कुरुद में रावण दहन के साथ गूंजा सामाजिक चेतना और नशामुक्ति का संदेश

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​कुरुद।

असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का महापर्व विजयादशमी नगर में अभूतपूर्व हर्षोल्लास एवं गरिमा के साथ संपन्न हुआ। बस्तर के दशहरा की भांति अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले कुरुद दशहरा के अवसर पर अभिव्यक्ति कला मंच द्वारा आयोजित सजीव रामलीला और रावण वध के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु श्रीराम के बाण से जैसे ही अहंकारी लंकापति रावण का पुतला धू-धू कर जला, पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।

​नशे के खिलाफ खड़े होने की जरूरत: अजय चंद्राकर

समारोह के मुख्य मंच से आयोजन समिति के संयोजक एवं विधायक अजय चंद्राकर ने नगरवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए पर्व के दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज के भीतर नैतिक बल और सत्य के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा है। चंद्राकर ने नक्सल मुक्त होते बस्तर और क्षेत्र को मिली नई रेल सेवा की बधाई देते हुए वर्तमान समय में सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर गंभीर चिंता जताई और आह्वान किया कि रावण दहन के इस पावन अवसर पर समाज को संगठित होकर नशामुक्ति के खिलाफ खड़ा होना होगा। उन्होंने आयोजकों को आगामी वर्षों में प्रेरणास्पद और संदेशपरक थीम आधारित कार्यक्रम तैयार करने का सुझाव भी दिया।

​सांस्कृतिक छटा और सजीव मंचन

विजयादशमी की रात रामदल और रावण सेना के पात्रों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजीव अभिनय से दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। इसके साथ ही दशहरा उत्सव समिति द्वारा नगरवासियों के मनोरंजन के लिए छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध 6 सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य प्रस्तुति कराई गई, जिसका देर रात तक दर्शकों ने आनंद लिया। दुर्गोत्सव समिति द्वारा इस दौरान चुनरी यात्रा सहित विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।​मंच पर उपस्थित अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने आयोजन की सफलता में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहभागी बने सभी नागरिकों व कार्यकर्ताओं का आभार जताया। आयोजन समिति के अध्यक्ष अनिल चंद्राकर ने अतिथियों और नगरवासियों का अभिनंदन किया, वहीं अंत में महासचिव भानु चंद्राकर ने औपचारिक आभार व्यक्त किया।

​भावुक माहौल में मां दुर्गा और ज्योत-जंवारा का विसर्जन

विजयादशमी की पूर्व संध्या और दिन में नगर भक्ति के रंग में सराबोर रहा। नगर के अधिष्ठात्री मां चंडी मंदिर, शीतला, कंकाली, अंगार मोती मंदिर सहित घरों में स्थापित ज्योत-जंवारा का पूरे विधि-विधान व भक्तिभाव से विसर्जन किया गया। गांधी चौक, बजरंग चौक और कारगिल चौक में विराजित मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं की विदाई की गई।​विसर्जन का यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। मंडी, नया बाजार, पुराना बाजार, सरोजनी चौक, संजय नगर, पचरीपारा और धोबनीपारा आदि क्षेत्रों से मां अंबे की विशाल विसर्जन शोभायात्राएं निकाली गईं। सेवा और जसगीत की धुनों पर थिरकते श्रद्धालुओं और बाना धारण किए भक्तों ने नम आंखों से जगतजननी को विदाई दी।

​प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था

आयोजन के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। संवेदनशील स्थलों और विसर्जन मार्गों पर पुलिस बल की विशेष तैनाती रही, जिसके चलते कुरुद का यह ऐतिहासिक उत्सव आपसी सद्भाव, आस्था और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।


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