जय माता दी के जयकारों से गूंजा कुरूद: सप्तमी पर निकली 21-21 मीटर की अलौकिक चुनरी यात्रा, आस्था के महासागर में डूबा नगर
कुरूद ।
क्वांर नवरात्रि की पावन सप्तमी पर शनिवार को धर्मनगरी कुरूद पूरी तरह मां आदिशक्ति की भक्ति के रंग में रंग गई। नव दुर्गोत्सव समिति (कारगिल चौक) और नव दिव्य दुर्गोत्सव समिति (गांधी चौक) के संयुक्त तत्वावधान में माता रानी की भव्य एवं ऐतिहासिक चुनरी यात्रा निकाली गई। जैसे ही 21-21 मीटर लंबी दिव्य चुनरी को सिर-माथे पर धारण कर श्रद्धालुओं का कारवां आगे बढ़ा, पूरा नगर “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों, ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्तिमय डीजे की धुनों से गुंजायमान हो उठा।इस पावन अवसर पर वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी चुनरी यात्रा में शामिल होकर मां भगवती के चरणों में मत्था टेका और चुनरी थामकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
बस्तरिहा नाचा और सजीव झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र
यात्रा में आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक प्रतीकों का अनूठा संगम देखने को मिला। भगवान शिव के प्रिय ‘नंदी जी की सवारी’ की मनमोहक झांकी और रहस्यमयी ‘प्रेत झांकी’ को देखने सड़क के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं, पारंपरिक ‘बस्तरिहा नाचा’ के कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
फूलों की बारिश और जयकारों से महका नगर
गांधी चौक से प्रारंभ होकर यह दिव्य यात्रा थाना चौक, पुराना बाजार, सरोजनी चौक, पुराना बस स्टैंड और कारगिल चौक सहित नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी। मार्ग भर श्रद्धालुओं ने चुनरी पर पुष्पवर्षा कर मां का अभिनंदन किया। मातृशक्ति, युवा और बुजुर्ग—हर कोई हाथों में लाल चुनरी थामे नंगे पांव मां के जयकारे लगाते हुए कदम से कदम मिलाकर चल रहा था।हर गुजरते साल के साथ कुरूद में माता रानी की इस चुनरी यात्रा की भव्यता और जन-आस्था का दायरा और अधिक विस्तृत होता जा रहा है। शनिवार को निकली इस भव्य यात्रा ने पूरे कुरूद नगर को एक बार फिर एकाकार कर भक्ति, उल्लास और श्रद्धा के पावन सूत्र में पिरो दिया।
