रायपुर - https://thefourthmirror.com Thu, 05 Nov 2026 16:58:49 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.8 https://thefourthmirror.com/wp-content/uploads/2022/10/cropped-IMG_20221028_135824-32x32.jpg रायपुर - https://thefourthmirror.com 32 32 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि https://thefourthmirror.com/2026/11/05/chief-minister-vishnu-deo-sai-paid-a-heartfelt-tribute-to-the-late-mla-doman-lal-korsewada/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/chief-minister-vishnu-deo-sai-paid-a-heartfelt-tribute-to-the-late-mla-doman-lal-korsewada/#respond Thu, 05 Nov 2026 16:58:49 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67898 रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय...

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रायपुर।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में  अहिवारा के दिवंगत विधायक स्वर्गीय डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री   साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक सरल, सहज, मृदुभाषी और मिलनसार जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज की सेवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। विशेष रूप से अनुसूचित जाति समाज के विकास, सामाजिक सशक्तीकरण और क्षेत्र की प्रगति में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा को लोग  आत्मीयता के साथ ‘गुरुजी’ कहकर संबोधित करते थे। यह संबोधन उनके प्रति समाज के गहरे सम्मान और विश्वास का प्रतीक था। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया था। जनसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा के साथ जुड़े आत्मीय प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि जब वे उपचार के लिए हैदराबाद में भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल को भी हैदराबाद जाकर उनका हाल-चाल जानने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके स्वस्थ होकर लौटने की हम सभी को आशा थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनका जाना हम सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा ने जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव क्षेत्र के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। उनकी स्मृतियों और जनसेवा की विरासत को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा। यह उनके प्रति प्रदेश सरकार और क्षेत्र की जनता की ओर से सम्मानपूर्ण श्रद्धांजलि होगी।श्रद्धांजलि सभा में स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद  बृजमोहन अग्रवाल और जगदलपुर विधायक  किरण देव ने भी स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक  ललित चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष   कीर्ति नायक, कलेक्टर  अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। सभी ने स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया।

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जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान को 33% से बढ़ाया https://thefourthmirror.com/2026/11/05/climate-change-increased-the-damage-caused-by-cyclone-arnab-by-33/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/climate-change-increased-the-damage-caused-by-cyclone-arnab-by-33/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:41:20 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67882  रायपुर। इंपीरियल कॉलेज लंदन के नए अध्ययन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन ने 28 अक्टूबर को...

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 रायपुर।

इंपीरियल कॉलेज लंदन के नए अध्ययन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश से टकराए चक्रवात अर्नब की हवाओं की रफ्तार करीब 5% और आईवॉल में बारिश की तीव्रता 11% बढ़ाई। इससे तूफान से हुआ आर्थिक नुकसान औद्योगिक युग से पहले की जलवायु की तुलना में 33% अधिक रहा।चक्रवात अर्नब के आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद हुए नुकसान की एक नई वैज्ञानिक पड़ताल बताती है कि इस तूफान की तबाही में जलवायु परिवर्तन की भी भूमिका थी। इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रांथम इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक त्वरित अध्ययन के मुताबिक, मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब से होने वाले प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान को करीब 33% बढ़ा दिया। इसका मतलब है कि अगर इंसानों की वजह से धरती का तापमान नहीं बढ़ा होता, तो इस तूफान से संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान कम होता।चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। अध्ययन में इस्तेमाल किए गए अंतरराष्ट्रीय ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, लैंडफॉल के समय इसकी तीव्रता सैफिर-सिम्पसन पैमाने पर श्रेणी 3 के तूफान के बराबर थी। इस दौरान एक मिनट की अवधि में औसत अधिकतम हवा की रफ्तार 202 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। तूफान के साथ भारी बारिश हुई और आंध्र प्रदेश में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

हवा की रफ्तार में 5%, आईवॉल में बारिश 11% बढ़ी

शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए इंपीरियल कॉलेज स्टॉर्म मॉडल (IRIS) का इस्तेमाल किया कि जलवायु परिवर्तन ने अर्नब की तीव्रता और उससे हुए नुकसान को किस हद तक बढ़ाया। इसके लिए उन्होंने मौजूदा जलवायु परिस्थितियों में तूफान के व्यवहार की तुलना ऐसी काल्पनिक जलवायु से की, जिसमें इंसानों के कारण ग्लोबल वार्मिंग नहीं हुई होती।अध्ययन के मुताबिक, मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब की अधिकतम हवा की रफ्तार लगभग 5% बढ़ाई। इसके अलावा, तूफान के आईवॉल यानी उसकी आंख के चारों ओर मौजूद सबसे शक्तिशाली बादलों वाले हिस्से में बारिश की दर 11% अधिक रही।इन बदलावों का असर आर्थिक नुकसान पर भी पड़ा। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि भारत में भौतिक संपत्तियों को हुआ प्रत्यक्ष नुकसान औद्योगिक युग से पहले की जलवायु की तुलना में 33% अधिक था। अध्ययन के अनुसार, कुल आर्थिक नुकसान का लगभग 25% हिस्सा सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा था।

तापमान 2.6 डिग्री बढ़ा तो नुकसान 56% ज्यादा

अध्ययन ने भविष्य की एक ऐसी स्थिति का भी आकलन किया, जिसमें वैश्विक तापमान औद्योगिक युग से पहले के स्तर की तुलना में 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है। यह वह तापमान वृद्धि है, जिसकी ओर मौजूदा वैश्विक नीतियों के जारी रहने पर इस सदी के अंत तक दुनिया बढ़ सकती है।इस परिदृश्य में अर्नब जैसा कोई चक्रवात औद्योगिक युग से पहले की जलवायु की तुलना में 8% अधिक शक्तिशाली हो सकता है और उससे होने वाला आर्थिक नुकसान 56% ज्यादा हो सकता है।इंपीरियल कॉलेज लंदन के भौतिकी विभाग में ट्रॉपिकल साइक्लोन रिस्क मॉडलिंग के शोधकर्ता डॉ. नाथन स्पार्क्स के मुताबिक, हवा की रफ्तार में 5% और आईवॉल में बारिश की तीव्रता में 11% की बढ़ोतरी सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन जमीन पर इसका मतलब ज्यादा घरों और बुनियादी ढांचे का नष्ट होना, फसलों को नुकसान और लोगों की आजीविका पर चोट हो सकता है।ग्रांथम इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राल्फ टूमी ने कहा कि IRIS मॉडल की मदद से बड़े तूफानों पर फॉसिल फ्यूल के उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के वास्तविक प्रभावों को समझा जा सकता है। उनके मुताबिक, दुनिया में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की कुल संख्या अपेक्षाकृत स्थिर रहने के बावजूद बनने वाले तूफान अधिक खतरनाक और शक्तिशाली होते जा रहे हैं।

तूफान की तीव्रता से नुकसान तक का आकलन

इस अध्ययन की खास बात यह है कि इसमें केवल यह नहीं देखा गया कि जलवायु परिवर्तन ने तूफान की तीव्रता को कितना बढ़ाया। शोधकर्ताओं ने यह भी आकलन किया कि इस अतिरिक्त तीव्रता का आर्थिक नुकसान पर क्या असर पड़ा।इसके लिए Climate Damage Tracker के तहत विकसित एक ऐसी पद्धति का इस्तेमाल किया गया, जो मौसम की चरम घटनाओं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को उनके सामाजिक और आर्थिक नुकसान से जोड़ती है। इस पद्धति में मौसम संबंधी एट्रिब्यूशन अध्ययन और सामाजिक-आर्थिक नुकसान से जुड़े आंकड़ों को मिलाकर किसी खास घटना में जलवायु परिवर्तन की भूमिका का अनुमान लगाया जाता है।शोधकर्ताओं के मुताबिक, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों पर जलवायु परिवर्तन के असर का आकलन करना आसान नहीं है, क्योंकि इनके व्यवहार और तीव्रता पर उच्च गुणवत्ता वाले वैश्विक अवलोकन 45 साल से भी कम समय के उपलब्ध हैं। इस कमी को दूर करने के लिए IRIS मॉडल ने दुनिया भर में लाखों कृत्रिम चक्रवातों के संभावित रास्तों का डेटाबेस तैयार किया है। इसमें तूफान के बनने से लेकर तट से टकराने तक की यात्रा और अलग-अलग चरणों में उसकी हवा की रफ्तार का आकलन शामिल है।चक्रवात अर्नब पर यह अध्ययन एक बार फिर दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन का आर्थिक असर किसी दूर के भविष्य की आशंका भर नहीं है। बढ़ती गर्मी तूफानों की तीव्रता और उनसे होने वाले नुकसान को प्रभावित कर सकती है। आंध्र प्रदेश में अर्नब से हुए नुकसान का यह आकलन बताता है कि जलवायु परिवर्तन की कीमत तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों, उनकी संपत्तियों और आजीविका को चुकानी पड़ रही है।

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कलिंगा विश्वविद्यालय में दीपावली मिलन 2026 का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, फैशन शो और उत्साहपूर्ण सहभागिता ने बांधा समां https://thefourthmirror.com/2026/11/05/kalinga-university-celebrates-diwali-milan-2026-with-grand-celebrations-cultural-performances-fashion-shows-and-enthusiastic-participation/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/kalinga-university-celebrates-diwali-milan-2026-with-grand-celebrations-cultural-performances-fashion-shows-and-enthusiastic-participation/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:37:03 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67879 नया रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय में 4 नवंबर 2026 को से दीपावली मिलन 2026 का आयोजन...

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नया रायपुर।

कलिंगा विश्वविद्यालय में 4 नवंबर 2026 को से दीपावली मिलन 2026 का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह, पारंपरिक उल्लास और आपसी एकता के वातावरण में किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नेतृत्व, संकाय सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन उत्सव, आपसी सौहार्द, सम्मान और सांस्कृतिक जीवंतता का एक सुंदर संगम रहा।इस समारोह ने विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया, जिसके अंतर्गत एक सशक्त, समावेशी और सौहार्दपूर्ण संस्थागत वातावरण को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अमूल्य योगदान को सम्मानित किया जाता है।कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं कुलाधिपति के आगमन पर कुलसचिव द्वारा पौधा भेंट कर आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। पौधा भेंट करने की यह परंपरा सम्मान, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

इसके पश्चात पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मंगलमय अवसर पर ज्ञान, समृद्धि और सफलता की कामना की गई। समारोह में मधुर गायन, मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों, काव्य पाठ एवं सामूहिक गायन जैसी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और आकर्षण का संचार किया।कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों की सक्रिय सांस्कृतिक सहभागिता रही। संकाय सदस्यों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुतियां एवं मधुर गायन प्रस्तुत किए। उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों द्वारा खूब सराहना मिली। इन प्रस्तुतियों ने यह दर्शाया कि कलिंगा विश्वविद्यालय का परिवार शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति में भी समान रूप से प्रतिभाशाली है।दीपावली मिलन 2026 का एक प्रमुख आकर्षण फैशन शो प्रतियोगिता रही, जिसमें प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास, रचनात्मकता, आकर्षक व्यक्तित्व और पारंपरिक परिधानों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता ने समारोह में विशेष उत्साह और आकर्षण जोड़ते हुए सभी का ध्यान आकर्षित किया।

इस प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रतिष्ठित मिस्टर कलिंगा एवं मिस कलिंगा के खिताब क्रमशः श्री शुभम पी., उप अधिष्ठाता – छात्र कल्याण (Deputy Dean – Students’ Welfare) तथा सुश्री वर्तिका सचान, इवेंट कोऑर्डिनेटर को प्रदान किए गए। दोनों विजेताओं को यह सम्मान विश्वविद्यालय की माननीय प्रो-वाइस चांसलर डॉ. मोनिका सेठी शर्मा द्वारा प्रदान किया गया। यह क्षण समारोह के यादगार पलों में से एक रहा। फैशन शो ने विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, रचनात्मकता और उत्साह को एक प्रभावशाली मंच प्रदान किया।समारोह का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण सम्मान एवं उपहार वितरण समारोह रहा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नेतृत्व, डीन, विभागाध्यक्षों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त किया गया। साथ ही, शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को दीपावली के उपहार वितरित किए गए। यह पहल विश्वविद्यालय के प्रति उनके समर्पण, निरंतर योगदान और संस्थान के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सराहनीय प्रयास रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। संगीत, नृत्य और काव्य पाठ ने समारोह को और भी यादगार बनाया। विशेष रूप से संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान प्रदान की। उनकी प्रस्तुतियों ने विश्वविद्यालय में छिपी प्रतिभाओं, रचनात्मकता और सांस्कृतिक उत्साह को उजागर किया।इस आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों, विभागीय प्रतिनिधियों तथा शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। सभी के सामूहिक प्रयास, समन्वय और सहयोग ने इस आयोजन को एक वास्तविक विश्वविद्यालय-स्तरीय उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। यह आयोजन कलिंगा विश्वविद्यालय परिवार के बीच एकता, सहयोग, आपसी सम्मान और सामूहिक सहभागिता की भावना का प्रतीक बना।समारोह का समापन हर्षोल्लास और आत्मीयता के वातावरण में हुआ, जिसने सभी उपस्थित सदस्यों के मन में सुखद एवं अविस्मरणीय स्मृतियां संजो दीं। इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दीपावली मिलन 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि कलिंगा विश्वविद्यालय केवल शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपने प्रत्येक सदस्य के लिए एक सकारात्मक, समावेशी और पारिवारिक वातावरण विकसित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। शैक्षणिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियों से परे सभी को एक मंच पर लाकर विश्वविद्यालय ने आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और अपनत्व की भावना को प्रोत्साहित किया।दीपावली मिलन 2026 प्रतिभा, एकता, सम्मान, सहयोग और संस्थागत गौरव का एक यादगार उत्सव बनकर सामने आया, जिसने कलिंगा विश्वविद्यालय की समग्र विकास, सामूहिक प्रगति और सशक्त विश्वविद्यालय समुदाय के निर्माण की परिकल्पना को और अधिक सुदृढ़ किया।

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दीपावली पर बस्तर के परचनपाल की हस्तकला का जलवा https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-splendor-of-the-handicrafts-of-parchanpal-of-bastar-on-diwali/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-splendor-of-the-handicrafts-of-parchanpal-of-bastar-on-diwali/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:08:57 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67866 रायपुर। आगामी दीपावली और अन्य प्रमुख त्योहारों की आहट के साथ ही बाजारों में स्थानीय...

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रायपुर।

आगामी दीपावली और अन्य प्रमुख त्योहारों की आहट के साथ ही बाजारों में स्थानीय कला और पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) हस्तनिर्मित उत्पादों की रौनक देखते ही बन रही है। इस त्योहारी माहौल में बस्तर जिले के बस्तर के परचनपाल गांव की ख्यातिप्राप्त हस्तशिल्प कलाकार  शोभा बघेल द्वारा सीसल के प्राकृतिक रेशों से तैयार किए गए कलात्मक बैग और आकर्षक सजावटी उत्पाद आमजन की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। घरों की साज-सज्जा और उपहारों के आदान-प्रदान के लिए इन कलाकृतियों की बढ़ती मांग ने त्योहारों के उत्साह को और बढ़ा दिया है।

वोकल फॉर लोकल की भावुक अपील- उत्सवों में लाएं स्थानीय कारीगरों की खुशहाली

त्योहारी सीजन में अपने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच शिल्पकार शोभा बघेल ने नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की है। उनका कहना है कि पर्व-त्योहारों पर बाजार के सामान्य सामानों के बजाय यदि लोग हमारे स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प को अपनाएं, तो उत्सवों की खुशियां और अधिक दोगुनी हो जाती हैं। इससे न केवल हमारी पारंपरिक कला को सम्मान मिलता है, बल्कि दिन-रात पसीना बहाकर इन अनुपम कृतियों को तराशने वाले स्थानीय शिल्पकारों के परिवारों के जीवन में भी वास्तविक आर्थिक समृद्धि का उजाला फैलता है।

संघर्ष से सफलता तक- 2004 के प्रशिक्षण से शुरू हुआ सफर

शोभा बघेल की यह सफलता उनकी अटूट इच्छाशक्ति, अथक परिश्रम और पारंपरिक हुनर के अनूठे संगम की जीवंत मिसाल है। उनके इस प्रेरणादायी सफर की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब उन्होंने हस्तशिल्प विकास बोर्ड से सीसल के रेशों से हस्तशिल्प तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण हासिल किया था।प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सीसल के मजबूत और प्राकृतिक रेशों को बारीक गूंथकर बैग, दीवार सज्जा, टेबल मैट और उपहार योग्य करीब 40 से 50 प्रकार की बेहद आकर्षक व टिकाऊ कलाकृतियां बनाना शुरू किया। समय के साथ उनकी इस अनूठी कला को व्यापक पहचान मिली। आज उनके उत्पादों की मांग चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर बड़े पैमाने पर है। बड़ी संख्या में लोग सीधे उनके घर पहुंचकर भी खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की नियमित और सम्मानजनक आय हो रही है।

एक हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

अपनी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के साथ-साथ शोभा बघेल ने समाज के प्रति अपने दायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभाया है। उन्होंने अपने हुनर को अपने तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अंचल की एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा है और स्वावलंबन का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।त्योहारों के इस पावन अवसर पर पर्यावरण-अनुकूल सीसल उत्पादों की यह गूंज प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के संकल्प को तो सशक्त कर ही रही है, साथ ही महिला सशक्तीकरण और जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता की एक अनूठी और प्रेरणादायी मिसाल भी पेश कर रही है।

वोकल फॉर लोकल की भावुक अपील- उत्सवों में लाएं स्थानीय कारीगरों की खुशहाली

त्योहारी सीजन में अपने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच शिल्पकार शोभा बघेल ने नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की है। उनका कहना है कि पर्व-त्योहारों पर बाजार के सामान्य सामानों के बजाय यदि लोग हमारे स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प को अपनाएं, तो उत्सवों की खुशियां और अधिक दोगुनी हो जाती हैं। इससे न केवल हमारी पारंपरिक कला को सम्मान मिलता है, बल्कि दिन-रात पसीना बहाकर इन अनुपम कृतियों को तराशने वाले स्थानीय शिल्पकारों के परिवारों के जीवन में भी वास्तविक आर्थिक समृद्धि का उजाला फैलता है।

संघर्ष से सफलता तक- 2004 के प्रशिक्षण से शुरू हुआ सफर

शोभा बघेल की यह सफलता उनकी अटूट इच्छाशक्ति, अथक परिश्रम और पारंपरिक हुनर के अनूठे संगम की जीवंत मिसाल है। उनके इस प्रेरणादायी सफर की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब उन्होंने हस्तशिल्प विकास बोर्ड से सीसल के रेशों से हस्तशिल्प तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण हासिल किया था।प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सीसल के मजबूत और प्राकृतिक रेशों को बारीक गूंथकर बैग, दीवार सज्जा, टेबल मैट और उपहार योग्य करीब 40 से 50 प्रकार की बेहद आकर्षक व टिकाऊ कलाकृतियां बनाना शुरू किया। समय के साथ उनकी इस अनूठी कला को व्यापक पहचान मिली। आज उनके उत्पादों की मांग चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर बड़े पैमाने पर है। बड़ी संख्या में लोग सीधे उनके घर पहुंचकर भी खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की नियमित और सम्मानजनक आय हो रही है।

एक हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

अपनी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के साथ-साथ शोभा बघेल ने समाज के प्रति अपने दायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभाया है। उन्होंने अपने हुनर को अपने तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अंचल की एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा है और स्वावलंबन का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के संकल्प को तो सशक्त कर ही रही है, साथ ही महिला सशक्तीकरण और जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता की एक अनूठी और प्रेरणादायी मिसाल भी पेश कर रही है।

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डीएमएफ की कार्ययोजना में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना को दें प्राथमिकता – राज्यपाल डेका https://thefourthmirror.com/2026/11/05/prioritize-environmental-conservation-education-health-and-infrastructure-in-the-dmf-action-plan-governor-deka/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/prioritize-environmental-conservation-education-health-and-infrastructure-in-the-dmf-action-plan-governor-deka/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:05:42 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67863  रायपुर। राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का...

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 रायपुर।

राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए। राज्यपाल  डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।

 वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन 
राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।

जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना 
राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।
 

खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं 
राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए।राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान 
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।राज्यपाल ने कहा कि मनरेगा की तर्ज पर डीएमएफ के कार्यों में भी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के भौतिक सत्यापन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन हुआ है और उनसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है।

विस्थापित परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश 
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से विस्थापित परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित और विस्थापित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनके लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य की जानकारी उपलब्ध है। पोर्टल के जरिए कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है।बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी तथा खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

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जनदर्शन में मिले 53 आवेदन, समय-सीमा में निराकरण के निर्देश https://thefourthmirror.com/2026/11/04/53-applications-received-during-jan-darshan-instructions-issued-for-resolution-within-a-set-timeframe/ https://thefourthmirror.com/2026/11/04/53-applications-received-during-jan-darshan-instructions-issued-for-resolution-within-a-set-timeframe/#respond Wed, 04 Nov 2026 12:46:13 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67842    जांजगीर-चांपा । कलेक्टर  जन्मेजय महोबे के निर्देशन में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में...

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   जांजगीर-चांपा ।

कलेक्टर  जन्मेजय महोबे के निर्देशन में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में डिप्टी कलेक्टर देवेन्द्र चौधरी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याओं एवं मांगों को सुना। जनदर्शन के दौरान कुल 53 आवेदन प्राप्त हुए। जनदर्शन में तहसील जांजगीर के ग्राम पंचायत खोखरा निवासी निशा सूर्यवंशी ने आयुष्मान कार्ड बनवाने, ग्राम पंचायत बनारी निवासी रामेश्वर प्रसाद साहू ने जमीन की मुआवजा राशि दिलाने, तहसील पामगढ़ के ग्राम जेवरा निवासी  मनोज कुमार केंवट ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया।

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राज्योत्सव 2026 : वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को प्रथम पुरस्कार https://thefourthmirror.com/2026/11/04/rajyotsav-2026-first-prize-for-the-forest-and-climate-change-departments-exhibition/ https://thefourthmirror.com/2026/11/04/rajyotsav-2026-first-prize-for-the-forest-and-climate-change-departments-exhibition/#respond Wed, 04 Nov 2026 12:42:07 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67839 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में...

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने यह सम्मान प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण कुमार पांडेय ने पुरस्कार प्राप्त किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों- कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।गौरतलब है कि वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर तैयार प्रदर्शनी में बस्तर में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन और आजीविका के अवसरों से लेकर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की पहलों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

बस्तर में बदलाव की तस्वीर बनी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण
प्रदर्शनी को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था। प्रवेश द्वार पर जगदलपुर के जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूप बनाए गए थे। इनके माध्यम से बस्तर की जनजातीय
संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा को प्रदर्शित किया गया।‘बदलता बस्तर’ खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित ‘तुंगल कैफे’ की पहल विशेष आकर्षण रही। यहां मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कैफे का संचालन कर रही हैं, जबकि स्थानीय युवा पर्यटकों को नौकायन और कयाकिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर आजीविका अर्जित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में इस पहल के माध्यम से बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश और रोजगार के नए अवसरों को सामने रखा गया। इसके साथ ही कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के मॉडल प्रदर्शित किए गए। धुड़मारास गांव का चयन संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ में हुआ है।
प्रदर्शनी में बस्तर की 572 देवगुडि़यों के जीर्णाेद्धार, मनरेगा के अंतर्गत 21.67 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन तथा कांगेर वैली में 35 सफारी जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी भी दी गई।

वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन की पहल प्रदर्शित
‘संवरता छत्तीसगढ़’ भाग में प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रिआयामी मॉडल एवं जीवंत प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को दिसंबर 2025 में प्रदेश के पहले रामसर स्थल के रूप में मिली मान्यता, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरणों की रिलोकेशन और औरापानी में गिद्ध संरक्षण के प्रयास प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए। बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन की सराहना प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी की थी।
मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के लिए ‘गजरथ यात्रा’ जागरूकता अभियान और ‘गज संकेत’ ऐप का प्रदर्शन किया गया। यह ऐप हाथियों की आवाजाही की जानकारी ग्रामीणों तक वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से पहुंचाता है।वृक्षारोपण की उपलब्धियों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधों के रोपण की जानकारी दी गई। इसी तरह किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 36 हजार 896 किसानों द्वारा 62 हजार 441 एकड़ क्षेत्र में 3.67 करोड़ पौधे लगाने की जानकारी प्रस्तुत की गई।

डिजिटल तकनीक और वन उत्पादों ने भी किया आकर्षित
प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, इंटरैक्टिव गेम, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी, लाइट एंड साउंड प्रभाव तथा सेल्फी प्वाइंट दर्शकों, विशेषकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शकों ने विभाग की विशेष वेबसाइट के माध्यम से वानिकी योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी प्राप्त की।संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित बांस के घर, नाव, लालटेन और सजावटी वस्तुओं की बिक्री हुई। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के स्टॉल पर वन मधु, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे वन धन केंद्रों में तैयार उत्पादों ने भी लोगों को आकर्षित किया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू बाडि़यों में सिंगी और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती से ग्रामीण महिलाओं के लिए सालाना 20 से 30 हजार रुपए की अतिरिक्त आय की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।

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मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक https://thefourthmirror.com/2026/11/04/chief-minister-sai-held-a-high-level-meeting-with-the-director-and-senior-scientists-of-the-indian-institute-of-science-bengaluru/ https://thefourthmirror.com/2026/11/04/chief-minister-sai-held-a-high-level-meeting-with-the-director-and-senior-scientists-of-the-indian-institute-of-science-bengaluru/#respond Wed, 04 Nov 2026 12:33:48 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67836 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ...

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रायपुर।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर विकास का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, आवश्यक वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की प्रारंभिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री  साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ आगमन पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश ही नहीं, विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। इसकी विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमताओं और शैक्षणिक अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से युवाओं को मिलना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की निर्णायक भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ भी इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है, जिनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्राप्त हो। विज्ञान और अनुसंधान में निवेश प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है।

मुख्यमंत्री  साय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है।मुख्यमंत्री  साय ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ सहयोग की सभी संभावनाओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाए। प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत व्यवहार्यता का अध्ययन कर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इन पहलों को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित इन महत्वपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से तैयार होगा वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का नया आधार

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन प्रमुख परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना, विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का विकास तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना शामिल है।इन प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अनुसंधान आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।

विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर से उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों को मिलेगी नई शक्ति

बैठक में छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना के प्रस्ताव पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह प्रस्तावित केंद्र प्रदेश के खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग बढ़ाने, नई औद्योगिक तकनीकों के विकास और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाओं की आवश्यकता है। प्रस्तावित केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है।इन सुविधाओं के माध्यम से धातु एवं मिश्रधातुओं के गुणों का अध्ययन, उन्नत पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और अन्य अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।इस केंद्र के विकसित होने से छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विदेशी संस्थानों पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान की लागत और समय में कमी लाने तथा उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ना प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला कदम होगा। इससे राज्य में अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकेंगे।

विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव

बैठक में प्रदेश में विज्ञान और गणित शिक्षा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान संस्थान के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रस्तावित इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित, दक्ष और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करना है।प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेल सुविधाएं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम निर्माण, प्रयोगशाला विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने में अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की मजबूत आधारशिला है। विज्ञान और गणित के विषयों में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों का होना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश में विज्ञान एवं गणित के उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करने में सहायता मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव शासकीय विद्यालयों सहित प्रदेश की संपूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रयास होगा।

चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भी सहयोग की संभावनाएं

बैठक में तीसरी महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।इस प्रस्ताव में किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन के विकास को प्राथमिकता दी गई है।प्रारंभिक चरण में पूर्ण मेडिकल स्कूल की स्थापना के स्थान पर हब एंड नेटवर्क मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शासकीय संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी विकास की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना, चिकित्सा तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्रों का विकास, फेलोशिप, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

बैठक में बताया गया कि बेंगलुरु स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के समन्वय पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।इस संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ में चिकित्सा अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आधुनिक उपचार तकनीकों के विकास में लिया जा सकता है।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में चिकित्सा जांच, रोगों की शीघ्र पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचार उपयोगी सिद्ध होंगे।

बस्तर और सरगुजा के युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने, आधुनिक प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है।बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान की विशेषज्ञता से प्रदेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का प्रशिक्षण और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के व्याख्यान उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, बुनियादी विज्ञान और अन्य उभरती तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने पर भी विचार किया गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अवसरों से शासकीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के युवाओं को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के प्रतिभाशाली युवा भी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में अनुसंधान करें, नई तकनीकों का विकास करें और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं, यह राज्य सरकार की आकांक्षा है।

बस्तर और सुकमा में जल संरक्षण तथा स्थानीय तकनीकी नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।भारतीय विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के बिना जल प्रवाह की ऊर्जा से संचालित पंपिंग तकनीकों के उपयोग संबंधी कार्यों की जानकारी दी।हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों पर आधारित ये तकनीकें विशेष रूप से दूरस्थ वनांचलों में उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक विद्युत आधारित जलापूर्ति व्यवस्थाओं के संचालन में कठिनाइयां आती हैं। स्थानीय जलस्रोतों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप इन तकनीकों का उपयोग जल उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण समुदायों की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक हो सकता है।इसके अतिरिक्त शोधित जल के पुनर्चक्रण, जलाशयों के पुनर्भरण और भूजल संवर्धन के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।इस दौरान कर्नाटक के कोलार जिले में प्रतिदिन 440 मिलियन लीटर शोधित जल को 137 जलाशयों तक पहुंचाने वाली परियोजना का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचारों की उपयोगिता का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विज्ञान और तकनीक का उपयोग ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी किया जाना चाहिए।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय आवश्यक

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाना आवश्यक है उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से प्रदेश में आधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देने, उद्योगों की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उत्कृष्ट मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित हो।उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प को साकार करने में विज्ञान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ प्रस्तावित सहयोग प्रदेश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित हो सकता है।

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, प्रशासन एवं वित्त संकाय के डीन प्रोफेसर पी.एस. अनिल कुमार, मैकेनिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास तथा बायोलॉजिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सतीश राघवन शामिल हुए।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की नई दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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विशेष लेख : दीवाली से पहले बजी महिलाओं के मोबाइल में खुशी की घंटी https://thefourthmirror.com/2026/11/04/special-article-a-ring-of-joy-on-womens-mobile-phones-ahead-of-diwali/ https://thefourthmirror.com/2026/11/04/special-article-a-ring-of-joy-on-womens-mobile-phones-ahead-of-diwali/#respond Wed, 04 Nov 2026 12:28:01 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67832 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने की...

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने की दिशा में चलाई जा रही महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की माताओं-बहनों को दीवाली के पहले एक बड़ी सौगात मिली है। राज्योत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त जारी की। इसके अंतर्गत प्रदेश की 67 लाख 40 हजार 410 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से कुल 632 करोड़ 63 लाख 67 हजार 750 रुपये की राशि अंतरित की गई।

67 लाख 33 हजार 502 महिला हितग्राहियों को लाभ

दीवाली से पहले महतारी वंदन योजना की 33 वीं किस्त जारी होने से महिलाओं और उनके परिवार में उत्साह का माहौल है। छत्तीसगढ़ शासन की इस निरंतर वित्तीय सहायता से प्रदेश की महिलाएं अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान दे रही हैं।  ई-केवाईसी पूर्ण करा चुकीं 67 लाख 33 हजार 502 महिला हितग्राहियों को लाभ मिला। इसके साथ ही नियद नेल्ला नार कैंप क्षेत्रों की 6,908 महिलाओं को भी योजना की 33वीं किस्त प्रदान की गई। महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करना, परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति में उनकी सहभागिता बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाना है।

महतारी वंदन योजना की 33 वीं किस्त पात्र महिलाओं के बैंक खाते में अंतरित

ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की विवाहित महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए 10 मार्च 2024 को महतारी वंदन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के अंतर्गत 67 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में प्रतिमाह 1000 रुपए अंतरित किए जाते हैं। अब तक योजना की 33वीं किस्त के माध्यम से पात्र महिलाओं के बैंक खाते में 21 हजार 350.50 करोड़ रुपए अंतरित किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से महिलाएं न केवल परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हुई हैं, बल्कि खास अवसरों और त्योहारों को भी धूमधाम से मनाने में भी सक्षम हुई हैं।  महिलाओं के आर्थिक रूप से सक्षम होने पर व्यापारियों को भी लाभ हुआ है। महतारी वंदन योजना के शुरू होने से बाजारों में रौनक बढ़ी है। करवाचौथ से शुरू हुआ महिलाओं के द्वारा खरीदारी का दौर निरंतर जारी है। महिलाओं के आर्थिक रूप से सक्षम होने से परिवार के मुखिया पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। इस कारण महिलाएं  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रति आभार व्यक्त कर रही  हैं।जब शासन की सहायता सही व्यक्ति तक पहुंचती है, तो वह केवल आर्थिक सहयोग नहीं रहती, बल्कि वह किसी महिला के लिए आत्मविश्वास बनती है, किसी परिवार के लिए उम्मीद, किसी बेटी के लिए सुरक्षित भविष्य और किसी बच्चे के लिए स्वस्थ जीवन की शुरुआत होती है।

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मुख्यमंत्री साय की पहल पर बीएसपी के हजारों आवासधारियों को बड़ी राहत, किराए में 75 प्रतिशत तक की कटौती https://thefourthmirror.com/2026/11/03/major-relief-for-thousands-of-bsp-housing-unit-occupants-following-chief-minister-sais-initiative-rent-reduced-by-up-to-75-percent/ https://thefourthmirror.com/2026/11/03/major-relief-for-thousands-of-bsp-housing-unit-occupants-following-chief-minister-sais-initiative-rent-reduced-by-up-to-75-percent/#respond Tue, 03 Nov 2026 14:38:38 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67817 रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की टाउनशिप में रहने वाले हजारों परिवारों की लंबे समय...

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रायपुर।

भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की टाउनशिप में रहने वाले हजारों परिवारों की लंबे समय से चली आ रही आवास किराए की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद बीएसपी प्रबंधन ने रिटेंशन स्कीम तथा थर्ड पार्टी श्रेणी के आवासों का किराया घटाकर 6 रुपए प्रति वर्गफीट प्रतिमाह कर दिया है। इस फैसले से करीब चार हजार आवासधारियों को राहत मिलने का अनुमान है। विशेष रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए यह निर्णय आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि रिटेंशन श्रेणी में किराए की दर 75 प्रतिशत कम हुई है।इस बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भिलाई स्टील प्लांट के सेवानिवृत्त कार्मिक कल्याण संघ और थर्ड पार्टी कल्याण संघ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री  गजेंद्र यादव, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  प्रेमप्रकाश पाण्डेय, विधायक  ललित चंद्राकर एवं  रिकेश सेन सहित दुर्ग-भिलाई के अनेक जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री की पहल से आवास किराए की समस्या के समाधान का रास्ता हुआ प्रशस्त

बीएसपी टाउनशिप के आवासधारियों को बढ़े हुए किराए के कारण हो रही परेशानियों का विषय मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुखता से रखा गया था। बैठक के दौरान रिटेंशन और थर्ड पार्टी श्रेणी के आवासों के लिए निर्धारित अलग-अलग किराया दरों तथा उनमें हुई वृद्धि से उत्पन्न परिस्थितियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अन्य प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए समस्या का व्यावहारिक एवं संवेदनशील समाधान निकालने पर जोर दिया था।
मुख्यमंत्री की पहल पर जनप्रतिनिधियों और बीएसपी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में किराया दरों के संशोधन पर सहमति बनी।इसके बाद बीएसपी के नगर सेवाएं विभाग ने 2 नवंबर 2026 को आदेश जारी कर नई किराया दर निर्धारित की। संशोधित आदेश के अनुसार रिटेंशन और थर्ड पार्टी, दोनों श्रेणियों के संबंधित आवासों के लिए किराया 6 रुपए प्रति वर्गफीट प्रतिमाह होगा।

रिटेंशन श्रेणी में 75 प्रतिशत और थर्ड पार्टी श्रेणी में 25 प्रतिशत की राहत

रिटेंशन स्कीम के अंतर्गत आने वाले आवासों का मासिक किराया पहले 24 रुपए प्रति वर्गफीट निर्धारित था। अब इसे घटाकर 6 रुपए प्रति वर्गफीट किए जाने से आवासधारियों को सीधे 75 प्रतिशत की राहत मिलेगी।यदि किसी आवास का क्षेत्रफल 500 वर्गफीट है, तो पहले उसके लिए प्रतिमाह 12 हजार रुपए किराया देना पड़ता था। नई दर लागू होने पर यही किराया 3 हजार रुपए रह जाएगा। इस प्रकार संबंधित परिवार को हर महीने 9 हजार रुपए और पूरे वर्ष में 1 लाख 8 हजार रुपए की बचत होगी।थर्ड पार्टी श्रेणी के आवासधारियों को भी संशोधित दर का लाभ मिलेगा। इस श्रेणी में पहले 8 रुपए प्रति वर्गफीट प्रतिमाह किराया निर्धारित था, जिसे अब 6 रुपए कर दिया गया है। इससे थर्ड पार्टी आवासधारियों का किराया 25 प्रतिशत कम हो जाएगा। नई व्यवस्था से दोनों श्रेणियों के संबंधित आवासों के लिए किराए की दर में एकरूपता भी आएगी।

लगभग चार हजार परिवारों को मिलेगी आर्थिक राहत

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संशोधित किराया व्यवस्था से बीएसपी टाउनशिप के कुल 3,946 आवासधारियों के लाभान्वित होने का अनुमान है। इनमें रिटेंशन श्रेणी के 1,158 और थर्ड पार्टी श्रेणी के 2,788 आवास शामिल बताए गए हैं।उल्लेखनीय है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में वर्षों तक सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए अनेक कर्मचारी आज सीमित पेंशन अथवा आय के अन्य साधनों पर निर्भर हैं। ऐसे परिवारों के लिए आवास किराए में भारी वृद्धि अतिरिक्त आर्थिक दबाव का कारण बनी हुई थी। संशोधित दर लागू होने से उनकी नियमित मासिक व्यय राशि में उल्लेखनीय कमी आएगी और पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए अधिक राशि उपलब्ध हो सकेगी।

पूर्व अवधि के किराए की पुनर्गणना का भी प्रावधान

बीएसपी प्रबंधन के संशोधित आदेश में किराए की नई दर को पूर्व प्रभाव से लागू करने की व्यवस्था भी की गई है। इसके अनुसार संबंधित अवधि के किराए की पुनर्गणना संभव होगी। जिन आवासधारियों ने पूर्व निर्धारित अधिक दर पर किराया जमा किया है, उनकी अतिरिक्त राशि के समायोजन की प्रक्रिया संबंधित विभागीय निर्देशों के आधार पर स्पष्ट की जाएगी। यह संशोधित किराया व्यवस्था आगामी आदेश जारी होने तक अंतरिम राहत के रूप में प्रभावी रहेगी।

भिलाई टाउनशिप के आवासधारियों की पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय

भिलाई इस्पात संयंत्र के निर्माण, संचालन और विकास में वर्षों तक योगदान देने वाले कर्मचारियों के लिए टाउनशिप के आवास उनके जीवन और परिवार से गहराई से जुड़े हुए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी अनेक परिवार इन्हीं आवासों में निवासरत हैं। किराए में हुई भारी वृद्धि के कारण ऐसे परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर बीएसपी प्रबंधन द्वारा लिया गया यह निर्णय इन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किराए में कटौती से जहां सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अन्य आवासधारियों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं संबंधित आवास श्रेणियों के लिए समान किराया दर निर्धारित होने से व्यवस्था में एकरूपता आएगी। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्या पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श और उसके बाद लिए गए इस निर्णय से प्रभावित परिवारों को राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

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