कोरोना ने निकाला चीन का ‘दम’, प्रतिबंधों के बोझ तले लोग; अभी दूर-दूर तक राहत नहीं

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चीन,11 नवम्बर 2022\ ने कोरोना महामारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतिबंधों के बोझ के तले लोगों का जीना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है। चीन की सरकार लगातार कठोर नियमों से लोगों पर अत्याचार कर रही है। जिसका कई शहरों में लोगों के आक्रोश के रूप में असर भी दिख रहा है। हालात ये है कि लाखों लोग लॉकडाउन में घरों में कैद हैं। हजारों लोगों की नौकरी पर असर पड़ रहा है। अब सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए नई रणनीति तैयार की है। इन नए नियमों में आम लोगों के लिए मामूली ढिलाई शामिल है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि आवाम के लगातार गुस्सा होने के बाद चीन की सरकार अब बैकफुट में है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में चीन में कोरोना के 10200 से अधिक मामले दर्ज किए गए। शुक्रवार को एक बयान के अनुसार, चीन पहुंचने वाले यात्रियों को होटल में क्वारंटाइन के लिए कम से कम पांच दिन रहना अनिवार्य होगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट है कि इसके अलावा तीन दिन घर पर क्वारंटाइन रहना जरूरी होगा। इससे पहले क्वारंटाइन के नियम 7 दिन होटल में और तीन दिन घर पर रहना अनिवार्य था।

अगले साल तक रह सकते हैं प्रतिबंध
चीन में स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना महामारी से निकलने में अभी चीन को काफी वक्त लग सकता है। ऐसा अनुमान है कि चीन की सरकार प्रतिबंधों को अगले साल अंत तक जारी रख सकती है। ब्लूमबर्ग ने चीन में अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण के हवाले से बताया कि चीन में सामान्य स्थिति की रफ्तार काफी धीमी होने वाली है। जो चीन में आर्थिक सुधार के इच्छुक निवेशकों के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

ढिलाई बरतने के मूड में नही जिनपिंग सरकार
चीन की शी जिनपिंग सरकार अभी कोरोना प्रतिबंधों पर ढिलाई के मूड में बिल्कुल नहीं है। हालांकि इससे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था पर बुरा असर पड़ा है। हाल ही में एप्पल कंपनी को चीन में अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ा था। चीन में गिरती अर्थव्यवस्था और महंगाई के बढ़ने का आलम ये है कि लोग दिन ब दिन बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उनका फोकस कोरोना महामारी की बदलती स्थिति और वायरस के उत्परिवर्तन के अनुसार उनमें सुधार की तरफ है।


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