जुकाम से ही शुरू होता है साइनस का गंभीर इंफेक्शन, बचना है तो दोनों का अंतर जान लें
मौसम में बदलाव होते ही लोगों को सर्दी जुकाम, सिरदर्द और बुखार आदि का सामना करना पड़ता है। कई बार कुछ लोगों को लंबे समय तक नाक बहने या बंद होने की समस्या होती है। इस समस्या को सीधे रूप से सर्दी जुकाम मान लिया जाता है. लेकिन, हर बार यह सामान्य सर्दी जुकाम का संकेत नहीं होता है। कुछ मामलों में यह साइनस का भी संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार जुकाम और साइनस की समस्या के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। इतना ही नहीं, वायरल जुकाम के दौरान भी साइनस में सूजन आ सकती है। इसलिए सिर्फ नाक बहने या बलगम के रंग से दोनों में अंतर करना मुश्किल है। साइनस में सूजन और तरल जमा होने से नाक बंद होना, चेहरे में दर्द या दबाव और गले में बलगम गिरने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
जुकाम और साइनस इंफेक्शन की शुरुआत एक जैसी क्यों लगती है?
सामान्य सर्दी आमतौर पर वायरस के कारण होने वाला ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रमण है। इसमें नाक बहना, छींक आना, गले में खराश, खांसी और नाक बंद होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। दूसरी ओर, साइनसाइटिस (Sinusitis) में नाक के आसपास मौजूद हवा से भरी छोटी थैलियों, जिन्हें साइनस कहा जाता है, की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। इससे बलगम की निकासी प्रभावित हो सकती है और चेहरे पर दबाव या दर्द महसूस हो सकता है।दोनों के लक्षण मिलते-जुलते इसलिए हैं, क्योंकि जुकाम पैदा करने वाले वायरस भी साइनस की परत में सूजन ला सकते हैं। इसका मतलब यह है कि हर साइनस बैक्टीरिया के कारण नहीं होता। कई मामलों में साइनस के लक्षण वायरल संक्रमण के साथ शुरू होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं।
मैयोक्लीनिक क्लीनिक के अनुसार, सामान्य जुकाम एक्यूट साइनसाइटिस (Acute Sinusitis) का एक आम कारण है। अधिकतर मामलों में लक्षण लगभग एक सप्ताह से 10 दिन में सुधर सकते हैं, हालांकि हर व्यक्ति में ठीक होने का समय अलग हो सकता है।
नाक बहना कब सामान्य सर्दी है और कब साइनस का संकेत?
नाक बहने या बंद होने का शुरुआती दौर अक्सर जुकाम जैसा होता है। सामान्य सर्दी जुकाम में लक्षण आमतौर पर संक्रमण के शुरुआती दो-तीन दिनों में ज्यादा महसूस होते हैं। इसके साथ छींकें, गले में खराश, खांसी और हल्का बदन दर्द भी हो सकता है। अधिकांश जुकाम एक सप्ताह से कम समय में ठीक होने लगते हैं, हालांकि खांसी जैसे कुछ लक्षण ज्यादा समय तक रह सकते हैं।
सीडीसी के अनुसार साइनसाइटिस(Sinusitis) की आशंका तब बढ़ती है, जब नाक बंद रहने या बलगम निकलने के साथ चेहरे पर दबाव, माथे या गालों में दर्द और गले के पीछे बलगम गिरने की परेशानी भी हो। सूंघने की क्षमता कम होना भी इसका एक लक्षण हो सकता है।
लक्षण कितने दिन से हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। यदि नाक और साइनस से जुड़े लक्षण 10 दिन या उससे अधिक समय तक बिना किसी सुधार के बने रहें, तो डॉक्टर बैक्टीरियल साइनस की संभावना पर विचार कर सकते हैं। अगर पहले लक्षण बेहतर हुए और फिर दोबारा बिगड़ गए, तो भी जांच की जरूरत हो सकती है। हालांकि, केवल अवधि के आधार पर खुद से निदान करना सही नहीं है।
क्या पीला या हरा म्यूकस दिखना हमेशा बैक्टीरियल साइनसाइटिस का संकेत है?
मैयोक्लीनिक के अनुसार नाक से निकलने वाला बलगम पीला या हरा दिखाई दे, तो कई लोग मान लेते हैं कि उन्हें बैक्टीरियल संक्रमण हो गया है और अब एंटीबायोटिक दवा लेनी पड़ेगी। लेकिन यह धारणा सही नहीं है। वायरल जुकाम में भी बलगम का रंग साफ से पीला या हरा हो सकता है। संक्रमण के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और उसमें मौजूद कोशिकाओं के कारण बलगम के रंग और गाढ़ेपन में बदलाव आ सकता है।
इसलिए सिर्फ पीले या हरे म्यूकस (बलगम) के आधार पर बैक्टीरियल साइनस का निदान नहीं किया जा सकता। डॉक्टर यह भी देखते हैं कि लक्षण कितने दिनों से हैं, क्या उनमें सुधार हुआ है और क्या तेज बुखार या चेहरे में गंभीर दर्द जैसी परेशानियां मौजूद हैं।
बैक्टीरियल साइनस की आशंका आमतौर पर इन स्थितियों में बढ़ सकती है:
- लक्षण 10 दिन या उससे ज्यादा समय तक बने रहें और सुधार न हो।
- पहले जुकाम में सुधार होने लगे, लेकिन फिर नाक से स्राव, बार-बार सिरदर्द या बुखार जैसे लक्षण दोबारा बढ़ जाएं।
- शुरुआत से ही तेज बुखार, नाक का गाढ़ा स्राव और चेहरे में दर्द लगातार कई दिनों तक बने रहें।
इन संकेतों का आकलन डॉक्टर को करना चाहिए। हर ऐसे मामले में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती।
जुकाम और साइनस के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, क्योंकि वायरल जुकाम के दौरान भी साइनस में सूजन आ सकती है। सामान्य जुकाम में छींक, गले में खराश और नाक बहना प्रमुख हो सकते हैं, जबकि साइनस की समस्या में चेहरे का दबाव, नाक बंद रहना और बलगम का गले में गिरना भी परेशान कर सकता है। पीला या हरा बलगम अपने आप में बैक्टीरियल संक्रमण का प्रमाण नहीं है। लक्षण 10 दिन से ज्यादा बने रहें, गंभीर हों या सुधार के बाद फिर बिगड़ें, तो डॉक्टर से सलाह लें।
