विश्व गठिया दिवस पर शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बिलासपुर में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित
बिलासपुर ।
विश्व गठिया दिवस के अवसर पर शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बिलासपुर के पंचकर्म विभाग द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को गठिया रोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा इसके बचाव, उपचार एवं प्रबंधन के संबंध में जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में डॉ. रंजीप कुमार दास, विभागाध्यक्ष, पंचकर्म विभाग तथा डॉ. डोमर सिंह ध्रुव, विभागाध्यक्ष, कायचिकित्सा विभाग ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने गठिया रोग के कारणों, लक्षणों, प्रकारों, समय पर निदान तथा उचित चिकित्सा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. रंजीप कुमार दास ने गठिया एवं वातरोगों के प्रबंधन में आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में रोगी की प्रकृति, रोग की अवस्था एवं शारीरिक स्थिति के अनुसार उपचार निर्धारित किया जाता है। अभ्यंग, स्वेदन एवं बस्ति जैसी पंचकर्म प्रक्रियाओं का चयन रोगी की चिकित्सकीय स्थिति के अनुरूप किया जा सकता है। उचित चिकित्सा का उद्देश्य दर्द एवं जकड़न में राहत प्रदान करना तथा रोगी की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।डॉ. डोमर सिंह ध्रुव ने गठिया रोग के विभिन्न प्रकारों, उनके लक्षणों तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन एवं अकड़न होने पर चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है। संतुलित आहार, नियमित एवं उचित शारीरिक गतिविधियाँ, वजन का संतुलन तथा चिकित्सक के निर्देशों का पालन रोग प्रबंधन में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम में छात्र वक्ताओं फैज़ा यूनुस एवं नेहा वर्मा ने भी विश्व गठिया दिवस के महत्व तथा गठिया रोग के प्रति जागरूकता से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने रोग की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर डॉ. नोमिता दीवान, डॉ. विवेक महालवार, डॉ. जगदीश मिश्रा एवं डॉ. हीराचंद पटेल सहित महाविद्यालय के अंतिम वर्ष बी.ए.एम.एस. के विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने गठिया रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से रोगियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करने के महत्व पर बल दिया।कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि गठिया रोग के प्रभावी प्रबंधन के लिए समय पर निदान, उचित चिकित्सकीय परामर्श, नियमित देखभाल तथा स्वस्थ जीवनशैली अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सा का उपयोग रोगी की स्थिति के अनुरूप योग्य चिकित्सक के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए।
