Ranu Saytondey - https://thefourthmirror.com Fri, 24 Apr 2026 16:43:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://thefourthmirror.com/wp-content/uploads/2022/10/cropped-IMG_20221028_135824-32x32.jpg Ranu Saytondey - https://thefourthmirror.com 32 32 भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े https://thefourthmirror.com/2026/04/24/childrens-safety-paramount-amidst-scorching-heat-minister-lakshmi-rajwade/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/childrens-safety-paramount-amidst-scorching-heat-minister-lakshmi-rajwade/#respond Fri, 24 Apr 2026 16:43:14 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64446 रायपुर । प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता...

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रायपुर ।

प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए त्वरित और संवेदनशील निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री   लक्ष्मी राजवाड़े के स्पष्ट निर्देश पर ग्रीष्मकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव करते हुए इसे 6 घंटे से घटाकर 4 घंटे कर दिया गया है।निर्देशानुसार 24 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगे। विशेष रूप से 24 अप्रैल से 30 जून 2026 तक बच्चों की उपस्थिति का समय केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि वे भीषण गर्मी और लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।इस निर्धारित अवधि में बच्चों को पूर्व तय समय-सारिणी के अनुसार प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (ECCE गतिविधियां) के साथ-साथ पूरक पोषण आहार का नियमित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्य आवश्यक सेवाएं प्रातः 11:00 बजे तक जारी रहेंगी। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने निर्धारित जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। साथ ही, गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श देने की महत्वपूर्ण सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के बाद घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी।बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। गर्म हवाओं और उच्च तापमान के बीच बच्चों को सुरक्षित रूप से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।इसके साथ ही, सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें और जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।ग्रीष्मकाल समाप्त होने के बाद 01 जुलाई  से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित होंगे।

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प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य: खाद्य विभाग https://thefourthmirror.com/2026/04/24/adequate-stock-of-petrol-and-diesel-available-in-the-state-supply-is-completely-normal-food-department/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/adequate-stock-of-petrol-and-diesel-available-in-the-state-supply-is-completely-normal-food-department/#respond Fri, 24 Apr 2026 16:38:25 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64443 रायपुर। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल...

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रायपुर।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के साथ ही आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र राज्य सरकार लगातार भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि प्रदेश की ईंधन आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके।खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आपूर्ति की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। शासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।प्रदेश में संचालित 2516 पेट्रोल पंपों तथा तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध है। मार्च 2026 में प्रदेश की मासिक पेट्रोल आवश्यकता 1.01 लाख किलोलीटर के विरुद्ध 1.27 लाख किलोलीटर (126 प्रतिशत) की आपूर्ति की गई। वहीं अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.60 लाख किलोलीटर पेट्रोल प्राप्त हो चुका है।इसी प्रकार मार्च में डीजल की आवश्यकता 1.64 लाख किलोलीटर के मुकाबले 3.00 लाख किलोलीटर (183 प्रतिशत) आपूर्ति हुई, जबकि अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.38 लाख किलोलीटर डीजल की आपूर्ति हो चुकी है। स्पष्ट है कि प्रदेश में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

अधिकारियों ने कहा कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक निरीक्षण एवं छापेमारी की कार्रवाई जारी है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए विभागीय कॉल सेंटर (1800-233-3663) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है।23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के संचालक की अध्यक्षता में तीनों ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह सामने आया कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनती है। इस पर कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करें।वर्तमान स्थिति के अनुसार, प्रदेश में लगभग 77,111 किलोलीटर पेट्रोल उपलब्ध है, जो लगभग 22 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। इसी प्रकार 84,295 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है, जो करीब 15 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। सरकार ने पुनः आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तथा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक 29 अप्रैल को आयोजित https://thefourthmirror.com/2026/04/24/chhattisgarh-tribal-advisory-council-meeting-chaired-by-chief-minister-held-on-april-29/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/chhattisgarh-tribal-advisory-council-meeting-chaired-by-chief-minister-held-on-april-29/#respond Fri, 24 Apr 2026 16:34:46 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64440 रायपुर । मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक 29...

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रायपुर ।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक 29 अप्रैल 2026 को अपरान्ह साढ़े तीन बजे से मंत्रालय (महानदी भवन), नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित की जाएगी। इस आशय का पत्र आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं जनजातीय सलाहकार के परिषद के उपाध्यक्ष  रामविचार नेताम सहित प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रीगण, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी एवं परिषद के सभी सदस्य उपथित रहेंगे।छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में (दिनांक 11 मार्च 2025) के कार्यवाही विवरण के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा के साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा भी योजनाओं का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।बैठक में आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा, जिसमें संस्थान में रिक्त पदों की भर्ती विषयक, उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति हेतु टीआई पद स्थापना तथा संग्रहालय में जनजातीय धार्मिक स्थलों के निर्माण एवं प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर राज्यपाल प्रतिवेदन वर्ष 2024-25 के अनुमोदन अन्य महत्वपूर्ण जनजातीय विषयों पर चर्चा की जाएगी।

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राज्य में नहीं है खाद की कमी, पंजीकृत रकबे के मुताबिक सभी किसानों को मिलेगी समय पर खाद: कृषि मंत्री रामविचार नेताम https://thefourthmirror.com/2026/04/24/there-is-no-shortage-of-fertilizers-in-the-state-all-farmers-will-get-fertilizers-on-time-as-per-the-registered-area-agriculture-minister-ramvichar-netam/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/there-is-no-shortage-of-fertilizers-in-the-state-all-farmers-will-get-fertilizers-on-time-as-per-the-registered-area-agriculture-minister-ramvichar-netam/#respond Fri, 24 Apr 2026 16:27:58 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64437 रायपुर । पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका – इज़राइल और ईरान के बीच तनाव...

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रायपुर ।

पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका – इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के बीच आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। जिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं।वर्तमान में गोदामों एवं समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी किसानों को पारदर्शिता के साथ पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद का आबंटन सुनिश्चित हो।मंत्री  नेताम ने बताया कि 30 मार्च की स्थिति में राज्य में कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक में मौजूद है, जिसमें यूरिया 2,43,717 मीट्रिक टन, डीएपी 1,05,631 मीट्रिक टन, एनपीके 1,69,109 मीट्रिक टन, एमओपी 50,431 मीट्रिक टन और एसएसपी 1,78,657 मीट्रिक टन इस तरह कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद स्टॉक में मौजूद है।

मंत्री   नेताम ने बताया कि पश्चिमी एशियाई संकट के चलते रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।मंत्री  नेताम ने कहा कि राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर आगामी खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों से कहा है कि पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन तेजी से पूर्ण कर लिया जाए। बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। वही रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और डायवर्जन रोकने के लिए जिलों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को भी प्राथमिकता में रखा गया है। उन्होंने हर जिले में सुगंधित धान की प्रजाति के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार के निर्देश दिए हैं।

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विश्व मलेरिया दिवस पर विशेष https://thefourthmirror.com/2026/04/24/special-on-world-malaria-day/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/special-on-world-malaria-day/#respond Fri, 24 Apr 2026 16:20:33 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64434 रायपुर। शुरुआत अक्सर मामूली ही होती है-हल्का बुखार, ठंड लगना, शरीर में कमजोरी… ऐसे लक्षण...

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रायपुर।

शुरुआत अक्सर मामूली ही होती है-हल्का बुखार, ठंड लगना, शरीर में कमजोरी… ऐसे लक्षण जिन्हें हम आमतौर पर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही संकेत एक गंभीर बीमारी की दस्तक होते हैं। मलेरिया भी ठीक इसी तरह धीरे-धीरे शरीर को जकड़ता है l संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के एक डंक से शुरू होकर, अगर समय पर पहचान न हो, तो स्थिति को जटिल बना सकता है। यही कारण है कि समय पर जांच और उपचार को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी मानी जाती है।25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस हमें न सिर्फ इस बीमारी के खतरों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सतर्कता और सामूहिक प्रयासों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ बसाहटों के कारण लंबे समय तक मलेरिया एक बड़ी चुनौती बना रहा।हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में दर्ज कुल 144886  मामलों की तुलना में वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 28836  रह गई। यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि सुनियोजित रणनीति, समयबद्ध जांच और निःशुल्क उपचार जैसे प्रयास अब असर दिखा रहे हैं।मलेरिया, जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, समय पर उपचार न मिलने पर गंभीर रूप ले सकता है। विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए यह अधिक जोखिमपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाई है।राज्य में मलेरिया उन्मूलन हेतु प्रभावी रणनीति अपनायी जा रही हैं जिसके तहत हर संदिग्ध व्यक्ति की तत्काल जांच, पॉजिटिव पाए जाने पर निःशुल्क उपचार और मरीजों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर ’ जैसे अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर जांच और दवा वितरण कर रहा है।

सुदूर वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट, मितानिन  और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये टीमें न केवल जांच और उपचार कर रही हैं, बल्कि लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों के प्रति भी जागरूक बना रही हैं। मलेरिया से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। मच्छरदानी का उपयोग, आसपास साफ-सफाई बनाए रखना, पानी का ठहराव न होने देना और बुखार आने पर तुरंत जांच कराना, ये सरल उपाय इस बीमारी के प्रसार को रोकने में प्रभावी हैं।राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त प्रदेश के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए शासन, प्रशासन और आमजन के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है।विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और मलेरिया के प्रति सजग रहकर एक स्वस्थ, सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहयोग करें।

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राज्यपाल ने कोसा वस्त्रों के नवाचार और बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण पर दिया जोर https://thefourthmirror.com/2026/04/24/the-governor-emphasized-innovation-in-kosa-textiles-and-the-economic-empowerment-of-weavers/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/the-governor-emphasized-innovation-in-kosa-textiles-and-the-economic-empowerment-of-weavers/#respond Fri, 24 Apr 2026 16:09:14 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64431 रायपुर । राज्यपाल   रमेन डेका ने आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा साड़ी, शाल...

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रायपुर ।

राज्यपाल   रमेन डेका ने आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा साड़ी, शाल और गमछा का अवलोकन किया तथा राज्य के हाथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए नवाचार, डिज़ाइन विकास और मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया।राज्यपाल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी एवं शाल में डॉबी और जैकार्ड तकनीक का उपयोग कर आधुनिक डिज़ाइन विकसित किए जाएं। साथ ही विभिन्न आयु वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पादों को आकर्षक एवं किफायती बनाया जाए, ताकि इनकी बाजार में मांग बढ़ सके।उन्होंने उत्तर-पूर्व के प्रसिद्ध रेशम क्षेत्र असम के सुवालकुची, विजयनगर और डेमाजी क्षेत्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर वहां के लोकप्रिय डिज़ाइनों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में समाहित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि इससे राज्य के बुनकरों को नई पहचान मिलेगी तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।राज्यपाल ने कोसा साड़ी को अधिक किफायती बनाने के लिए साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को पृथक रूप से तैयार कर नई शैली की साड़ियों के निर्माण का सुझाव भी दिया। उन्होंने विशेष रंगों एवं धागोंकृएक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न का उपयोग कर आकर्षक मोटिफ और डिज़ाइन विकसित करने पर भी जोर दिया।उन्होंने आगामी एक माह में इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामोद्योग विभाग  को राज्य की किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव   श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव  एम. एम. जोशी, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बुनकर सेवा केंद्र रायगढ के उपनिदेशक  विजय सावनेरकर सहित तकनीकी विशेषज्ञों तथा डिज़ाइनर उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल https://thefourthmirror.com/2026/04/24/the-chief-minister-attended-the-conference-of-panchayat-functionaries-organized-on-the-occasion-of-panchayati-raj-day/ https://thefourthmirror.com/2026/04/24/the-chief-minister-attended-the-conference-of-panchayat-functionaries-organized-on-the-occasion-of-panchayati-raj-day/#respond Fri, 24 Apr 2026 15:57:09 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64427 रायपुर।  डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की...

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रायपुर। 

डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।मुख्यमंत्री  साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।मुख्यमंत्री  साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है।   साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की।राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।सम्मेलन को सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद   लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।मुख्यमंत्री  साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया।इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा, विधायक  इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष   जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष  मोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा का सशक्त मॉडल https://thefourthmirror.com/2026/04/23/a-robust-model-for-womens-empowerment-and-nutritional-security/ https://thefourthmirror.com/2026/04/23/a-robust-model-for-womens-empowerment-and-nutritional-security/#respond Thu, 23 Apr 2026 15:10:02 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64421 रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल...

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। सूरजपुर जिले के एकीकृत बाल विकास परियोजना रामानुजनगर अंतर्गत ग्राम दर्रीपारा में बेलाफूल महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा 90 लाख रुपये की लागत से स्थापित आधुनिक पोषण आहार उत्पादन यूनिट का शुभारंभ किया गया।इस अवसर पर  लक्ष्मी राजवाड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विधायक   भूलन सिंह मरावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य मौजूद रहीं।मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार, प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और बच्चों एवं माताओं को सुपोषण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह यूनिट केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनेगी।

ग्राम दर्रीपारा में स्थापित इस अत्याधुनिक यूनिट के माध्यम से परियोजना रामानुजनगर के 313 आंगनबाड़ी केंद्रों को मीठा शक्ति आहार एवं पौष्टिक नमकीन दलिया की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यूनिट में लगभग 30 मीट्रिक टन पोषण आहार का उत्पादन किया जाएगा, जिससे बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध हो सकेगा।यह पहल न केवल कुपोषण की चुनौती से निपटने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ अब उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।मंत्री  राजवाड़े ने  कहा कि आत्मनिर्भर ग्राम सशक्त महिला की अवधारणा को साकार करने में ऐसे प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे। स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से पोषण आहार की गुणवत्ता, ताजगी एवं आपूर्ति व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।यह यूनिट महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और स्थानीय उद्यमिता के त्रिवेणी संगम का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।प्रशासन द्वारा इस प्रकार के नवाचारी प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सके।

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शिक्षकों के समर्पण से ही होगा शिक्षा का सशक्त निर्माण – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े https://thefourthmirror.com/2026/04/23/the-robust-building-of-education-will-be-achieved-only-through-the-dedication-of-teachers-minister-lakshmi-rajwade/ https://thefourthmirror.com/2026/04/23/the-robust-building-of-education-will-be-achieved-only-through-the-dedication-of-teachers-minister-lakshmi-rajwade/#respond Thu, 23 Apr 2026 15:04:50 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64418 रायपुर । महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि शिक्षकों का...

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रायपुर ।

महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि शिक्षकों का समर्पण ही एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था की नींव है और उनके प्रयासों से ही समाज एवं राष्ट्र का भविष्य आकार लेता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है, जिसे मजबूत करने में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।मंत्री  राजवाड़े जिला स्तरीय मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं, जिसे राज्यभर में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के सम्मान और प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस दिशा में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे नवाचार, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ विद्यार्थियों को शिक्षित करें, ताकि बच्चे न केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट बनें, बल्कि नैतिकता, अनुशासन और जीवन कौशल से भी परिपूर्ण हों। मंत्री ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाते हैं और उन्हें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम में विधायक  भूलन सिंह मरावी ने भी शिक्षकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को समग्र शिक्षा देने का आह्वान किया।समारोह के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि नवाचार, सतत मूल्यांकन एवं विविध शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कार्यक्रम में उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिससे पूरे वातावरण में उत्साह और गौरव का भाव देखने को मिला। इस प्रकार के आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करते हैं।समारोह में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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मण्डीपखोल गुफा दर्शन हेतु प्रशासन पूरी तरह तैयार https://thefourthmirror.com/2026/04/23/the-administration-is-fully-prepared-for-visits-to-the-mandipkhol-cave/ https://thefourthmirror.com/2026/04/23/the-administration-is-fully-prepared-for-visits-to-the-mandipkhol-cave/#respond Thu, 23 Apr 2026 14:59:49 +0000 https://thefourthmirror.com/?p=64415 रायपुर । खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ठाकुरटोला जमीदारी में आगामी 27 अप्रैल को...

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रायपुर ।

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ठाकुरटोला जमीदारी में आगामी 27 अप्रैल को ऐतिहासिक गुफा मण्डीपखोल गुफा के खुलने के मद्देनज़र जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियाँ सुनिश्चित की जा रही हैं। इसी क्रम में आज गुरूवार को जनपद पंचायत छुईखदान के सभाकक्ष में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रद्धालुओं की संभावित बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। गुफा क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, प्रभावी भीड़ नियंत्रण एवं सुचारु यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

स्वास्थ्य विभाग को गुफा स्थल पर अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित करने, आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने तथा अतिरिक्त स्वास्थ्य टीम की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, जिससे किसी भी स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु आयोजन समिति एवं ग्राम पंचायतों को आवश्यक निर्देश दिए गए। वहीं आबकारी विभाग को गुफा के आसपास एवं नजदीकी क्षेत्रों में मादक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया।

बैठक में डीएसपी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, मण्डीप खोल गुफा दर्शन आयोजन समिति के संरक्षक लाल रोहित सिंह पुलत्स्य एवं सदस्य, विभागीय अधिकारी तथा क्षेत्र के सरपंच एवं सचिव उपस्थित थे।

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