एसीबी समूह की औद्योगिक गतिविधियों की सीबीआई–एसआईटी जांच की मांग
कोरबा।
एसीबी समूह की कोल वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों की वर्ष 1999 से अब तक स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने मंगलवार को दीपका में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। बारिश के बीच बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और प्रभावित क्षेत्रों के पदाधिकारी आंदोलन में डटे रहे।धरना समाप्त होने के बाद कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका अभिजीत राज भानु के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, कैबिनेट सचिव, केंद्रीय कोयला मंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया। पार्टी ने पूरे मामले की सीबीआई जांच, सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) तथा राज्य स्तर पर स्वतंत्र बहु-विभागीय जांच दल गठित करने की मांग की है।
एक वाशरी नहीं, पूरी कोयला–ईंधन–पर्यावरण व्यवस्था की जांच की मांग
भारतीय जनाधिकार पार्टी का कहना है कि जांच का दायरा केवल किसी एक औद्योगिक इकाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चकाबुरा, रतिजा, रेंकी, बिंझारी सहित संबद्ध कोल वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, परिवहन व्यवस्था और अन्य औद्योगिक इकाइयों के अभिलेखों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।पार्टी ने कोयले की आवक-जावक, वाशरी संचालन, तौल कांटा, रेलवे साइडिंग, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, जल उपयोग, ईंधन, कर एवं वित्तीय दस्तावेजों का वर्षवार मिलान कराने की मांग की है।
एक करोड़ टन से अधिक कोयला आवागमन के रिकॉर्ड की जांच की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि अभिलेखीय परीक्षण में एक करोड़ टन से अधिक कोयला आवागमन परिलक्षित होता है, तो खदान से वाशरी, वाशरी से रेलवे अथवा सड़क मार्ग और वहां से ताप विद्युत संयंत्र तक एक-एक टन कोयले का स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक हिसाब सामने आना चाहिए।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि किसी मात्रा को जांच से पहले अवैध घोषित करने की मांग नहीं है, बल्कि अभिलेखों में दर्ज प्रत्येक टन कोयले के स्रोत, प्रसंस्करण, रिजेक्ट अथवा मध्यवर्ती उत्पाद, प्रेषण और अंतिम उपयोग का सत्यापन कराया जाए।
रिजेक्ट कोयले और बिजली उत्पादन का भी हो तकनीकी मिलान
पार्टी ने रिजेक्ट कोयले की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता, ऊष्मीय मान, नमूना परीक्षण, भंडारण, प्रेषण और अंतिम उपयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही ताप विद्युत परियोजनाओं में प्राप्त कोयले, ईंधन खपत, बिजली उत्पादन और राख उत्पादन का तकनीकी मिलान कराने की बात कही है।
तौल कांटा से लेकर जीपीएस तक डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच
ज्ञापन में तौल कांटा सर्वर, डिजिटल लॉग, जीपीएस, फास्टैग, आरएफआईडी, एएनपीआर, सीसीटीवी, वाहन रिकॉर्ड, रेलवे रेक, प्रेषण पर्चियों सहित अन्य डिजिटल अभिलेखों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है।पार्टी ने फर्जी वाहन, दोहरी प्रविष्टि, काल्पनिक यात्रा, गलत तौल और कोयले की मात्रा में संभावित हेरफेर जैसी आशंकाओं की वैज्ञानिक जांच की मांग रखी है।
पर्यावरण, भूजल और जनस्वास्थ्य पर भी उठाए सवाल
औद्योगिक गतिविधियों से प्रभावित नदी-नालों, भूजल, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग करते हुए पार्टी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के जल स्रोतों के ऊपरी और निचले हिस्सों से नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जाए।इसके अलावा कोल वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में वायु, धूल, राख, शोर, जल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है।
डीजल, बायोडीजल और सरकारी रियायतों की जांच भी मांगी
पार्टी ने वर्ष 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल, एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन और वास्तविक उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की है। साथ ही बायोडीजल की खरीद से जुड़े आरोपों की जांच कर विक्रेता, बिल, ई-वे बिल, परिवहन, मात्रा, गुणवत्ता और वास्तविक उपयोग का सत्यापन कराने की मांग की गई है।इसके साथ ही संबंधित कंपनियों को मिले कर लाभ, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क संबंधी सुविधाओं और अन्य सरकारी रियायतों की भी समीक्षा की मांग की गई है।
श्रमिकों के अधिकारों और सरकारी निगरानी की भी जांच
कोल वाशरियों, परिवहन, रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना रिकॉर्ड और ठेका श्रम कानूनों के अनुपालन की जांच की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।पार्टी ने कहा कि इतने बड़े औद्योगिक संचालन के दौरान एसईसीएल, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन सहित संबंधित विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्रवाई की भी स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। यदि कहीं सरकारी निगरानी में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
एमसीसीपीएल–जेएसडब्ल्यू सौदे की फोरेंसिक जांच की मांग
ज्ञापन में एसीबी समूह से संबंधित कंपनी एमसीसीपीएल के जेएसडब्ल्यू एनर्जी द्वारा लगभग 1,410 करोड़ रुपये के अधिग्रहण/क्रय-विक्रय से जुड़े भूमि एवं परिसंपत्तियों, कोयला लिंकज, विद्युत अनुबंधों, न्यायालयीन एवं नियामकीय मामलों, वित्तीय एवं कर दायित्वों तथा अधिग्रहण से पहले की गई जांच-पड़ताल की स्वतंत्र उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच की मांग भी की गई है।
डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग
पार्टी ने जांच शुरू होने से पहले तौल कांटा सर्वर, जीपीएस, फास्टैग, सीसीटीवी, आरएफआईडी, ओसीईएमएस/सीईएमएस, ईआरपी/एसएपी, ईंधन, कोयला स्टॉक, रेलवे और वित्तीय डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की, ताकि संभावित साक्ष्यों से छेड़छाड़ अथवा उनके नष्ट होने की आशंका न रहे।
11 सितंबर को बिलासपुर में अगला आंदोलन
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कहा कि सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों से समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो 11 सितंबर 2026 को एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद सरकारी कार्रवाई के आधार पर आगे की लोकतांत्रिक आंदोलन की रणनीति घोषित की जाएगी।पार्टी ने 2 अक्टूबर को दीपका–गेवरा में ‘इंसानियत सभा’ आयोजित करने की भी घोषणा की है।
धरना-प्रदर्शन में जिला संयोजक दिनेश यादव, मुख्य संयोजक एवं अध्यक्ष दीपक दुबे सहित कमल किशोर साव, कृष्ण टंडन, हेमंत पैगवार, संजय रत्नाकर, संतोष अनंत, अमर खांडे, बजरंग रत्नाकर, शिव चौरसिया, जय सेवायक, शैलेन्द्र गोपाल, राकेश कुर्रे, करण लहरे, देव प्रसाद, प्रमोद यादव, राजेंद्र, अनिल कश्यप, तरुण कश्यप, किशन, शुक्रिता कुर्रे, लाल चौहान, लकी दिवाकर, आशीष तिवारी, नीरज, रामचंद्र कंवर, गणेश कश्यप, नकुल सूर्यवंशी, यशवंत सूर्यवंशी, शिवचरण, योगेश सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और प्रभावित ग्रामों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
