हसदेव अरण्य में जंगल कटाई पर रोक की मांग

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रायपुर।

एक पेड़ मां के नाम का का नारा लगाने वाली प्रदेश सरकार हसदेव अरण्य क्षेत्र में लाखों पेड़ की कटाई कर अडानी के हवाले कर छत्तीसगढ़ की पर्यावरण और जैविकी को नष्ट कर रही है इसे प्रदेश के आम जन किसी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे । माकपा, सीटू, जनम , जनवादी महिला समिति, एस एफ आई, दलित शोषण मुक्ति मंच तथा विभिन्न नागरिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पेड़ों को राखी बांधकर विरोध प्रदर्शन के जरिए छत्तीसगढ़ हसदेव अरण्य में कोयले के उत्खनन और पेड़ कटाई पर रोक की मांग करते हुए यह ऐलान किया । इन संगठनो ने वन विभाग द्वारा हसदेव क्षेत्र में केंते एक्सटेंशन की अनुमति के जरिए लाखों पेड़ो की कटाई के राज्य सरकार के जनविरोधी फैसले को तत्काल रोकने की मांग की । डी डी नगर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में इन संगठनों ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय वन्य जीव संस्थान की अनुशंसा और छत्तीसगढ़ विधानसभा के सर्वसम्मति संकल्प का भी उल्लंघन है ।विदित हो कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में कोयला खनन हेतु वन भूमि के डाइवर्सन के प्रस्ताव को वन मंडलाधिकारी, सरगुजा द्वारा अनुशंसा की गई है। वन मंडलाधिकारी की इस अनुशंसा ने हसदेव अरण्य में एक और खनन परियोजना को मंज़ूरी देकर समृद्ध जंगल जमीन के विनाश का रास्ता साफ़ कर दिया है। प्रदेश सरकार का यह निर्णय न सिर्फ भारतीय वन्य जीव संस्थान की हसदेव अरण्य में खनन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिशों के विपरीत है बल्कि, छत्तीसगढ़ विधानसभा के उस प्रस्ताव की भी अवमानना है जिसमे सर्व सम्मति से हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक को निरस्त करने का संकल्प हुआ
था और तत्कालीन सरकार की ओर से इस हेतु केंद्र सरकार को पत्र लिखा था ।

वन विभाग की केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में 1742 हेक्टेयर घने जंगल को खनन कार्यों के लिए साफ किया जाना प्रस्तावित है, जो परियोजना का 97% क्षेत्र है। जिसमे लगभग 5 लाख पेड़ काटे जाएँगे |उल्लेखनीय है कि लेमरू हाथी रिज़र्व इस परियोजना से मात्र 3 किलीमीटर की दूरी पर स्थित है| इस संबंध में पूर्व कॉंग्रेस सरकार ने 13-08-2020 एवं 19 जनवरी 2021 को पत्र जारी कर हाथी के संरक्षण और हाथी द्वन्द को रोकने, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता एवं जल उपलब्धता जैसे विषय की गंभीरता को सामने रखते हुए इस परियोजना पर आपत्तियां दर्ज की थी | यह भी उल्लेखनीय है कि वन्यजीव संस्थान ने हसदेव अरण्य की जैव विविधता पर किये गए अध्ययन में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि हसदेव एक महत्वपूर्ण वन्यजीव रहवास है और इसमें कोई भी खनन बड़े पैमाने पर हाथी मानव टकराव की समस्या को इतना बढ़ा देगा कि इसको संभाल पाना राज्य सरकार के लिए कठिन होगा। स्थानीय लोगों ने भी पर्यावरण स्वीकृति की जनसुनवाई में इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था । यह पूरे प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते आदिवासियों के जीवन, उनकी आजीविका और संस्कृति को उजाड़कर अदानी की लूट के प्रतिबद्धता के भाजपा सरकार के असली चेहरे को उजागर करता है । माकपा एवं जनसंगठनों तथा नागरिक समाज ने राज्य सरकार से इस जनविरोधी निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग करते हुए हर स्तर पर इसका कड़ा विरोध का ऐलान किया है l इस प्रदर्शन में धर्मराज महापात्र, वकील भारती, आर वी भारती, रतन गोंडाने, रेखा गोंडाने, दिलीप भगत, अजय कन्नौजे, डाक्टर नरेश साहू,शेखर नाग, रिमेश लहरे भी प्रमुख रूप से शामिल थे ।


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