क्या गांठ न होना ब्रेस्ट कैंसर की गारंटी है? विशेषज्ञ कहते हैं नहीं! डॉक्टर ने बताए लक्षण जिन्हें न करें अनदेखा करने की भूल

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ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में ब्रेस्ट लंप यानी गांठ का ख्याल आता है। लेकिन क्या हर ब्रेस्ट कैंसर में गांठ महसूस होती है? इसका जवाब है, नहीं। शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई या महसूस नहीं होते। यही कारण है कि केवल हाथ से गांठ महसूस न होना इस बात की गारंटी नहीं देता कि ब्रेस्ट में कैंसर नहीं है। डॉ. विष्णु हरी (एसोसिएट डायरेक्टर और हेड – मेडिकल ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी और बीएमटी, सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद) बताते हैं कि खासकर शुरुआती स्टेज में कुछ ब्रेस्ट कैंसर बिना किसी साफ गांठ या दर्द के भी हो सकते हैं। कुछ मामलों में, पहला संकेत किसी ऐसी चीज से नहीं मिल सकता जिसे कोई व्यक्ति महसूस कर सके, बल्कि कैंसर के संकेत मैमोग्राम या अल्ट्रासाउंड से मिल सकता है। यही वजह है कि लक्षणों का न होना ब्रेस्ट हेल्थ को नजरअंदाज करने या सही स्क्रीनिंग न करवाने की वजह नहीं बनना चाहिए।

क्या गांठ नहीं है? फिर भी कैंसर हो सकता है

डॉक्टर के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के आम लक्षणों में से एक है गांठ का महसूस होना, लेकिन यह बीमारी का पता चलने का एकमात्र तरीका नहीं है। कुछ ट्यूमर बहुत छोटे हो सकते हैं और उन्हें महसूस करना मुश्किल हो सकता है। कुछ मामलों में, आसपास के ब्रेस्ट टिश्यू में बदलाव हो सकते हैं या बिना किसी साफ गांठ के इमेजिंग में कोई असामान्यता (abnormality) दिख सकती है। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हर महिला के ब्रेस्ट टिश्यू अलग-अलग होते हैं। ब्रेस्ट में किसी भी तरह की असामान्यता का आकार और जगह, साथ ही आसपास के ब्रेस्ट टिश्यू, इस बात पर असर डाल सकते हैं कि क्या इसे छूकर पता लगाया जा सकता है। इसलिए, ब्रेस्ट में गांठ न मिलने का मतलब यह नहीं है कि कोई अंदरूनी समस्या नहीं है।

किन बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

Symptoms of breast cancer<br>क्या बिना गांठ और दर्द के भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर (Designed By Magnific)

नई गांठ निश्चित रूप से डॉक्टर से सलाह लेने का एक कारण है, लेकिन कई अन्य बदलाव भी हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए। वो आगे बताए गए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • एक ब्रेस्ट के आकार या शेप में नया बदलाव
  • त्वचा पर लगातार गड्ढे पड़ना या सिकुड़न होना
  • त्वचा का मोटा होना या उसमें असामान्य बदलाव
  • निप्पल के रूप या स्थिति में नया बदलाव
  • निप्पल का अंदर की ओर धंसना (inversion)
  • निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज, खासकर अगर उसमें खून हो
  • एक ब्रेस्ट में लगातार सूजन या साफ दिखने वाला बदलाव
  • ब्रेस्ट या बगल में नई सूजन या गांठ

महत्वपूर्ण बात यह है कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। ब्रेस्ट में कई बदलाव बिना कैंसर वाली स्थितियों (benign conditions) के कारण भी हो सकते हैं। जरूरी बात यह है कि घबराएं नहीं, लेकिन किसी नए या लगातार बने रहने वाले बदलाव को नजरअंदाज भी न करें।

ब्रेस्ट कैंसर में दर्द होना जरूरी नहीं है

एक और आम गलतफहमी यह है कि कैंसर में दर्द होना ही चाहिए। असल में, कई ब्रेस्ट कैंसर, खासकर शुरुआती स्टेज में, ब्रेस्ट में दर्द का कारण नहीं बनते। ब्रेस्ट में कोमलता या बेचैनी कई अन्य कारणों से हो सकती है, जैसे हार्मोनल बदलाव और बिना कैंसर वाली ब्रेस्ट की स्थितियां आदि।इसका मतलब है कि दर्द, या दर्द न होना, इस बात का पता लगाने का तरीका नहीं हो सकता कि ब्रेस्ट में कोई असामान्यता कैंसर वाली है या नहीं। इसलिए, मेडिकल सलाह लेने से पहले ब्रेस्ट में होने वाले बदलाव में दर्द होने का इंतजार करने से जांच में देरी हो सकती है।साथ ही, लगातार या बिना किसी स्पष्ट कारण के होने वाले ब्रेस्ट पेन के बारे में भी डॉक्टर से बात करनी चाहिए, खासकर अगर यह अन्य बदलावों के साथ हो रहा हो।

अगर गांठ नहीं है, तो कैंसर का पता कैसे चलता है?

Symptoms of breast cancer<br>क्या बिना गांठ और दर्द के भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर (Designed By Magnific)

अगर ब्रेस्ट में गांठ नहीं है उसके बाद भी महिला को असहजता लगातार बनी रहती है तो डॉक्टर महिला की उम्र, लक्षणों और व्यक्तिगत जोखिम कारकों के आधार पर मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड या कुछ खास मामलों में ब्रेस्ट एमआरआई (MRI) की सलाह दे सकते हैं।
मैमोग्राफी से कुछ ऐसी असामान्यताओं का पता चल सकता है जिन्हें छूकर महसूस नहीं किया जा सकता। अल्ट्रासाउंड किसी चिंताजनक हिस्से के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे मैमोग्राफी या क्लिनिकल जांच के साथ भी किया जा सकता है।
अगर इमेजिंग टेस्ट में कोई संदिग्ध हिस्सा दिखता है, तो अगला कदम बायोप्सी हो सकता है। बायोप्सी के दौरान, टिश्यू का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है और माइक्रोस्कोप के नीचे उसकी जांच की जाती है ताकि यह पता चल सके कि कैंसर कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं। इमेजिंग टेस्ट में दिखने वाली हर असामान्यता कैंसर नहीं होती। आगे की जांच से ही यह पता चलता है कि कोई चीज बिना नुकसान वाली (बिनाइन) है या ऐसी है जिसके लिए इलाज की जरूरत है।

क्या स्क्रीनिंग के लिए लक्षणों का इंतजार करना चाहिए?

डॉक्टर के अनुसार स्क्रीनिंग का मकसद लक्षण दिखने से पहले ही ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाना होता है। दूसरी ओर, डायग्नोस्टिक टेस्ट तब किए जाते हैं जब किसी व्यक्ति में पहले से ही कोई लक्षण या असामान्य चीज दिखाई दे रही हो।स्क्रीनिंग का सही तरीका महिला के जोखिम पर निर्भर करता है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, जेनेटिक कारक और पिछली मेडिकल हिस्ट्री, ये सभी स्क्रीनिंग की सलाह पर असर डाल सकते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर का मजबूत इतिहास रहा है, या जिनमें ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कुछ खास जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं, उन्हें अलग तरह स्क्रीनिंग स्ट्रेटजी की जरूरत हो सकती है और उन्हें इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। बाकी लोगों के लिए, अपनी उम्र और जोखिम श्रेणी के हिसाब से बताई गई स्क्रीनिंग गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है।ब्रेस्ट अवेयरनेस का मतलब कैंसर के डर में जीना या बार-बार गांठ की जांच करना नहीं है। इसका मतलब है यह जानना कि आपके ब्रेस्ट सामान्य रूप से कैसे दिखते और महसूस होते हैं। साथ ही, यह पहचानना कि कब कोई बदलाव आया है। ब्रेस्ट, निप्पल या उसके आस-पास के हिस्से में कोई नया या लगातार बना रहने वाला बदलाव दिखे तो उसकी जांच करवानी चाहिए, भले ही कोई दर्द न हो और कोई साफ गांठ भी न दिखे।साथ ही, यह याद रखना जरूरी है कि ब्रेस्ट में बदलाव का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। मेडिकल जांच का मकसद यह पता लगाना होता है कि असल में बदलाव की वजह क्या है। सबसे जरूरी बात यह है कि गांठ न होने और दर्द न होने का मतलब यह नहीं है कि ब्रेस्ट कैंसर की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है। शुरुआती दौर में पता चलने से ब्रेस्ट कैंसर के इलाज और नतीजों में बहुत बड़ा फर्क पड़ सकता है। इसलिए, मकसद बेवजह डर पैदा करना नहीं, बल्कि सही जानकारी के साथ जागरूकता, उचित स्क्रीनिंग और समय पर मेडिकल जांच को बढ़ावा देना है। ब्रेस्ट हेल्थ की बात करें, तो कभी-कभी सबसे जरूरी चेतावनी वाला संकेत कोई गांठ नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसा बदलाव होता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।


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