 Sep 2026 15:42:50 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66520 रायपुर। केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री  विष्णु...

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रायपुर।

केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा में आयोजित कार्यक्रम में जिले को लगभग 122 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। दोनों अतिथियों ने 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक की लागत के कुल 38 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सक्ति जिले में 121.70 करोड़ रुपए के 38 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

इनमें लगभग 79.25 करोड़ रुपए की लागत के 23 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा लगभग 42.46 करोड़ रुपए की लागत के 15 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इन कार्यों से जिले में सड़क संपर्क के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में लगभग 25.82 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा, बरतुंगा, तुलसीडीह, अण्डा, चरौदा होते हुए सपिया नहरपार तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तथा लगभग 15.30 करोड़ रुपए की लागत से छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली होते हुए सेमराडीह तक 12 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण शामिल है। इसके साथ ही अण्डी-किरकार-जगमहन से सातबहिनिया तक सड़क, नगझर-नवापारा मार्ग और गुरेराडीह किरारी से केसला मुख्य मार्ग सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया।

शिक्षा और युवाओं के लिए शासकीय कन्या महाविद्यालय सक्ती के नवीन भवन, बेदराम शासकीय महाविद्यालय मालखरौदा में अतिरिक्त भवन तथा नवीन लाइवलीहुड संस्थान भवन का भूमिपूजन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न ग्रामों में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तथा महिलाओं के लिए महतारी सदनों के निर्माण कार्यों की भी आधारशिला रखी गई। लोकार्पित प्रमुख कार्यों में लगभग 14.35 करोड़ रुपए की लागत से मालखरौदा क्षेत्र में कलमी नहरपार से चिखली, छोटेकोट, बड़ेकोट, सिंघरा होते हुए बेल्हाडीह तक सड़क तथा लगभग 11.35 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा से कठरापाली, निमोही, सिंघीतराई, बेनीपाली होते हुए ओड़ेकेरा मुख्य मार्ग तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण शामिल है। बुंदेली-अड़भार मार्ग का भी लोकार्पण किया गया।

इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित सोलर ड्यूल पंप, चन्द्रपुर एवं हसौद के नवीन तहसील कार्यालय भवन, डभरा, चन्द्रपुर एवं जैजैपुर के नवीन पुलिस थाना भवन, अड़भार पुलिस चौकी भवन, सुलौनी हाईस्कूल भवन, गोपालपुर प्रशिक्षण भवन तथा गोबरा में महतारी सदन सहित अन्य विकास कार्य जनता को समर्पित किए गए।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  कमलेश जांगड़े सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से प्रकृति संरक्षण और मातृ सम्मान का संदेश https://thefourthmirror.com/2026/09/11/the-ek-ped-maa-ke-naam-campaign-conveys-a-message-of-nature-conservation-and-respect-for-mothers/ https://thefourthmirror.com/2026/09/11/the-ek-ped-maa-ke-naam-campaign-conveys-a-message-of-nature-conservation-and-respect-for-mothers/#respond Fri, 11 Sep 2026 15:32:49 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66517 रायपुर।  पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी...

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रायपुर। 

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश देते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा स्थित कॉलेज ग्राउंड में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया।केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कदम का पौधा और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बादाम का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के विस्तार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान मातृ सम्मान की भावना को प्रकृति संरक्षण के संकल्प से जोड़ता है। अभियान के माध्यम से लोगों को अपनी माँ के सम्मान में पौधा लगाने के साथ ही उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी का भाव भी इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को केवल शासकीय प्रयास तक सीमित न रखते हुए उसे जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देने की पहल है। अधिक से अधिक नागरिकों की सहभागिता से हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश अभियान के माध्यम से दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से देशभर में नागरिकों को पौधरोपण से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में सक्ती जिले में केंद्रीय मंत्री  चौहान और मुख्यमंत्री  साय द्वारा किया गया पौधरोपण प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देता है।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, जांजगीर-चांपा सांसद  कमलेश जांगड़े, बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन, विकसित भारत जीरामजी के आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा, कलेक्टर  जयश्री जैन, पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर, जिला पंचायत सीईओ वासु जैन सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से किया संवाद, दिए सफलता के मंत्र https://thefourthmirror.com/2026/09/11/governor-deka-interacted-with-students-and-shared-mantras-for-success/ https://thefourthmirror.com/2026/09/11/governor-deka-interacted-with-students-and-shared-mantras-for-success/#respond Fri, 11 Sep 2026 15:24:45 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66514 रायपुर।  राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोक भवन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विद्यार्थियों ने...

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रायपुर।

 राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोक भवन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विद्यार्थियों ने भेंट की और संवाद किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए अनुशासन, आत्मनियंत्रण और कठोर परिश्रम को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

 सफलता का आधारभूत बिंदु अनुशासन है सैनिक स्कूल 

 राज्यपाल डेका ने कहा कि विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें सैनिक स्कूल जैसी उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्था में अध्ययन करने का अवसर मिला है। सैनिक स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, समय की पाबंदी तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्व भी सिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि सफलता का आधारभूत बिंदु अनुशासन है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पढ़ाई, नौकरी और करियर को लेकर तनाव एक बड़ी चुनौती है। तनाव का सामना करने के लिए हमें जो प्राप्त है, उसमें संतुष्ट रहना सीखना होगा। अपनी क्षमताओं को पहचानकर उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए। मन को नियंत्रित रखते हुए अपनी योग्यता और ऊर्जा को सही दिशा में लगाएंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।

 लक्ष्य को निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से प्रयास करें 

 राज्यपाल ने कहा कि कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। योग्यता के साथ यदि निरंतर मेहनत की जाए तो सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने लक्ष्य को निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से प्रयास करें। गुरुजनों और पालकों की बातों को गंभीरता से सुनें, लेकिन निर्णय लेते समय अपने तर्क और बुद्धि का भी प्रयोग करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी ‘थिंकिंग प्रोसेस’ को हमेशा सक्रिय रखने की सलाह दी। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने राज्यपाल से उनके जीवन, करियर और सार्वजनिक जीवन से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। राज्यपाल ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सहजता से उत्तर देते हुए उन्हें अपने संवैधानिक पद के दायित्वों की जानकारी दी तथा अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव भी साझा किए। सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों को लोक भवन का भ्रमण भी कराया गया। इस अवसर पर सैनिक स्कूल अंबिकापुर के शिक्षकगण भी उपस्थित थे।

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भवानी रामलाल साव धर्मादा ट्रस्ट ने 30 प्रतिभाशाली छात्राओं को दी छात्रवृत्ति https://thefourthmirror.com/2026/09/11/bhawani-ramlal-sao-dharmada-trust-awarded-scholarships-to-30-talented-female-students/ https://thefourthmirror.com/2026/09/11/bhawani-ramlal-sao-dharmada-trust-awarded-scholarships-to-30-talented-female-students/#respond Fri, 11 Sep 2026 15:15:47 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66511 मुंगेली।  रम्भा बाई रामलाल साव शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुंगेली में भवानी रामलाल साव...

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मुंगेली।

 रम्भा बाई रामलाल साव शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुंगेली में भवानी रामलाल साव धर्मादा ट्रस्ट द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। एक गरिमामय कार्यक्रम में हायर सेकेंडरी कक्षाओं की 30 छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरित की गई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भवानी रामलाल साव धर्मादा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय गुप्ता ने कहा कि बेटियां सम्मान और गौरव का प्रतीक हैं। आज बेटियां शिक्षा, समाजसेवा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। आर्थिक अभाव के कारण किसी प्रतिभाशाली बेटी की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए समाज और संस्थाओं को आगे आकर सहयोग करना चाहिए। ट्रस्ट इसी भावना के साथ जरूरतमंद एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।

विद्यालय के प्राचार्य कृष्णकुमार नवरंग ने बताया कि भवानी रामलाल साव धर्मादा ट्रस्ट द्वारा विद्यालय के आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस वर्ष हायर सेकेंडरी की 30 छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिला।उन्होंने बताया कि विद्यालय के निर्माण में ट्रस्ट द्वारा भूमि एवं दान के माध्यम से महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया है। ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को मिष्ठान भी वितरित किया जाता है। वर्तमान में ट्रस्ट के सहयोग से विद्यालय के मुख्य द्वार एवं सीढ़ी निर्माण का कार्य भी प्रगतिरत है।प्राचार्य ने ट्रस्ट के इस निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों एवं संस्थाओं द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किया गया सहयोग विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत बनाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।कार्यक्रम का संचालन संजय सोनी ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ ब्याख्याता श्रीमती विभा साहू ,एम कुर्रे, जया शुक्ला ,दिलीप काठले ,चन्द्र कुमार महिलांग ,नोहर चन्द्र वंसी ,कुमार सिंग ध्रुव ,डेनियल दयाल ,सरिता जोशी पूर्णिमा तम्बोली ,शेखर शर्मा ,अंजू साहू रोशन ध्रुव ,हुलेश ठाकुर सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्राएं एवं ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी तिहारी प्रसाद चंद्रवंशी उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ में मानसून 2026: प्रदेश में अब तक 931.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज https://thefourthmirror.com/2026/09/10/monsoon-2026-in-chhattisgarh-average-rainfall-of-931-9-mm-recorded-in-the-state-so-far/ https://thefourthmirror.com/2026/09/10/monsoon-2026-in-chhattisgarh-average-rainfall-of-931-9-mm-recorded-in-the-state-so-far/#respond Thu, 10 Sep 2026 16:27:44 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66504 ​रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी 10 सितंबर 2026...

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​रायपुर ।

छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी 10 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार प्रदेश भर में मानसून की रफ्तार कुल मिलाकर संतोषजनक बनी हुई है। चालू मानसून सत्र में 1 जून से 10 सितंबर तक राज्य में औसतन 931.9 मि.मी. वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो कि इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा 960.9 मि.मी. का 97 प्रतिशत है। हालांकि, प्रदेश के सभी 33 जिलों में वर्षा का वितरण एकसमान नहीं रहा है। सरगुजा संभाग के बलरामपुर और मध्य छत्तीसगढ़ के रायपुर तथा सारंगढ़ क्षेत्रों में झमाझम बारिश से आंकड़े सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुके हैं, वहीं बस्तर संभाग और मैदानी इलाकों के कुछ जिलों में वर्षा की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।प्रदेश में बारिश के प्रतिशत के मामले में उत्तर छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला शीर्ष पर है, जहाँ सामान्य औसत 825.3 मि.मी. की तुलना में अब तक 1456.5 मि.मी. बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि 176.5 प्रतिशत के साथ जिले की संभावित वार्षिक वर्षा के आंकड़े को भी पार कर गई है। इसके साथ ही सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1110.1 मि.मी. (148.0%), राजधानी रायपुर में 1034.2 मि.मी. (129.4%), मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1105.6 मि.मी. (127.4%), महासमुंद में 1078.1 मि.मी. (123.6%) और सूरजपुर में 1121.9 मि.मी. (117.6%) बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों में औसत से अधिक वर्षा होने के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और जलाशयों में जलभराव की स्थिति काफी मजबूत हुई है।

​मध्य छत्तीसगढ़ और बिलासपुर संभाग के बड़े हिस्से में बारिश का संतुलन बना हुआ है। मुंगेली में 962.3 मि.मी. (115.9%), गरियाबंद में 1082.0 मि.मी. (115.1%), बलौदाबाजार में 971.9 मि.मी. (111.9%), नारायणपुर में 1285.7 मि.मी. (109.1%) तथा जांजगीर-चांपा में 1068.7 मि.मी. (108.1%) बारिश दर्ज हुई है। वहीं कोरिया में 879.7 मि.मी. (103.0%), बालोद में 931.6 मि.मी. (102.7%), कोरबा में 1034.8 मि.मी. (101.7%), बिलासपुर में 949.6 मि.मी. (101.6%), धमतरी में 950.9 मि.मी. (101.0%) और सक्ती में 906.1 मि.मी. (99.3%) वर्षा के साथ आंकड़े सामान्य स्तर के बेहद करीब हैं। इसके अलावा दुर्ग में 700.6 मि.मी. (97.8%), गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 871.6 मि.मी. (94.2%), राजनांदगांव में 753.9 मि.मी. (92.4%), रायगढ़ में 926.5 मि.मी. (90.5%) और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 620.6 मि.मी. (90.2%) बारिश के साथ स्थिति सामान्य बनी हुई है।दूसरी ओर, राज्य के कुछ पश्चिमी मैदानी इलाकों और दक्षिणी बस्तर संभाग के जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से पीछे चल रहा है। दंतेवाड़ा में 1094.6 मि.मी. (85.7%), जशपुर में 768.6 मि.मी. (83.8%), कबीरधाम में 597.0 मि.मी. (83.5%) और सरगुजा में 578.1 मि.मी. (79.9%) बारिश हुई है। बेमेतरा में कुल 541.1 मि.मी. बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य का 77.2 प्रतिशत है और यह प्रदेश में सबसे कम कुल बारिश का आंकड़ा भी है। बस्तर संभाग की बात करें तो कोण्डागांव में 803.0 मि.मी. (74.3%), बस्तर जिले में 897.8 मि.मी. (73.9%), बीजापुर में 1245.9 मि.मी. (73.4%), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 740.2 मि.मी. (66.7%) और सुकमा में 865.5 मि.मी. (64.9%) बारिश ही दर्ज हो सकी है। प्रदेश में बारिश के सबसे कम प्रतिशत वाला जिला कांकेर रहा है, जहाँ सामान्य औसत के मुकाबले केवल 816.5 मि.मी. यानी 61.5 प्रतिशत वर्षा दर्ज हुई है।
दैनिक आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरिया में 12.6 मि.मी., सक्ती में 11.6 मि.मी., सूरजपुर में 11.4 मि.मी., कांकेर में 11.2 मि.मी. और बलरामपुर में 10.8 मि.मी. बारिश हुई है, जबकि प्रदेश का दैनिक औसत 3.1 मि.मी. दर्ज किया गया। राज्य स्तर पर कुल 97 प्रतिशत औसत वर्षा होने से खरीफ फसलों के लिए पानी की स्थिति अनुकूल बनी हुई है, वहीं कम वर्षा वाले जिलों में सिंचाई तंत्र को अलर्ट पर रखा गया है।

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चक्रधर समारोह में सजेगी सुर, ताल और संस्कृति की दस दिवसीय महफिल https://thefourthmirror.com/2026/09/10/a-ten-day-celebration-of-melody-rhythm-and-culture-will-unfold-at-the-chakradhar-samaroh/ https://thefourthmirror.com/2026/09/10/a-ten-day-celebration-of-melody-rhythm-and-culture-will-unfold-at-the-chakradhar-samaroh/#respond Thu, 10 Sep 2026 16:15:32 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66501 रायपुर। महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर...

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रायपुर।

महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 में इस बार कला और संस्कृति के विविध रंग एक साथ देखने को मिलेंगे। रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितम्बर तक आयोजित होने वाले इस दस दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ में स्थानीय प्रतिभाओं से लेकर देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। प्रतिदिन शाम 6 बजे से शुरू होने वाली     सांस्कृतिक संध्याओं में शास्त्रीय नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोककला, पंडवानी, लोकसंगीत, कबीर भजन, गजल और वाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा जीवंत होगी।संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं जनसहयोग से जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित समारोह में पद्मश्री सम्मानित कलाकारों के साथ इंडियन आइडल फेम कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह की खासियत यह होगी कि हर शाम कला की एक अलग विधा और अलग रंग दर्शकों के सामने आएगा। दस दिनों तक रायगढ़ का रामलीला मैदान सुर, ताल, नृत्य और लोक परंपराओं के अनूठे संगम का साक्षी बनेगा।

गणेश वंदना से होगा शुभारंभ, पंडवानी और लोकसंगीत से सजेगी पहली शाम

समारोह का शुभारंभ 14 सितम्बर को वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों द्वारा गणेश वंदना की प्रस्तुति से होगा। इसके बाद पद्मश्री सम्मानित अनुज शर्मा लोक कला एवं संगीत की प्रस्तुति देंगे। वहीं पद्मश्री सम्मानित डॉ. उषा बारले अपनी पंडवानी प्रस्तुति से पहली सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाएंगी। लोकधुनों, लोकगाथाओं और पंडवानी की सशक्त परंपरा से समारोह का आगाज होगा।

15 सितम्बर को तबला, कुचिपुड़ी और राजस्थानी लोककला का संगम

15 सितम्बर की शाम में निशित गंगानी का तबला वादन, टी. लक्ष्मी रेड्डी की कुचिपुड़ी प्रस्तुति, स्टार्क सोसाइटी बाड़मेर की राजस्थानी फोक प्रस्तुति और तरुणा साहू एवं समूह की पंडवानी प्रस्तुति होगी। इसके साथ माधवरस बैंड द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या को भक्तिरस से सराबोर करेगी।

16 सितम्बर को कथक और छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य की छटा

16 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य की विविधता मंच पर दिखाई देगी। मौमाला नायक कथक की प्रस्तुति देंगी। भूपेन्द्र साहू एवं समूह छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगे। डॉ. यास्मीन सिंह एवं समूह तथा सुश्री विभूति शर्मा द्वारा कथक की प्रस्तुतियां होंगी, जबकि पायल साहू एवं समूह लोककला के रंग बिखेरेंगे।

17 सितम्बर को भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की त्रिवेणी

17 सितम्बर की शाम लोककला एवं संगीत के साथ शास्त्रीय नृत्य की अनेक विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। बादल-बस्तर अकादमी ऑफ डांस, आर्ट्स एवं लिटरेचर द्वारा लोक कला एवं संगीत की प्रस्तुति होगी। मधुमिता रॉय मिश्रा कथक और जान्हवी बेहरा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। शिवरंजनी हरीश एवं कलार्पणा नृत्य समूह पद्म भूषण शोभना के शिष्यगण भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगे। शिव शक्ति कला संस्थान द्वारा कथक की प्रस्तुति भी होगी।

18 सितम्बर को मणिपुरी, कुचिपुड़ी और कबीर भजनों की सुरमयी शाम

18 सितम्बर को डॉ. मंजू इलंगबम मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। पद्मश्री सम्मानित  भारती बंधु कबीर भजनों से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करेंगे। श्वेता नायक एवं समूह कुचिपुड़ी तथा अनुराग शर्मा लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे।

काव्य और ओडिसी से सजेगी 19 सितम्बर की शाम

19 सितम्बर कला और साहित्य के प्रेमियों के लिए खास होगी। गौरी शंकर दाश और रीला होता ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियां देंगी। वहीं पद्मश्री सम्मानित सुरेन्द्र शर्मा एवं अन्य कलाकार काव्य संध्या के माध्यम से हास्य और साहित्य का रंग भरेंगे। नृत्य और काव्य का यह संगम समारोह की शाम को विशिष्ट बनाएगा।

20 सितम्बर को गोटीपुआ, गायन और कथक का अनूठा संगम

20 सितम्बर को  बी. साहू एवं समूह गोटीपुआ नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इंडियन आइडल फेम अमित साना अपनी गायन प्रस्तुति से संगीत प्रेमियों का मनोरंजन करेंगे। वहीं पद्मश्री सम्मानित रामलाल बरेठ के निर्देशन में भूपेन्द्र बरेठ एवं समूह कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगे। लोकनृत्य, लोकप्रिय गायन और शास्त्रीय नृत्य का यह संगम दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।

21 सितम्बर को कथक, संतूर-पखावज-तबला और नृत्य नाटिका

21 सितम्बर की शाम बनारस घराने के कथक से लेकर वाद्य संगीत तक विविध प्रस्तुतियों से सजेगी।  रूद्रशंकर सिन्हा बनारस घराने का कथक प्रस्तुत करेंगे।  सोनू गुप्ता एवं समूह लोकगीत, वांसती वैष्णव एवं समूह कथक प्रस्तुत करेंगे। त्रिवेणी संगम द्वारा संतूर, पखावज और तबला वादन होगा। संस्कार कला संघ नृत्य नाटिका तथा नृत्यांजलि बनारस घराने के कथक की प्रस्तुति देगी।

22 सितम्बर को कथकली, ओडिसी, सितार और सूफियाना अंदाज

समारोह की 22 सितम्बर की शाम शास्त्रीय नृत्य, वाद्य संगीत और सूफियाना अंदाज के नाम रहेगी। गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर कथकली,  दीक्षा रथ ओडिसी नृत्य और प्रो. डॉ. लवली शर्मा सितार वादन प्रस्तुत करेंगी। पुनरिक साहू-लहरंगगा लोक संगीत की प्रस्तुति देंगे, जबकि रायगढ़ के राकेश शर्मा सूफी गायन और गजल से शाम को सुरमयी बनाएंगे।

कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू के सुरों से होगा भव्य समापन

दस दिवसीय समारोह का 23 सितम्बर को भव्य समापन होगा। अंतिम शाम देश की सुप्रसिद्ध और पद्मश्री सम्मानित गायिका कविता कृष्णमूर्ति अपनी सुरमयी प्रस्तुति देंगी। उनके साथ जान कुमार सानू भी गायन की प्रस्तुति देंगे। देश के लोकप्रिय कलाकारों के सुरों से सजी यह शाम 41वें चक्रधर समारोह की यादों को लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में संजोए रखेगी।

रायगढ़ बनेगा कला और संस्कृति का केंद्र

41वां चक्रधर समारोह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना, संगीत और नृत्य के प्रति उनके समर्पण तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ एक ही मंच पर प्रस्तुति का अवसर मिलना समारोह की विशेष उपलब्धि है।14 से 23 सितम्बर तक रायगढ़ में होने वाला यह सांस्कृतिक आयोजन कला प्रेमियों के लिए दस दिनों तक उत्सव का माहौल बनाएगा। शास्त्रीय नृत्य की विविध विधाओं से लेकर छत्तीसगढ़ी लोकधुनों, पंडवानी, भजन, गजल और लोकप्रिय गायन तक चक्रधर समारोह में भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का ऐसा रंगारंग संसार देखने को मिलेगा, जो रायगढ़ को दस दिनों तक कला और संस्कृति की राजधानी में बदल देगा।

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जल संरक्षण और हर घर तक स्वच्छ पेयजल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय https://thefourthmirror.com/2026/09/10/water-conservation-and-clean-drinking-water-for-every-household-are-our-top-priority-chief-minister-sai/ https://thefourthmirror.com/2026/09/10/water-conservation-and-clean-drinking-water-for-every-household-are-our-top-priority-chief-minister-sai/#respond Thu, 10 Sep 2026 16:05:50 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66498 रायपुर। जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य...

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रायपुर।

जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।मुख्यमंत्री साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।

जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा।मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों।

हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री  साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं।उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।

पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब

मुख्यमंत्री  साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए।

हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा

मुख्यमंत्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो।बैठक में मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव  आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव   प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल- शशिकांत को एम्स रायपुर में कराया भर्ती https://thefourthmirror.com/2026/09/10/chief-ministers-compassionate-initiative-shashikant-admitted-to-aiims-raipur/ https://thefourthmirror.com/2026/09/10/chief-ministers-compassionate-initiative-shashikant-admitted-to-aiims-raipur/#respond Thu, 10 Sep 2026 15:58:26 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=66495 रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से धमतरी जिले के ग्राम...

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रायपुर ।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से धमतरी जिले के ग्राम देवपुर निवासी 29 वर्षीय शशिकांत भरत को बेहतर इलाज की नई उम्मीद मिली है। सोशल मीडिया के माध्यम से शशिकांत की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और उनसे दूरभाष पर बात कर कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शशिकांत को 9 सितंबर की शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में भर्ती कराया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उनके उपचार के लिए 4 लाख रुपये की सहायता राशि भी स्वीकृत की है।

2016 में हुए हादसे के बाद से प्रभावित है स्वास्थ्य

  वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान शशिकांत को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे। दुर्घटना में सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होने से उनके हाथ-पांव की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। लंबे समय तक विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो पाया था।

शशिकांत ने जताया आभार

 मुख्यमंत्री से बातचीत और तुरंत मिली चिकित्सकीय सहायता के बाद शशिकांत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं फोन कर हाल-चाल पूछना और एम्स में इलाज के साथ 4 लाख रुपये की सहायता देना उनके और उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा संबल है।

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