छत्तीसगढ़ - https://thefourthmirror.com Thu, 05 Nov 2026 16:58:49 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.8 https://thefourthmirror.com/wp-content/uploads/2022/10/cropped-IMG_20221028_135824-32x32.jpg छत्तीसगढ़ - https://thefourthmirror.com 32 32 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि https://thefourthmirror.com/2026/11/05/chief-minister-vishnu-deo-sai-paid-a-heartfelt-tribute-to-the-late-mla-doman-lal-korsewada/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/chief-minister-vishnu-deo-sai-paid-a-heartfelt-tribute-to-the-late-mla-doman-lal-korsewada/#respond Thu, 05 Nov 2026 16:58:49 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67898 रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय...

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रायपुर।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में  अहिवारा के दिवंगत विधायक स्वर्गीय डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री   साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक सरल, सहज, मृदुभाषी और मिलनसार जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज की सेवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। विशेष रूप से अनुसूचित जाति समाज के विकास, सामाजिक सशक्तीकरण और क्षेत्र की प्रगति में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा को लोग  आत्मीयता के साथ ‘गुरुजी’ कहकर संबोधित करते थे। यह संबोधन उनके प्रति समाज के गहरे सम्मान और विश्वास का प्रतीक था। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया था। जनसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा के साथ जुड़े आत्मीय प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि जब वे उपचार के लिए हैदराबाद में भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल को भी हैदराबाद जाकर उनका हाल-चाल जानने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके स्वस्थ होकर लौटने की हम सभी को आशा थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनका जाना हम सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा ने जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव क्षेत्र के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। उनकी स्मृतियों और जनसेवा की विरासत को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा। यह उनके प्रति प्रदेश सरकार और क्षेत्र की जनता की ओर से सम्मानपूर्ण श्रद्धांजलि होगी।श्रद्धांजलि सभा में स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद  बृजमोहन अग्रवाल और जगदलपुर विधायक  किरण देव ने भी स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक  ललित चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष   कीर्ति नायक, कलेक्टर  अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। सभी ने स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया।

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जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान को 33% से बढ़ाया https://thefourthmirror.com/2026/11/05/climate-change-increased-the-damage-caused-by-cyclone-arnab-by-33/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/climate-change-increased-the-damage-caused-by-cyclone-arnab-by-33/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:41:20 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67882  रायपुर। इंपीरियल कॉलेज लंदन के नए अध्ययन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन ने 28 अक्टूबर को...

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 रायपुर।

इंपीरियल कॉलेज लंदन के नए अध्ययन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश से टकराए चक्रवात अर्नब की हवाओं की रफ्तार करीब 5% और आईवॉल में बारिश की तीव्रता 11% बढ़ाई। इससे तूफान से हुआ आर्थिक नुकसान औद्योगिक युग से पहले की जलवायु की तुलना में 33% अधिक रहा।चक्रवात अर्नब के आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद हुए नुकसान की एक नई वैज्ञानिक पड़ताल बताती है कि इस तूफान की तबाही में जलवायु परिवर्तन की भी भूमिका थी। इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रांथम इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक त्वरित अध्ययन के मुताबिक, मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब से होने वाले प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान को करीब 33% बढ़ा दिया। इसका मतलब है कि अगर इंसानों की वजह से धरती का तापमान नहीं बढ़ा होता, तो इस तूफान से संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान कम होता।चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। अध्ययन में इस्तेमाल किए गए अंतरराष्ट्रीय ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, लैंडफॉल के समय इसकी तीव्रता सैफिर-सिम्पसन पैमाने पर श्रेणी 3 के तूफान के बराबर थी। इस दौरान एक मिनट की अवधि में औसत अधिकतम हवा की रफ्तार 202 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। तूफान के साथ भारी बारिश हुई और आंध्र प्रदेश में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

हवा की रफ्तार में 5%, आईवॉल में बारिश 11% बढ़ी

शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए इंपीरियल कॉलेज स्टॉर्म मॉडल (IRIS) का इस्तेमाल किया कि जलवायु परिवर्तन ने अर्नब की तीव्रता और उससे हुए नुकसान को किस हद तक बढ़ाया। इसके लिए उन्होंने मौजूदा जलवायु परिस्थितियों में तूफान के व्यवहार की तुलना ऐसी काल्पनिक जलवायु से की, जिसमें इंसानों के कारण ग्लोबल वार्मिंग नहीं हुई होती।अध्ययन के मुताबिक, मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब की अधिकतम हवा की रफ्तार लगभग 5% बढ़ाई। इसके अलावा, तूफान के आईवॉल यानी उसकी आंख के चारों ओर मौजूद सबसे शक्तिशाली बादलों वाले हिस्से में बारिश की दर 11% अधिक रही।इन बदलावों का असर आर्थिक नुकसान पर भी पड़ा। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि भारत में भौतिक संपत्तियों को हुआ प्रत्यक्ष नुकसान औद्योगिक युग से पहले की जलवायु की तुलना में 33% अधिक था। अध्ययन के अनुसार, कुल आर्थिक नुकसान का लगभग 25% हिस्सा सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा था।

तापमान 2.6 डिग्री बढ़ा तो नुकसान 56% ज्यादा

अध्ययन ने भविष्य की एक ऐसी स्थिति का भी आकलन किया, जिसमें वैश्विक तापमान औद्योगिक युग से पहले के स्तर की तुलना में 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है। यह वह तापमान वृद्धि है, जिसकी ओर मौजूदा वैश्विक नीतियों के जारी रहने पर इस सदी के अंत तक दुनिया बढ़ सकती है।इस परिदृश्य में अर्नब जैसा कोई चक्रवात औद्योगिक युग से पहले की जलवायु की तुलना में 8% अधिक शक्तिशाली हो सकता है और उससे होने वाला आर्थिक नुकसान 56% ज्यादा हो सकता है।इंपीरियल कॉलेज लंदन के भौतिकी विभाग में ट्रॉपिकल साइक्लोन रिस्क मॉडलिंग के शोधकर्ता डॉ. नाथन स्पार्क्स के मुताबिक, हवा की रफ्तार में 5% और आईवॉल में बारिश की तीव्रता में 11% की बढ़ोतरी सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन जमीन पर इसका मतलब ज्यादा घरों और बुनियादी ढांचे का नष्ट होना, फसलों को नुकसान और लोगों की आजीविका पर चोट हो सकता है।ग्रांथम इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राल्फ टूमी ने कहा कि IRIS मॉडल की मदद से बड़े तूफानों पर फॉसिल फ्यूल के उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के वास्तविक प्रभावों को समझा जा सकता है। उनके मुताबिक, दुनिया में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की कुल संख्या अपेक्षाकृत स्थिर रहने के बावजूद बनने वाले तूफान अधिक खतरनाक और शक्तिशाली होते जा रहे हैं।

तूफान की तीव्रता से नुकसान तक का आकलन

इस अध्ययन की खास बात यह है कि इसमें केवल यह नहीं देखा गया कि जलवायु परिवर्तन ने तूफान की तीव्रता को कितना बढ़ाया। शोधकर्ताओं ने यह भी आकलन किया कि इस अतिरिक्त तीव्रता का आर्थिक नुकसान पर क्या असर पड़ा।इसके लिए Climate Damage Tracker के तहत विकसित एक ऐसी पद्धति का इस्तेमाल किया गया, जो मौसम की चरम घटनाओं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को उनके सामाजिक और आर्थिक नुकसान से जोड़ती है। इस पद्धति में मौसम संबंधी एट्रिब्यूशन अध्ययन और सामाजिक-आर्थिक नुकसान से जुड़े आंकड़ों को मिलाकर किसी खास घटना में जलवायु परिवर्तन की भूमिका का अनुमान लगाया जाता है।शोधकर्ताओं के मुताबिक, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों पर जलवायु परिवर्तन के असर का आकलन करना आसान नहीं है, क्योंकि इनके व्यवहार और तीव्रता पर उच्च गुणवत्ता वाले वैश्विक अवलोकन 45 साल से भी कम समय के उपलब्ध हैं। इस कमी को दूर करने के लिए IRIS मॉडल ने दुनिया भर में लाखों कृत्रिम चक्रवातों के संभावित रास्तों का डेटाबेस तैयार किया है। इसमें तूफान के बनने से लेकर तट से टकराने तक की यात्रा और अलग-अलग चरणों में उसकी हवा की रफ्तार का आकलन शामिल है।चक्रवात अर्नब पर यह अध्ययन एक बार फिर दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन का आर्थिक असर किसी दूर के भविष्य की आशंका भर नहीं है। बढ़ती गर्मी तूफानों की तीव्रता और उनसे होने वाले नुकसान को प्रभावित कर सकती है। आंध्र प्रदेश में अर्नब से हुए नुकसान का यह आकलन बताता है कि जलवायु परिवर्तन की कीमत तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों, उनकी संपत्तियों और आजीविका को चुकानी पड़ रही है।

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कलिंगा विश्वविद्यालय में दीपावली मिलन 2026 का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, फैशन शो और उत्साहपूर्ण सहभागिता ने बांधा समां https://thefourthmirror.com/2026/11/05/kalinga-university-celebrates-diwali-milan-2026-with-grand-celebrations-cultural-performances-fashion-shows-and-enthusiastic-participation/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/kalinga-university-celebrates-diwali-milan-2026-with-grand-celebrations-cultural-performances-fashion-shows-and-enthusiastic-participation/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:37:03 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67879 नया रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय में 4 नवंबर 2026 को से दीपावली मिलन 2026 का आयोजन...

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नया रायपुर।

कलिंगा विश्वविद्यालय में 4 नवंबर 2026 को से दीपावली मिलन 2026 का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह, पारंपरिक उल्लास और आपसी एकता के वातावरण में किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नेतृत्व, संकाय सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन उत्सव, आपसी सौहार्द, सम्मान और सांस्कृतिक जीवंतता का एक सुंदर संगम रहा।इस समारोह ने विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया, जिसके अंतर्गत एक सशक्त, समावेशी और सौहार्दपूर्ण संस्थागत वातावरण को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अमूल्य योगदान को सम्मानित किया जाता है।कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं कुलाधिपति के आगमन पर कुलसचिव द्वारा पौधा भेंट कर आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। पौधा भेंट करने की यह परंपरा सम्मान, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

इसके पश्चात पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मंगलमय अवसर पर ज्ञान, समृद्धि और सफलता की कामना की गई। समारोह में मधुर गायन, मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों, काव्य पाठ एवं सामूहिक गायन जैसी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और आकर्षण का संचार किया।कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों की सक्रिय सांस्कृतिक सहभागिता रही। संकाय सदस्यों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुतियां एवं मधुर गायन प्रस्तुत किए। उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों द्वारा खूब सराहना मिली। इन प्रस्तुतियों ने यह दर्शाया कि कलिंगा विश्वविद्यालय का परिवार शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति में भी समान रूप से प्रतिभाशाली है।दीपावली मिलन 2026 का एक प्रमुख आकर्षण फैशन शो प्रतियोगिता रही, जिसमें प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास, रचनात्मकता, आकर्षक व्यक्तित्व और पारंपरिक परिधानों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता ने समारोह में विशेष उत्साह और आकर्षण जोड़ते हुए सभी का ध्यान आकर्षित किया।

इस प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रतिष्ठित मिस्टर कलिंगा एवं मिस कलिंगा के खिताब क्रमशः श्री शुभम पी., उप अधिष्ठाता – छात्र कल्याण (Deputy Dean – Students’ Welfare) तथा सुश्री वर्तिका सचान, इवेंट कोऑर्डिनेटर को प्रदान किए गए। दोनों विजेताओं को यह सम्मान विश्वविद्यालय की माननीय प्रो-वाइस चांसलर डॉ. मोनिका सेठी शर्मा द्वारा प्रदान किया गया। यह क्षण समारोह के यादगार पलों में से एक रहा। फैशन शो ने विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, रचनात्मकता और उत्साह को एक प्रभावशाली मंच प्रदान किया।समारोह का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण सम्मान एवं उपहार वितरण समारोह रहा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नेतृत्व, डीन, विभागाध्यक्षों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त किया गया। साथ ही, शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को दीपावली के उपहार वितरित किए गए। यह पहल विश्वविद्यालय के प्रति उनके समर्पण, निरंतर योगदान और संस्थान के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सराहनीय प्रयास रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। संगीत, नृत्य और काव्य पाठ ने समारोह को और भी यादगार बनाया। विशेष रूप से संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान प्रदान की। उनकी प्रस्तुतियों ने विश्वविद्यालय में छिपी प्रतिभाओं, रचनात्मकता और सांस्कृतिक उत्साह को उजागर किया।इस आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों, विभागीय प्रतिनिधियों तथा शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। सभी के सामूहिक प्रयास, समन्वय और सहयोग ने इस आयोजन को एक वास्तविक विश्वविद्यालय-स्तरीय उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। यह आयोजन कलिंगा विश्वविद्यालय परिवार के बीच एकता, सहयोग, आपसी सम्मान और सामूहिक सहभागिता की भावना का प्रतीक बना।समारोह का समापन हर्षोल्लास और आत्मीयता के वातावरण में हुआ, जिसने सभी उपस्थित सदस्यों के मन में सुखद एवं अविस्मरणीय स्मृतियां संजो दीं। इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दीपावली मिलन 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि कलिंगा विश्वविद्यालय केवल शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपने प्रत्येक सदस्य के लिए एक सकारात्मक, समावेशी और पारिवारिक वातावरण विकसित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। शैक्षणिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियों से परे सभी को एक मंच पर लाकर विश्वविद्यालय ने आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और अपनत्व की भावना को प्रोत्साहित किया।दीपावली मिलन 2026 प्रतिभा, एकता, सम्मान, सहयोग और संस्थागत गौरव का एक यादगार उत्सव बनकर सामने आया, जिसने कलिंगा विश्वविद्यालय की समग्र विकास, सामूहिक प्रगति और सशक्त विश्वविद्यालय समुदाय के निर्माण की परिकल्पना को और अधिक सुदृढ़ किया।

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महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ रहा आत्मविश्वास https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-mahtari-vandan-yojana-is-providing-financial-support-to-women-fostering-both-self-reliance-and-growing-self-confidence/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-mahtari-vandan-yojana-is-providing-financial-support-to-women-fostering-both-self-reliance-and-growing-self-confidence/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:34:15 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67876 अम्बिकापुर । महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय...

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अम्बिकापुर ।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना भी बढ़ा रही है। सरगुजा जिले की महिलाएं इस सहायता राशि का उपयोग अपनी घरेलू आवश्यकताओं, आजीविका गतिविधियों और परिवार की खुशियों के लिए कर रही हैं। ऐसी ही एक हितग्राही हैं अम्बिकापुर जनपद पंचायत कार्यालय में छोटी सी कैंटीन संचालित करने वाली  रानी सिंह, जिनके लिए महतारी वंदन योजना आर्थिक संबल का माध्यम बनी है।
 

छोटी सी कैंटीन से परिवार की जिम्मेदारी, महतारी वंदन से मिला अतिरिक्त सहारा 
रानी सिंह अम्बिकापुर जनपद पंचायत कार्यालय में कैंटीन संचालित कर अपनी आजीविका अर्जित करती हैं। कैंटीन के माध्यम से होने वाली आमदनी से वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। ऐसे में महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए अतिरिक्त सहारा साबित हो रही है। इस राशि से उन्हें अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और त्योहारों से जुड़े छोटे-मोटे खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है।रानी सिंह बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिलना एक बड़ी राहत है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। अपनी जरूरत के अनुसार राशि खर्च करने की सुविधा से महिलाओं में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
 

दीपावली से पहले खाते में आई राशि, लक्ष्मी पूजा की तैयारियों को लेकर दिखी खुशी 
महतारी वंदन योजना की सहायता राशि मिलने पर रानी सिंह ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि दीपावली से पहले राशि प्राप्त होने से वे इस बार लक्ष्मी पूजा अच्छी तरह मना सकेंगी। पूजा के लिए दीये, बाती और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदी में इस राशि का उपयोग करेंगी। उन्होंने भावुक होकर कहा, महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहायता मिल रही है। दीपावली से पहले ही मुख्यमंत्री विष्णु भैया ने हमारे खाते में पैसा भेज दिया, जिससे मैं बहुत खुश हूं। इस बार लक्ष्मी पूजा अच्छे से मनाऊंगी। दीया-बाती और पूजा की जरूरी सामग्री खरीदूंगी। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि अब इन छोटी-छोटी जरूरतों के लिए मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 हर महीने मिलने वाली सहायता से महिलाओं का बढ़ रहा आत्मविश्वास 
रानी सिंह का कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने वाली पहल है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाएं अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर पा रही हैं। इससे उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों के निर्वहन में भी सहयोग मिल रहा है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा महिलाओं की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दी जा रही सहायता से महिलाओं में खुशी है। छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी अपने पास राशि उपलब्ध होना महिलाओं को आत्मनिर्भरता का एहसास कराता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से राज्य शासन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि महिलाओं को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही छोटे-छोटे आर्थिक निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बना रही है।

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गोबर के दीयों से रोशन हो रही महिलाओं की आत्मनिर्भरता की राह https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-path-to-self-reliance-for-women-illuminated-by-lamps-made-of-cow-dung/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-path-to-self-reliance-for-women-illuminated-by-lamps-made-of-cow-dung/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:29:19 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67873 उत्तर बस्तर कांकेर। दीपावली के अवसर पर जब हर घर रोशनी से जगमगाने की तैयारी...

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उत्तर बस्तर कांकेर।

दीपावली के अवसर पर जब हर घर रोशनी से जगमगाने की तैयारी में है, तब जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम भिलाई की महिलाएं अपने हाथों से तैयार प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल गोबर के दीयों से न केवल घरों को रोशन कर रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह भी प्रकाशित कर रही हैं।चारामा विकासखण्ड के ग्राम भिलाई के सरगम उत्पादक समूह, बिहान से जुड़कर स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। वर्ष 2016 में महज 10 महिलाओं से शुरू हुआ यह समूह आज 36 महिलाओं को आजीविका से जोड़ चुका है।

गोबर से तैयार होते हैं सुंदर और प्राकृतिक दीपक
समूह की महिलाएं गोबर से दीये तैयार करने की पूरी प्रक्रिया स्वयं करती हैं। गोबर को एकत्रित कर उसे अच्छी तरह तैयार किया जाता है और आवश्यक सामग्री के साथ मिश्रण बनाकर सांचों की सहायता से विभिन्न आकार के दीये तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें सुखाया जाता है और बिक्री के लिए तैयार किया जाता है। प्राकृतिक सामग्री से बने ये दीये पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और स्थानीय हुनर की पहचान भी है। समूह की सदस्य  सुभद्रा नागराज बताती हैं कि वर्ष 2022 में उन्हें गोबर के दीये बनाने की प्रेरणा मिली। पहले वर्ष महिलाओं ने करीब 10 हजार दीये तैयार किए, जिससे उन्हें लगभग 20 हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। इस सफलता ने महिलाओं का उत्साह बढ़ाया और धीरे-धीरे यह कार्य समूह की आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया।

इस वर्ष अब तक बिक चुके हैं 11 हजार से अधिक दीये
समूह की सदस्य श्रीमती ममता नागराज ने बताया कि इस वर्ष दीपावली के अवसर पर समूह द्वारा तैयार किए गए 11 हजार 400 गोबर के दीये अब तक बेचे जा चुके हैं। दीपावली को देखते हुए लगातार नए ऑर्डर भी मिल रहे हैं, जिसके कारण महिलाएं उत्पादन बढ़ाने में जुटी हुई हैं। वर्तमान में समूह की महिलाएं प्रतिदिन लगभग 500 दीये तैयार कर रही हैं। इन दीयों की बिक्री सी-मार्ट, स्थानीय हाट-बाजारों और अन्य स्थानों के माध्यम से की जा रही है। समूह को रायपुर से भी ऑर्डर मिलने की जानकारी मिली है, जिससे महिलाओं का उत्साह और बढ़ गया है। एक समूह, आजीविका के कई अवसर सरगम उत्पादक समूह केवल गोबर के दीये ही नहीं बनाता, बल्कि महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों और अपनी मेहनत के बल पर आय के कई साधन विकसित किए हैं। समूह द्वारा आम का अमचूर पाउडर, इमली का संग्रहण एवं प्रसंस्करण, आम का अचार, राखी निर्माण और मशरूम उत्पादन जैसे कार्य भी किए जाते हैं। तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सी-मार्ट के माध्यम से भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

मशरूम उत्पादन से भी बढ़ी आय
समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की है। महिलाओं ने लगभग 4 हजार रुपये की लागत से मशरूम उत्पादन किया और उसे 7 हजार रुपये में बेचकर करीब 3 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। कम समय में हुए इस लाभ को देखते हुए अब समूह की अन्य महिलाएं भी मशरूम उत्पादन से जुड़ने की तैयारी कर रही हैं। महिलाओं ने बताया कि बिहान के माध्यम से समूह को विभिन्न आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए बैंक से 02 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 50 हजार रुपये का अनुदान भी मिला। शेष 01 लाख 50 हजार रुपये की राशि का भुगतान समूह द्वारा किश्तों के माध्यम से बैंक को किया जा रहा है। इस आर्थिक सहयोग ने महिलाओं को अपने कार्य का विस्तार करने और नए आजीविका अवसरों से जुड़ने में मदद की है। समूह से जुड़ी सविता निषाद, टीकेश्वरी विश्वकर्मा और चिलेश्वरी विश्वकर्मा सहित अन्य महिलाएं भी विभिन्न उत्पादों के निर्माण और विपणन का कार्य कर रही हैं।

‘वोकल फॉर लोकल’ को साकार करती ग्रामीण महिलाएं
दीपावली के अवसर पर ग्राम भिलाई की इन महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय और प्राकृतिक गोबर के दीये ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार कर रहे हैं। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से जहां ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर मिल रहा है, वहीं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के वोकल फॉर लोकल और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने के संकल्प की दिशा में सरगम उत्पादक समूह की महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर से एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। इस दीपावली में ग्राम भिलाई की इन महिलाओं के हाथों से बने एक-एक दीये में सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और स्थानीय उत्पादों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी जगमगा रहा है।

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रेलवे मालगोदाम श्रमिकों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित https://thefourthmirror.com/2026/11/05/free-health-check-up-camp-organized-for-railway-goods-shed-workers/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/free-health-check-up-camp-organized-for-railway-goods-shed-workers/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:25:28 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67870 रायगढ़ । रेलवे मालगोदाम में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य की देखभाल और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य...

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रायगढ़ ।

रेलवे मालगोदाम में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य की देखभाल और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुरुवार को रायगढ़ के सिंधी भवन, पक्की खोली में निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं विभिन्न जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

भारतीय रेलवे मालगोदाम श्रमिक संघ की छत्तीसगढ़ प्रदेश इकाई के नेतृत्व में आयोजित इस पहल का उद्देश्य मालगोदामों में काम करने वाले श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना तथा उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के निर्देशानुसार और रेलवे प्रशासन के सहयोग से रायगढ़ एवं बाराद्वार मालगोदाम में कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविर में श्रमिकों के रक्तचाप (बीपी), मधुमेह (शुगर), टीबी एवं कुष्ठ रोग की जांच की गई। इसके साथ ही नेत्र परीक्षण तथा आयुष्मान कार्ड से संबंधित सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों ने श्रमिकों की जांच कर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और आवश्यक उपचार के बारे में जानकारी दी।

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दीपावली पर बस्तर के परचनपाल की हस्तकला का जलवा https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-splendor-of-the-handicrafts-of-parchanpal-of-bastar-on-diwali/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/the-splendor-of-the-handicrafts-of-parchanpal-of-bastar-on-diwali/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:08:57 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67866 रायपुर। आगामी दीपावली और अन्य प्रमुख त्योहारों की आहट के साथ ही बाजारों में स्थानीय...

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रायपुर।

आगामी दीपावली और अन्य प्रमुख त्योहारों की आहट के साथ ही बाजारों में स्थानीय कला और पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) हस्तनिर्मित उत्पादों की रौनक देखते ही बन रही है। इस त्योहारी माहौल में बस्तर जिले के बस्तर के परचनपाल गांव की ख्यातिप्राप्त हस्तशिल्प कलाकार  शोभा बघेल द्वारा सीसल के प्राकृतिक रेशों से तैयार किए गए कलात्मक बैग और आकर्षक सजावटी उत्पाद आमजन की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। घरों की साज-सज्जा और उपहारों के आदान-प्रदान के लिए इन कलाकृतियों की बढ़ती मांग ने त्योहारों के उत्साह को और बढ़ा दिया है।

वोकल फॉर लोकल की भावुक अपील- उत्सवों में लाएं स्थानीय कारीगरों की खुशहाली

त्योहारी सीजन में अपने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच शिल्पकार शोभा बघेल ने नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की है। उनका कहना है कि पर्व-त्योहारों पर बाजार के सामान्य सामानों के बजाय यदि लोग हमारे स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प को अपनाएं, तो उत्सवों की खुशियां और अधिक दोगुनी हो जाती हैं। इससे न केवल हमारी पारंपरिक कला को सम्मान मिलता है, बल्कि दिन-रात पसीना बहाकर इन अनुपम कृतियों को तराशने वाले स्थानीय शिल्पकारों के परिवारों के जीवन में भी वास्तविक आर्थिक समृद्धि का उजाला फैलता है।

संघर्ष से सफलता तक- 2004 के प्रशिक्षण से शुरू हुआ सफर

शोभा बघेल की यह सफलता उनकी अटूट इच्छाशक्ति, अथक परिश्रम और पारंपरिक हुनर के अनूठे संगम की जीवंत मिसाल है। उनके इस प्रेरणादायी सफर की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब उन्होंने हस्तशिल्प विकास बोर्ड से सीसल के रेशों से हस्तशिल्प तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण हासिल किया था।प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सीसल के मजबूत और प्राकृतिक रेशों को बारीक गूंथकर बैग, दीवार सज्जा, टेबल मैट और उपहार योग्य करीब 40 से 50 प्रकार की बेहद आकर्षक व टिकाऊ कलाकृतियां बनाना शुरू किया। समय के साथ उनकी इस अनूठी कला को व्यापक पहचान मिली। आज उनके उत्पादों की मांग चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर बड़े पैमाने पर है। बड़ी संख्या में लोग सीधे उनके घर पहुंचकर भी खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की नियमित और सम्मानजनक आय हो रही है।

एक हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

अपनी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के साथ-साथ शोभा बघेल ने समाज के प्रति अपने दायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभाया है। उन्होंने अपने हुनर को अपने तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अंचल की एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा है और स्वावलंबन का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।त्योहारों के इस पावन अवसर पर पर्यावरण-अनुकूल सीसल उत्पादों की यह गूंज प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के संकल्प को तो सशक्त कर ही रही है, साथ ही महिला सशक्तीकरण और जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता की एक अनूठी और प्रेरणादायी मिसाल भी पेश कर रही है।

वोकल फॉर लोकल की भावुक अपील- उत्सवों में लाएं स्थानीय कारीगरों की खुशहाली

त्योहारी सीजन में अपने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच शिल्पकार शोभा बघेल ने नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की है। उनका कहना है कि पर्व-त्योहारों पर बाजार के सामान्य सामानों के बजाय यदि लोग हमारे स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प को अपनाएं, तो उत्सवों की खुशियां और अधिक दोगुनी हो जाती हैं। इससे न केवल हमारी पारंपरिक कला को सम्मान मिलता है, बल्कि दिन-रात पसीना बहाकर इन अनुपम कृतियों को तराशने वाले स्थानीय शिल्पकारों के परिवारों के जीवन में भी वास्तविक आर्थिक समृद्धि का उजाला फैलता है।

संघर्ष से सफलता तक- 2004 के प्रशिक्षण से शुरू हुआ सफर

शोभा बघेल की यह सफलता उनकी अटूट इच्छाशक्ति, अथक परिश्रम और पारंपरिक हुनर के अनूठे संगम की जीवंत मिसाल है। उनके इस प्रेरणादायी सफर की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब उन्होंने हस्तशिल्प विकास बोर्ड से सीसल के रेशों से हस्तशिल्प तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण हासिल किया था।प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सीसल के मजबूत और प्राकृतिक रेशों को बारीक गूंथकर बैग, दीवार सज्जा, टेबल मैट और उपहार योग्य करीब 40 से 50 प्रकार की बेहद आकर्षक व टिकाऊ कलाकृतियां बनाना शुरू किया। समय के साथ उनकी इस अनूठी कला को व्यापक पहचान मिली। आज उनके उत्पादों की मांग चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर बड़े पैमाने पर है। बड़ी संख्या में लोग सीधे उनके घर पहुंचकर भी खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की नियमित और सम्मानजनक आय हो रही है।

एक हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

अपनी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के साथ-साथ शोभा बघेल ने समाज के प्रति अपने दायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभाया है। उन्होंने अपने हुनर को अपने तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अंचल की एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा है और स्वावलंबन का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के संकल्प को तो सशक्त कर ही रही है, साथ ही महिला सशक्तीकरण और जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता की एक अनूठी और प्रेरणादायी मिसाल भी पेश कर रही है।

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डीएमएफ की कार्ययोजना में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना को दें प्राथमिकता – राज्यपाल डेका https://thefourthmirror.com/2026/11/05/prioritize-environmental-conservation-education-health-and-infrastructure-in-the-dmf-action-plan-governor-deka/ https://thefourthmirror.com/2026/11/05/prioritize-environmental-conservation-education-health-and-infrastructure-in-the-dmf-action-plan-governor-deka/#respond Thu, 05 Nov 2026 15:05:42 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67863  रायपुर। राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का...

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 रायपुर।

राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए। राज्यपाल  डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।

 वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन 
राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।

जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना 
राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।
 

खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं 
राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए।राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान 
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।राज्यपाल ने कहा कि मनरेगा की तर्ज पर डीएमएफ के कार्यों में भी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के भौतिक सत्यापन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन हुआ है और उनसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है।

विस्थापित परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश 
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से विस्थापित परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित और विस्थापित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनके लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य की जानकारी उपलब्ध है। पोर्टल के जरिए कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है।बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी तथा खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

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जनदर्शन में मिले 53 आवेदन, समय-सीमा में निराकरण के निर्देश https://thefourthmirror.com/2026/11/04/53-applications-received-during-jan-darshan-instructions-issued-for-resolution-within-a-set-timeframe/ https://thefourthmirror.com/2026/11/04/53-applications-received-during-jan-darshan-instructions-issued-for-resolution-within-a-set-timeframe/#respond Wed, 04 Nov 2026 12:46:13 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67842    जांजगीर-चांपा । कलेक्टर  जन्मेजय महोबे के निर्देशन में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में...

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   जांजगीर-चांपा ।

कलेक्टर  जन्मेजय महोबे के निर्देशन में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में डिप्टी कलेक्टर देवेन्द्र चौधरी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याओं एवं मांगों को सुना। जनदर्शन के दौरान कुल 53 आवेदन प्राप्त हुए। जनदर्शन में तहसील जांजगीर के ग्राम पंचायत खोखरा निवासी निशा सूर्यवंशी ने आयुष्मान कार्ड बनवाने, ग्राम पंचायत बनारी निवासी रामेश्वर प्रसाद साहू ने जमीन की मुआवजा राशि दिलाने, तहसील पामगढ़ के ग्राम जेवरा निवासी  मनोज कुमार केंवट ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया।

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राज्योत्सव 2026 : वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को प्रथम पुरस्कार https://thefourthmirror.com/2026/11/04/rajyotsav-2026-first-prize-for-the-forest-and-climate-change-departments-exhibition/ https://thefourthmirror.com/2026/11/04/rajyotsav-2026-first-prize-for-the-forest-and-climate-change-departments-exhibition/#respond Wed, 04 Nov 2026 12:42:07 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=67839 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में...

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने यह सम्मान प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण कुमार पांडेय ने पुरस्कार प्राप्त किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों- कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।गौरतलब है कि वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर तैयार प्रदर्शनी में बस्तर में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन और आजीविका के अवसरों से लेकर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की पहलों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

बस्तर में बदलाव की तस्वीर बनी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण
प्रदर्शनी को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था। प्रवेश द्वार पर जगदलपुर के जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूप बनाए गए थे। इनके माध्यम से बस्तर की जनजातीय
संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा को प्रदर्शित किया गया।‘बदलता बस्तर’ खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित ‘तुंगल कैफे’ की पहल विशेष आकर्षण रही। यहां मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कैफे का संचालन कर रही हैं, जबकि स्थानीय युवा पर्यटकों को नौकायन और कयाकिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर आजीविका अर्जित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में इस पहल के माध्यम से बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश और रोजगार के नए अवसरों को सामने रखा गया। इसके साथ ही कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के मॉडल प्रदर्शित किए गए। धुड़मारास गांव का चयन संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ में हुआ है।
प्रदर्शनी में बस्तर की 572 देवगुडि़यों के जीर्णाेद्धार, मनरेगा के अंतर्गत 21.67 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन तथा कांगेर वैली में 35 सफारी जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी भी दी गई।

वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन की पहल प्रदर्शित
‘संवरता छत्तीसगढ़’ भाग में प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रिआयामी मॉडल एवं जीवंत प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को दिसंबर 2025 में प्रदेश के पहले रामसर स्थल के रूप में मिली मान्यता, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरणों की रिलोकेशन और औरापानी में गिद्ध संरक्षण के प्रयास प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए। बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन की सराहना प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी की थी।
मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के लिए ‘गजरथ यात्रा’ जागरूकता अभियान और ‘गज संकेत’ ऐप का प्रदर्शन किया गया। यह ऐप हाथियों की आवाजाही की जानकारी ग्रामीणों तक वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से पहुंचाता है।वृक्षारोपण की उपलब्धियों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधों के रोपण की जानकारी दी गई। इसी तरह किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 36 हजार 896 किसानों द्वारा 62 हजार 441 एकड़ क्षेत्र में 3.67 करोड़ पौधे लगाने की जानकारी प्रस्तुत की गई।

डिजिटल तकनीक और वन उत्पादों ने भी किया आकर्षित
प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, इंटरैक्टिव गेम, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी, लाइट एंड साउंड प्रभाव तथा सेल्फी प्वाइंट दर्शकों, विशेषकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शकों ने विभाग की विशेष वेबसाइट के माध्यम से वानिकी योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी प्राप्त की।संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित बांस के घर, नाव, लालटेन और सजावटी वस्तुओं की बिक्री हुई। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के स्टॉल पर वन मधु, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे वन धन केंद्रों में तैयार उत्पादों ने भी लोगों को आकर्षित किया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू बाडि़यों में सिंगी और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती से ग्रामीण महिलाओं के लिए सालाना 20 से 30 हजार रुपए की अतिरिक्त आय की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।

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