किसान विरोधी है अमेरिका-भारत व्यापार समझौता : तेजराम विद्रोही

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रायपुर।

अमेरिका-भारत व्यापार समझौता पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौता किसान विरोधी कदम है। भारत की आत्मा गांव में बसती है लेकिन जिस तरह से यह व्यापार समझौता सामने आया है, उससे सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसानों की सहमति ली गई है? क्या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है? उन्होंने विश्लेषण करते हुए आगे कहा कि सस्ती विदेशी उपज से भारतीय किसान तबाह होंगेः अमरिका की खेती भारी सब्सिडी पर आधारित, पूरी तरह मशीनीकृत और बड़े कॉर्पोरेट फार्म मॉडल पर आधारित है अगर भारत सोयाबीन, मक्का, गेंहूँ, डेयरी उत्पाद, दालों पर आयात शुल्क घटाता है तो सस्ती अमेरिकी फसल भारतीय मंडियों आयेंगी। इससे भारतीय किसान जो पहले ही एममसपी की लड़ाई लड़ रहा है, वह इस प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेगा?डेयरी सेक्टर पर सीधा हमलाः भारत का डेयरी मॉडल छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित, सहकारी व्यवस्था पर टिका हुआ है। आसानी से अमेरिकी डेयरी उत्पादों की प्रवेश होने से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवार प्रभावित होंगे जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा आघात है।एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर खतराः व्यापार संतुलन के नाम पर भारत के ऊपर कृषि सब्सिडी कम करने, सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दबाव होने से एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य आत्मनिर्भरता पर प्रहार होगा।बीज और कॉर्पोरेट नियंत्रणः अमेरिकी कंपनियां पेटेंट आधारित बीज, बौध्दिक संपदा अधिकार के जरिये अपने किसानों को आत्मनिर्भर बनाती है जबकि भारत में आज भी किसान अपनी परंपरिक बीज संचय व संरक्षण पर निर्भर है। बीज पर कंपनियों के हाथ में आने से भारतीय किसान अपनी परंपरिक बीज स्वतंत्रता व नियंत्रण खो देगा।यह समझौता केवल व्यापार का मामला नहीं है बल्कि यह किसान की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता का प्रश्न है। इसलिए अमेरिका-भारत व्यापार समझौता को रद्द किया जाना चाहिए।


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