भारत की ये स्पीड बनी रही तो 2030 तक बड़ा उलटफेर, अमेरिका-चीन के बाद नंबर 3 अर्थव्यवस्था बन जाएगा
नई दिल्ली।
भारत अपनी शानदार इकोनॉमिक ग्रोथ को और आगे बढ़ा सकता है। प्रमुख ग्लोबल संस्थाओं ने उस पर भरोसा दिखाया है। ऐसा करते हुए उन्होंने वर्तमान और अगले वित्तीय वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान बढ़ा दिए हैं। इन्हें बढ़ाकर लगभग 7% या उससे ज्यादा कर दिया है। अगर ये अनुमान सच साबित होते हैं तो भारत 2003-2007 के तेजी वाले वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है। उस दौरान भारत दुनिया की सबसे चर्चित उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा था।कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIEP) में भारत और दक्षिण एशिया टीम के हेड क्युंगहून किम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस रुझान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) का भारत की विकास दर के अनुमानों को ऊपर की ओर बदलना काफी मायने रखता है। खासकर तब जब इसे पिछले दो दशकों में भारत के आर्थिक प्रदर्शन के संदर्भ में देखा जाए।
लगातार 7% से ज्यादा रही है ग्रोथ
महामारी के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में 5.8% की गिरावट आई थी। लेकिन, 2021 में इसमें 9.7% की जोरदार वापसी हुई। किम के आकलन के अनुसार, इसके बाद लगातार चार सालों तक भारत की विकास दर सालाना 7% से अधिक रही। इस लगातार रफ्तार को देखते हुए जैसे-जैसे तिमाही GDP के आंकड़े सामने आए, अर्थशास्त्रियों को बार-बार अपने विकास दर के अनुमानों को ऊपर की ओर बदलना पड़ा।
अगर मौजूदा अनुमान सच साबित होते हैं तो भारत 7% से अधिक की वार्षिक विकास दर के अपने मौजूदा दौर को 2003-2007 के पांच साल के रिकॉर्ड से भी आगे ले जा सकता है।1960 के बाद से भारत की 5 साल की औसत विकास दर सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। भारत के हालिया प्रदर्शन का पैमाना तब और साफ हो जाता है, जब इसे किसी एक तिमाही या वार्षिक आंकड़े के बजाय कई वर्षों की अवधि में देखा जाता है।
भारत ने किया है कमाल
किम के अनुसार, 2021-2025 के दौरान भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83% रही। 1960 से अब तक के आंकड़ों को देखें तो यह पांच साल का दूसरा सबसे ऊंचा औसत है। यह आंकड़ा 2003 से 2007 के बीच दर्ज किए गए 7.89% के औसत से थोड़ा ही कम है।यह तुलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी एक वर्ष में जोरदार वापसी करना तो आसान हो सकता है। लेकिन, लंबी अवधि तक ऊंची विकास दर को बनाए रखना कहीं अधिक कठिन होता है। महामारी के बाद भारत का विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब इसका आर्थिक आधार 2000 के दशक की शुरुआत की तुलना में काफी बड़ा हो चुका है।किम ने बताया कि 2007 में भारत की जीडीपी 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी ही ज्यादा थी। अब यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। नतीजतन, आज 7% की वही विकास दर लगभग दो दशक पहले की तुलना में आर्थिक उत्पादन में कहीं अधिक बड़ी वास्तविक बढ़ोतरी लाती है।भारत की आर्थिक तरक्की का आकलन करते समय यह अंतर महत्वपूर्ण हो जाता है। तेजी से बढ़ती एक बड़ी अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और आर्थिक नीति-निर्माण में उसकी स्थिति मजबूत होती है।
IMF, वर्ल्ड बैंक और ADB सभी आशावान
इन तीन प्रमुख संस्थानों के ताजा अनुमान बताते हैं कि भारत की विकास दर मजबूत बनी हुई है। चालू और अगले वित्तीय वर्ष के लिए इनके अनुमान 7% के आसपास या उससे अधिक हैं।विश्व बैंक के हालिया अनुमान के अनुसार, 2026-27 में भारत की विकास दर लगभग 7.1% रहने की उम्मीद है, जो पहले 6.6% आंकी गई थी। 2027-28 के लिए इनका अनुमान लगभग 7.2% है।IMF ने 2026-27 के लिए अपने अनुमान को लगभग 6.5% से बढ़ाकर 7% कर दिया है, जबकि 2027-28 के लिए अनुमान लगभग 7% है।ADB ने 2026-27 के लिए अपने विकास अनुमान को लगभग 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। हालांकि, 2027-28 के लिए अनुमान लगभग 7.3% से घटकर 7.1% हो गया है।कुल मिलाकर स्थिति साफ है। इन संस्थानों को उम्मीद है कि मध्यम अवधि में भारत की विकास दर काफी ऊंची बनी रहेगी। हालांकि, ये अनुमान कोई गारंटी नहीं हैं। अलग-अलग संस्थानों के अनुमानों में अंतर, घरेलू और वैश्विक आर्थिक माहौल के बारे में उनके अपने-अपने आकलन को दिखाता है।
2007 के बाद से अर्थव्यवस्था लगभग चार गुना हुई
भारत का बढ़ता आर्थिक पैमाना, इसकी ग्रोथ स्टोरी में एक नया आयाम जोड़ता है। देश की GDP 1960 के दशक के एक छोटे आधार से बढ़कर हाल के सालों में 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है। सदी के बदलाव के बाद विकास में तेजी आई। हालांकि इस दौरान उतार-चढ़ाव और रुकावटें भी देखने को मिलीं।महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियों में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद एक मजबूत रिकवरी देखने को मिली। हालिया विकास का दौर उसी रिकवरी पर टिका है। लेकिन, इसका असली महत्व केवल उस रिकवरी में नहीं, बल्कि उसके बाद हुए लगातार विस्तार में है।किम का तर्क है कि भारत का मौजूदा प्रदर्शन इसलिए ध्यान देने योग्य है क्योंकि यह बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था का विस्तार होता है, 7% से ऊपर की विकास दर बनाए रखने के लिए उत्पादन में कहीं अधिक ग्रोथ की जरूरत होती है। यह तब जरूरी नहीं थी जब भारत की GDP लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर थी।भारत का आर्थिक प्रदर्शन अपनी विशाल जनसंख्या के कारण भी ध्यान खींच रहा है। लगभग 1.4 अरब की आबादी के साथ लंबे समय तक चलने वाला यह विस्तार रोजगार, निवेश और खपत के अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि इन फायदों का लाभ अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों तक किस हद तक पहुंचता है।
क्या भारत 2030 तक तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है?
किम के बताए अनुमान के अनुसार, भारत के 2030 के आसपास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है। अगर विकास दर लगातार 7% से ऊपर बनी रहती है तो इससे इस दिशा में आगे बढ़ने की रफ्तार और मजबूत होगी। हालांकि, इसकी टाइमिंग और रैंकिंग विनिमय दरों, महंगाई और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगी।भारत का यह उत्थान ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में काफी अनिश्चितता है। भारत के लिए इस रफ्तार को बनाए रखना इस बात पर निर्भर करेगा कि वह निवेश को कैसे कायम रखता है, उत्पादकता में कैसे सुधार करता है, रोजगार कैसे पैदा करता है और आर्थिक विकास का फायदा अपनी विशाल आबादी तक कैसे पहुंचाता है।केवल विकास के आंकड़े इन चुनौतियों का समाधान नहीं करते हैं। न ही इनसे यह साबित होता है कि भारत लगातार अन्य सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन करेगा। लेकिन, इस रफ्तार से कई सालों तक विकास जारी रहता है तो भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।किम ने माना कि अभी भी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। लेकिन, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में भारत के प्रदर्शन की तारीफ होनी चाहिए। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि जीडीपी के अगले तिमाही आंकड़े आने पर अर्थशास्त्री और प्रमुख संस्थाएं एक बार फिर अपने पूर्वानुमानों को ऊपर की ओर संशोधित कर सकती हैं।
