रुपये में व्यापार, भारत का नया वार, विदेश व्यापार नीति में इस बड़े बदलाव का फायदा
नई दिल्ली ।
भारत की विदेश व्यापार नीति के कुछ नियमों में बदलाव हुआ है। CII ने शुक्रवार को कहा कि इससे एक्सपोर्टर्स के लिए विदेशी बिक्री का इनवॉइस बनाना आसान हो जाएगा। साथ ही भारतीय रुपये में पेमेंट पाना भी सरल होगा। इसके चलते ट्रेड सेटलमेंट में रुपये के इंटरनेशनल इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। एक्सपोर्टर्स को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी और निश्चितता मिलेगी।सीआईआई की EXIM पर नेशनल कमेटी के चेयरमैन और पैटन इंटरनेशनल के MD संजय बुधिया ने इस बारे में अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय इंडस्ट्री इस रफ्तार को बनाए रखने को लेकर प्रतिबद्ध है। वह ग्लोबल ट्रेड में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस को और मजबूत करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहती है।
रुपये में पेमेंट पाना होगा आसान
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के नोटिफिकेशन से एक्सपोर्टर्स के लिए विदेशी ट्रांजैक्शन का इनवॉइस बनाना और भारतीय रुपये में पेमेंट पाना आसान हो गया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय इंडस्ट्री भारत के विदेश व्यापार ढांचे को आसान और आधुनिक बनाने की सरकार की लगातार कोशिशों का स्वागत करती है। इससे एक्सपोर्टर्स के लिए इकोसिस्टम और आसान हो रहा है।
एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन पूरा करने में मिलेगी मदद
उन्होंने कहा कि नेपाल और भूटान को छोड़कर मंजूर बैंकिंग चैनलों के जरिए रुपये में एक्सपोर्ट की आने वाली कमाई अब FTP फायदों के लिए योग्य होगी। विदेशी मुद्रा में होने वाली कमाई की तरह ही एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन (निर्यात दायित्वों) को पूरा करने में गिनी जाएगी।
इनवॉइसिंग की आजादी
एशियाई क्लियरिंग यूनियन (ACU) के बाहर के देशों के साथ व्यापार में निर्यातक अब अपनी पसंद के अनुसार किसी भी विदेशी मुद्रा या भारतीय रुपये में अनुबंध तय कर सकते हैं।
FEMA और RBI नियमों का कॉर्डिनेशन
इस नीति को फेमा (FEMA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2023 के नियमों के अनुरूप ढालकर रुपये के वैश्विक लेन-देन की अनिश्चितता को दूर किया गया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एशियाई क्लियरिंग यूनियन के देशों नेपाल और भूटान के लिए अलग से विशिष्ट प्रावधान लागू रहेंगे।
