प्रोलेप्स एवं यूरिन लीक जैसी समस्याओं के आधुनिक उपचार पर विशेषज्ञों का मंथन

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रायपुर, 11 जुलाई 2026. पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा यूरोगायनेकोलॉजी एवं वैजाइनल सर्जरी विषय पर दो दिवसीय सीएमई एवं लाइव सर्जिकल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन वेजाइनल सर्जन सोसाइटी एवं मेनोपॉज सोसायटी के सहयोग से किया गया, जिसमें प्रदेश सहित देश के प्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने पीजी विद्यार्थियों तथा कई चिकित्सकों को लाइव प्रशिक्षण दिया। इस सम्मेलन और कार्यशाला में 100 से अधिक चिकित्सकों की भागीदारी रही। कार्यशाला में प्रोलेप्स एवं यूरिन लीक जैसी समस्याओं के आधुनिक उपचार पर विशेषज्ञों ने व्यापक विमर्श किया।

कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज तथा डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यूरोगायनेकोलॉजी से संबंधित नवीनतम तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों पर विस्तृत व्याख्यान दिए। कार्यक्रम की सराहना करते हुए डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक कार्यशालाएं चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा एवं शल्य तकनीकों से अद्यतन (अपडेट) करने के साथ-साथ महिला मरीजों हेतु उच्च गुणवत्ता वाली, सुरक्षित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला के प्रथम दिन हिस्टेरोस्कोपी के यूरोडायनामिक स्टडी, मिक्स्ड एवं स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस तथा वॉल्ट प्रोलैप्स के वैजाइनल उपचार जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपने अनुभव साझा किए और जटिल मामलों पर चर्चा की।

दो दिवसीय आयोजित लाइव सर्जिकल वर्कशॉप में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नॉन-डिसेंट वैजाइनल हिस्टरेक्टॉमी, सिस्टोसील रिपेयर, सैक्रो हिसटेरोपेक्सी फिक्सेशन, वैजिनोस्कोपी, सिस्ट सर्जरी, प्रोलेप्स रिपेयर, हिस्टोस्कोपी सहित कई जटिल शल्य प्रक्रियाओं का सफल प्रदर्शन किया। इस दौरान पीजी विद्यार्थियों एवं चिकित्सकों को आधुनिक शल्य तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. आभा सिंह, डॉ. ज्योति जायसवाल, डॉ. हरा पटनायक, डॉ. विनीत मिश्रा, डॉ. आशा जैन सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विशेषज्ञों ने शल्य क्रिया एवं अनुभव साझा किए। आयोजन को 6 आईएमएस क्रेडिट पॉइंट्स प्रदान किए गए।

प्रदेश की वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आभा सिंह ने बताया कि प्राकृतिक वैजाइनल मार्ग (Natural Vaginal Route) से बच्चेदानी (गर्भाशय) निकालने की सर्जरी सुरक्षित एवं प्रभावी है। इस तकनीक में पेट पर कोई चीरा नहीं लगाया जाता, इसलिए बाहर कोई टांका या ऑपरेशन के निशान दिखाई नहीं देते। मरीज को अपेक्षाकृत कम दर्द होता है, वह जल्दी चलने-फिरने लगती है और कम समय में स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा सकती है।

विभागाध्यक्ष प्रसूति एवं स्त्री रोग तथा आयोजन की अध्यक्ष डॉ.ज्योति जायसवाल ने बताया कि अनेक महिलाएं शर्म, संकोच या जागरूकता की कमी के कारण यूरिन लीक (मूत्र असंयम) और गर्भाशय के बाहर निकलने (यूटेराइन प्रोलैप्स) जैसी समस्याओं के लिए समय पर चिकित्सक से संपर्क नहीं कर पाती हैं। जबकि आधुनिक चिकित्सा में दवाइयों एवं शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के माध्यम से इन बीमारियों का सफल और प्रभावी उपचार संभव है।

कार्यशाला के सफल आयोजन में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. शालिनी जैन, डॉ. रुचि किशोर गुप्ता, तथा एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. जया लालवानी एवं डॉ. मंजु टंडन का विशेष योगदान रहा।
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