एसीटीआरईसी में अत्याधुनिक तीन-गैंट्री सुविधा, अब तक सैकड़ों मरीजों को मिला उपचार

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रायपुर।

कभी जटिल और संवेदनशील कैंसर के लिए प्रोटॉन थेरेपी कराने के इच्छुक भारतीय मरीजों को विदेश का रुख करना पड़ता था। अत्यधिक महंगे इस उपचार की सुविधा दुनिया के चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध थी। अब भारत में ही यह अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध है और नवी मुंबई के खारघर स्थित एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (एसीटीआरईसी) ने इसे सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध कराकर कैंसर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। चेन्नई में निजी क्षेत्र के अपोलो प्रोटॉन कैंसर सेंटर के साथ एसीटीआरईसी देश में प्रोटॉन थेरेपी उपलब्ध कराने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है।छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल को एसीटीआरईसी की सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुज ने बताया कि संस्थान कैंसर उपचार की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीक, अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा को भी व्यापक स्तर पर मजबूत कर रहा है। परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के अधीन टाटा मेमोरियल सेंटर का महत्वपूर्ण संस्थान एसीटीआरईसी नवी मुंबई के खारघर में स्थित है।

प्रोटॉन थेरेपी एसीटीआरईसी की सबसे महत्वपूर्ण अत्याधुनिक सुविधाओं में से एक है। सामान्य एक्स-रे आधारित रेडिएशन की तुलना में प्रोटॉन बीम को ट्यूमर की निर्धारित गहराई तक अत्यधिक सटीकता से पहुंचाया जा सकता है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर अनावश्यक रेडिएशन की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। यह विशेष रूप से मस्तिष्क, रीढ़, सिर एवं गर्दन के जटिल ट्यूमर, हड्डी और सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर तथा बच्चों में होने वाले कुछ कैंसर के मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक कैंसर मरीज के लिए प्रोटॉन थेरेपी उपयुक्त नहीं होती और उपचार का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा मरीज की बीमारी और उपचार की आवश्यकता के आधार पर किया जाता है।एसीटीआरईसी में स्थापित टाटा मेमोरियल सेंटर की नेशनल हैड्रॉन बीम थेरेपी फैसिलिटी देश की पहली सार्वजनिक क्षेत्र की प्रोटॉन बीम सुविधा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई 2023 को इस सुविधा को राष्ट्र को समर्पित किया था। यहां तीन उपचार कक्ष हैं, जिनमें 360 डिग्री घूमने वाली गैंट्री, पेंसिल बीम स्कैनिंग और इंटेंसिटी मॉड्यूलेटेड प्रोटॉन थेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है। रोबोटिक ट्रीटमेंट काउच तथा छोटे बच्चों के उपचार के दौरान एनेस्थीसिया देने की सुविधा भी उपलब्ध है।

इस सुविधा का महत्व केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। विदेश में प्रोटॉन थेरेपी का एक कोर्स लगभग 1 से 1.5 करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि भारत में उपलब्धता ने उपचार की आर्थिक बाधा को काफी कम करने का रास्ता खोला है। एसीटीआरईसी की सार्वजनिक क्षेत्र की व्यवस्था में मरीजों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उपचार पर सब्सिडी और नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था भी की गई है। 2025 तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार एसीटीआरईसी में उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों का एक बड़ा हिस्सा सब्सिडी या नि:शुल्क श्रेणी में रहा है।निजी क्षेत्र में चेन्नई स्थित अपोलो प्रोटॉन कैंसर सेंटर में प्रोटॉन थेरेपी की अनुमानित लागत करीब 25 से 50 लाख रुपये बताई गई है, हालांकि वास्तविक खर्च कैंसर के प्रकार, उपचार की अवधि, सत्रों की संख्या, जांच और अन्य उपचारों पर निर्भर करता है। अपोलो के अनुसार भारत में प्रोटॉन थेरेपी की लागत अमेरिका और यूरोप की तुलना में काफी कम हो सकती है। इसलिए विदेश में इलाज के खर्च की तुलना में भारत में उपचार उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक तथा यात्रा संबंधी बोझ कम हो सकता है।

एसीटीआरईसी में प्रोटॉन थेरेपी की सुविधा शुरू होने के बाद इसका उपयोग लगातार बढ़ा है। भारत सरकार के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, 15 अगस्त 2023 से शुरू हुई इस सुविधा में दिसंबर 2025 तक 748 मरीजों का उपचार किया जा चुका था। संस्थान की योजना पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद प्रतिवर्ष करीब 800 मरीजों को प्रोटॉन थेरेपी उपलब्ध कराने की है।प्रोटॉन थेरेपी की खासियत इसकी सटीकता है। प्रोटॉन बीम में शरीर के भीतर ऊर्जा के वितरण को इस प्रकार नियंत्रित किया जा सकता है कि ट्यूमर तक आवश्यक रेडिएशन पहुंचाने के साथ आसपास के स्वस्थ अंगों पर पड़ने वाली खुराक को कम किया जा सके। इसका महत्व उन मामलों में और बढ़ जाता है जहां ट्यूमर आंख, मस्तिष्क, रीढ़, हृदय अथवा अन्य महत्वपूर्ण अंगों के बेहद करीब स्थित हो। बच्चों में स्वस्थ ऊतकों और विकासशील अंगों को अनावश्यक रेडिएशन से बचाने की दृष्टि से भी यह तकनीक महत्वपूर्ण मानी जाती है।प्रोटॉन थेरेपी के साथ एसीटीआरईसी में कैंसर उपचार का व्यापक ढांचा भी विकसित किया जा रहा है। संस्थान की सर्जिकल सुविधाओं में जटिल और रोबोटिक सर्जरी की क्षमता है। राजा राव शोधिका में 14 ऑपरेशन थिएटर हैं, जहां हर वर्ष करीब 10 हजार कैंसर सर्जरी की जाती हैं। डे-केयर कीमोथेरेपी के माध्यम से भी बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

एसीटीआरईसी की रेडियोलॉजिकल रिसर्च यूनिट और न्यूक्लियर मेडिसिन सुविधाएं कैंसर के निदान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रेडियोआइसोटोप आधारित जांच और उपचार के साथ-साथ संस्थान में कैंसर की जैविकी, आनुवंशिकी और उपचार पद्धतियों पर अनुसंधान भी किया जा रहा है। उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं के माध्यम से बड़े वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण की क्षमता विकसित की गई है।सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी के माध्यम से कैंसर के प्रसार, जीवनशैली और आनुवंशिक जोखिम कारकों का अध्ययन किया जाता है तथा विभिन्न प्रकार के कैंसर की स्क्रीनिंग से जुड़े जनस्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए टाटा मेमोरियल सेंटर की तंबाकू क्विटलाइन भी परामर्श और सहायता उपलब्ध कराती है।एसीटीआरईसी उपचार के साथ चिकित्सा शिक्षा और मानव संसाधन विकास पर भी जोर दे रहा है। विशेषज्ञ और सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के अलावा नर्सिंग, तकनीकी प्रशिक्षण और फेलोशिप कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां अध्ययन कर रहे हैं और देश-विदेश से चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षण एवं अवलोकन के लिए पहुंचते हैं।आने वाले वर्षों में संस्थान की उपचार क्षमता को करीब 900 बेड तक बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। अतिरिक्त बेड और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सुविधाओं वाला हेमेटोलिम्फॉइड ब्लॉक, अन्य सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए अस्पताल तथा आधुनिक लीनियर एक्सेलरेटर से युक्त एकीकृत रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सुविधा जैसी परियोजनाएं इस विस्तार का हिस्सा हैं।

एसीटीआरईसी का विस्तार यह दर्शाता है कि भारत में कैंसर उपचार अब केवल पारंपरिक रेडिएशन, सर्जरी और कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं रह गया है। प्रोटॉन थेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीक का देश में उपलब्ध होना उन मरीजों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिन्हें पहले इस उपचार के लिए विदेश जाना पड़ सकता था। अत्याधुनिक तकनीक, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, सब्सिडी, अनुसंधान और विशेषज्ञ मानव संसाधन को एक साथ विकसित करने का प्रयास कैंसर उपचार को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।करीब 900 बेड की प्रस्तावित क्षमता, अत्याधुनिक रेडिएशन तकनीकों और मजबूत अनुसंधान ढांचे के साथ एसीटीआरईसी आने वाले वर्षों में भारत के कैंसर उपचार नेटवर्क के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। प्रोटॉन थेरेपी इस विस्तार का ऐसा पक्ष है, जो अत्याधुनिक कैंसर उपचार को भारत में उपलब्ध कराने के साथ-साथ विदेश में इलाज से जुड़ी भारी लागत और यात्रा की आवश्यकता को कम करने की दिशा में नई संभावनाएं खोलता है।


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