नितिन गडकरी के पैतृक गांव में इस पहल से हलचल, हजारों महिलाओं को रोजगार, हेमा मालिनी ने की तारीफ
नई दिल्ली।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पैतृक गांव धापेवाड़ा में हलचल है। उन्होंने बताया है कि नागपुर के पास इस गांव में एक टेक्सटाइल इनीशिएटिव की शुरुआत हुई है। इसका मकसद पारंपरिक हथकरघा बुनाई को दोबारा जिंदा करने के साथ स्थानीय ‘हलबा आदिवासी’ समुदाय के लिए रोजगार पैदा करना है। स्थानीय महिलाओं के बनाए गए उत्पादों पर केंद्रित यह प्रोजेक्ट एक्सपोर्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की भी योजना बना रहा है।यह घोषणा तब हुई जब शनिवार को अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने गांव में ‘धापेवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ (एक निजी संस्था) की इमारत का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद थे।गडकरी ने धापेवाड़ा गांव को गोद लिया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद इलाके की हथकरघा विरासत को बचाना है। साथ ही पारंपरिक बुनकरों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर पैदा करना है।
धापेवाड़ा टेक्सटाइल प्रोजेक्ट का टारगेट
गडकरी ने बताया कि इस पहल की शुरुआत 2021 में महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ हुई थी। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में बाजार की मांग को लेकर कुछ अनिश्चितता थी। लेकिन, जैसे-जैसे उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ, लोगों की इनमें दिलचस्पी बढ़ती गई।
मंत्री के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का टारगेट भविष्य में 5,000 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है। साथ ही, स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर एक्सपोर्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने की भी योजना है। इस पहल का मुख्य जोर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ‘हलबा आदिवासी’ समुदाय से जुड़ी बुनाई कला को संरक्षित करने में मदद करना है।
स्थानीय महिलाओं का दिखेगा कमाल
धापेवाड़ा इकाई में टसर सिल्क, सिल्क-कॉटन और सूती साड़ियां बनाई जाती हैं। स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देना और रोजगार मुहैया कराना इस पहल का अहम हिस्सा है।इस प्रोजेक्ट का मकसद पारंपरिक बुनाई तकनीकों को बेहतर उत्पाद गुणवत्ता और व्यापक बाजार पहुंच के साथ जोड़ना है। उद्घाटन के दौरान आयोजित एक फैशन शो में अलग-अलग क्षेत्रों की साड़ियों को दिखाया गया। इससे पारंपरिक वस्त्रों को नए लोगों तक पहुंचने का एक मंच मिला।
हेमा मालिनी ने की तारीफ
हेमा मालिनी ने गडकरी की पहल की तारीफ की। कहा कि इस फैशन इवेंट से देश के अलग-अलग हिस्सों की साड़ियों को बेहतर पहचान मिल रही है।धापेवाड़ा की यह पहल महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में टेक्सटाइल प्रोडक्शन बढ़ाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है। गडकरी ने बताया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए गढ़चिरौली और वाशिम जिलों में भी ऐसी ही परियोजनाएं शुरू की गई हैं। नागपुर जिले के खापा में भी एक और प्रोजेक्ट की योजना है।इस तरह की पहलों का विस्तार करने से पारंपरिक बुनाई करने वाले समुदायों की पहुंच बढ़ेगी। क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
टेक्सटाइल सेक्टर में रोजगार के मौके दिखे
केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग में रोजगार पैदा करने की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि धापेवाड़ा की यह पहल इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।सिंह ने यह भी कहा कि इस परियोजना के जरिए बुनकर परिवार सालभर में लगभग 30,000 रुपये प्रति माह तक कमा सकते हैं।इस पहल की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मांग बनी रहे, बाजार तक पहुंच बढ़े और यह सुनिश्चित हो सके कि बढ़े हुए उत्पादन का फायदा पारंपरिक बुनाई से जुड़ी महिलाओं और परिवारों तक पहुंचे।
