Sprouts हेल्दी हैं, लेकिन इन लोगों को फिर भी नहीं खाने चाहिए? रोज खाने से बढ़ जाएंगी दिक्कतें
हाल के वर्षों में, जब से प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी आहार पर चर्चा तेज हुई है, तब से अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) एक लोकप्रिय खाद्य पदार्थ के रूप में उभरे हैं। लेकिन क्या स्प्राउट्स एक आधुनिक हेल्थ ट्रेंड हैं, या इनकी जड़ें प्राचीन काल से जुड़ी हैं? आज भले ही स्प्राउट्स को एक आधुनिक ‘सुपरफूड’ के रूप में प्रचारित किया जाता हो, लेकिन प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में सदियों पहले से इनका उल्लेख मिलता है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ में स्प्राउट्स को उन खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा गया है, जिनका सेवन रोजाना नहीं करना चाहिए।डॉ. सुहास एच. डी. (मुख्य चिकित्सा अधिकारी, शारदा धन्वंतरि आयुर्वेद अस्पताल, श्रृंगेरी) बताते हैं कि इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है, कि भले ही स्प्राउट्स में औषधीय गुण होते हैं, लेकिन प्राचीन ज्ञान के अनुसार इन्हें रोजमर्रा के आहार का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, स्प्राउट्स पचने में भारी होते हैं। यदि इनका रोज सेवन किया जाए, तो ये कुछ लोगों के पाचन तंत्र में असंतुलन बढ़ा सकते हैं।
किन स्थितियों में स्प्राउट्स का सेवन नहीं करना चाहिए?
स्प्राउट्स के फायदों का लाभ उठाने और नुकसान से बचने के लिए, इनके सेवन और अन्य खाद्य पदार्थों के साथ इनके मेल को लेकर कुछ खास दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है:
विरुद्ध आहार के साथ सेवन न करें : आयुर्वेद में स्प्राउट्स को डेयरी उत्पादों के साथ मिलाना, जैसे कि स्प्राउट्स खाने के साथ या तुरंत बाद दूध पीना हानिकारक (विषैला) माना जाता है। यह गलत मेल पाचन अग्नि को बिगाड़ सकता है और मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी पैदा कर सकता है।
गंभीर सूजन (इन्फ्लेमेशन): जिन लोगों को शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) की समस्या हो या ऑटोइम्यून बीमारियां बढ़ गई हों, उन्हें तब तक स्प्राउट्स नहीं खाने चाहिए जब तक कि शरीर पूरी तरह ठीक न हो जाए।कमजोर पाचन शक्ति: जिन लोगों की पाचन अग्नि कमजोर (मंद अग्नि) है, जिन्हें अक्सर पेट फूलने की समस्या होती है, या जिनका पाचन धीमा है, उन्हें कच्चे स्प्राउट्स का सेवन कम करना चाहिए या बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
अत्यधिक सेवन: स्वस्थ लोगों में भी, कच्चे स्प्राउट्स का बहुत अधिक सेवन करने से गैस, पेट फूलना और एसिडिटी हो सकती है।
विटामिन k और थायरॉइड प्रभावित हो सकता है?
अल्फाल्फा (alfalfa) के बीजों और स्प्राउट्स में ‘एल-कैनावेनाइन’ (L-canavanine) नामक एक अमीनो एसिड होता है। यह यौगिक इम्यून सिस्टम को उत्तेजित कर सकता है और ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों में लक्षणों को बढ़ा सकता है। विशेष रूप से ‘सिस्टेमिक लुपस एरिथेमेटोसस’ (SLE) जैसी बीमारियों में, यह स्थिति को और बिगाड़ सकता है।अल्फाल्फा, ब्रोकली और क्लोवर जैसे स्प्राउट्स में विटामिन K भरपूर मात्रा में होता है, जो रक्त का थक्का जमने (blood clotting) की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन K के सेवन में तेजी से होने वाले उतार-चढ़ाव, वारफेरिन जैसी रक्त पतला करने वाली दवाओं की प्रभावशीलता में बाधा डाल सकते हैं।
क्रूसिफेरस स्प्राउट्स (ब्रोकली, मूली, सरसों, केल) में गोइट्रोजेन होते हैं, ये ऐसे यौगिक हैं जो बड़ी मात्रा में कच्चे सेवन करने पर थायरॉइड ग्रंथि द्वारा आयोडीन के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं, जिससे हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति और बिगड़ सकती है।
स्प्राउट्स के क्या फायदे होते हैं?
बीमार व्यक्तियों, कुपोषण से पीड़ित व्यक्तियों या डायबिटीज जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से जुड़ी कमजोरी का अनुभव कर रहे व्यक्तियों के लिए अंकुरित अनाज एक मूल्यवान पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
मूंग के अंकुरित दाने: विटामिन सी, पोटेशियम और आहार फाइबर से भरपूर, ये कुरकुरे और मोटे अंकुरित दाने हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और स्वस्थ ब्लड शुगर का सामान्य स्तर बनाए रखने में सहायक होते हैं।
मसूर और चने के अंकुरित दाने: वनस्पति-आधारित प्रोटीन, आयरन और फाइबर से भरपूर। ये निरंतर ऊर्जा प्रदान करते हैं, आंतों की गति को बढ़ाते हैं और स्वस्थ कोलेस्ट्रॉल स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं।
मेथी के अंकुरित दाने: पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले, मेथी के अंकुरित दाने इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करते हैं, पाचन में सहायता करते हैं और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
अंकुरित साबुत अनाज (गेहूं, क्विनोआ, जौ): अनाज को अंकुरित करने से ग्लूटेन और स्टार्च की मात्रा कम हो जाती है, जिससे जटिल कार्बोहाइड्रेट आसानी से पचने योग्य और ऊर्जा से भरपूर भोजन में बदल जाते हैं।
हेल्दी स्प्राउट्स को कैसे तैयार करें?
अंकुरित अनाजों की भारी और सूजन पैदा करने वाली प्रकृति को बेअसर करने और उनके भरपूर प्रोटीन और पोषक तत्वों को बनाए रखने के लिए, तैयारी महत्वपूर्ण है:
भाप में पकाएं या अच्छी तरह पकाएं: भाप में पकाने से अंकुरित अनाजों का पाचन पर पड़ने वाला भार काफी कम हो जाता है और शरीर के लिए उनमें मौजूद प्रोटीन को अवशोषित करना आसान हो जाता है।
हेल्दी फैट्स और मसाले मिलाएं: उबले हुए स्प्राउट्स को थोड़े से घी और पाचन में मदद करने वाले मसालों (जैसे जीरा या चुटकी भर नमक) के साथ भूनने या इनमें ये चीजें मिलाने से, इनके ठंडे और रूखे गुणों में संतुलन आता है और पाचन संबंधी परेशानी नहीं होती।
हालांकि स्प्राउट्स निश्चित रूप से पौधों से मिलने वाले प्रोटीन और पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्रोत हैं, लेकिन आयुर्वेद का प्राचीन ज्ञान हमें याद दिलाता है कि कोई भी एक खाद्य पदार्थ हर स्थिति के लिए सही नहीं होता। बेहतर स्वास्थ्य के लिए, स्प्राउट्स का सेवन सीमित मात्रा में, सही तरीके से पकाकर और अपनी पाचन शक्ति के अनुसार ही करना चाहिए।
