दिमाग हार्डवेयर तो मन साफ्टवेयर, जरुरत पड़े तब कर सकते हैं क्लीन : प्रो.प्रोमिला सिंह
रायपुर, 11 नवंबर 2022। पं. रविशंकर शुक्ल विवि के मनोविज्ञान अध्ययनशाला में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर दो दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। शुक्रवार को अंतिम दिन मनोविज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.प्रोमिला सिंह ने 2 घंटे के इंटरेक्टिव सेशन में उन्होंने विद्याथिर्यों से मानसिक स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वतर्मान समय में युवा पीढ़ी बहुत भाग्यशाली है कि उनके पास अवसरों के भंडार है, पर परेशानी यहाँ है कि उन अवसरों को ग्रहण करने के लिये उचित दिशा निर्देश एवं रास्ते का सही चयन करना उन्हें नहीं आता। इसके कारण बहुत अवसरों के एक साथ होने से मानसिक स्वास्थ्य को न रख पाना है।

मानव में असीमित क्षमताएं है. जितना एक्सप्लोर करेंगे उतना मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होगा, जितना संकुचित होंगे, उतने अवसरों से हाथ धो बैठेंगे। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य और बीमारी में बहुत बड़ा अंतर है। जो सामान्य लोग नहीं जानते लेकिन मनोविज्ञान के विद्यार्थी होने के नाते है यह ज्ञान न केवल अर्जित करना चाहियें बल्कि इसे जनसामान्य तक फैलाना भी चाहिये।

मनोविज्ञान विषय का दायरा बहुत बड़ा है। इस विषय में असीम संभावनाएँ हैं क्योंकि मानव व्यवहार एवं उससे संबधित जटिलताएं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देखने को मिलती हैं। मनोविज्ञान विषय के कई माडलों के आधार पर भी व्यवहार व मानसिक स्वास्थ्य कैसे अच्छा बनाया जाये के बारे में बताया। यदि कोई समस्या है, भी तो व्यवहार परिमार्जन की कई तकनीकों के उपयोग के बारे में भी उन्होंने विस्तार से चर्चा की।

प्रो.प्रोमिला सिंह ने बताया कि दिमाग हार्डवेयर तथा मन साफ्टवेयर है जिसे आवश्यकता पड़ने पर क्लीन किया जा सकता है। विचार प्रक्रिया को भी रिफार्म कैसे किया जा सकता है, इस पर बहुत अच्छा डेमो विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया। सेमिनार में तकनीकी सत्र के बाद विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए गए। सेमिनार में विभागाध्यक्ष प्रो. प्रभावती शुक्ला, प्रो. मीता झा, डॉ. रोली तिवारी, डॉ. जीता बेहरा, टिकेश्वर साहू एवं ममता साहू आदि शामिल रहे।
