मंडी अधिनियम में संशोधन किसानों के हितों पर कुठाराघात – तेजराम विद्रोही
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में पारित कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2025 (क्रमांक 16, वर्ष 2025) पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने गहरी चिंता व्यक्त की है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह कहकर किसानों को भ्रमित किया कि संशोधन से उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह संशोधन कृषि उपज मंडियों को समाप्त करने की योजना का हिस्सा है। अब तक मंडी अधिनियम के उल्लंघन पर छह महीने की सजा का प्रावधान था, जिसे हटाकर मात्र ₹5,000 के जुर्माने में बदल दिया गया है। साथ ही बिना पंजीयन के व्यापारी भी किसानों से सीधे उपज खरीद सकेंगे।
तेजराम विद्रोही ने कहा कि यह संशोधन किसानों के हितों पर गहरा प्रहार है। बिना पंजीयन व्यापारियों द्वारा खरीदी गई उपज का भुगतान यदि नहीं होता है, तो किसान को कोई वैधानिक सुरक्षा नहीं मिलेगी। ऐसे में किसानों के साथ धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ेंगी और वे शोषण के शिकार होंगे।उन्होंने सरकार की ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ऑनलाइन खरीदी की बात करती है, लेकिन न तो बोली ऑनलाइन होती है और न ही भुगतान। तथाकथित ई-नाम के अंतर्गत व्यापारी स्वयं उपस्थित होकर बोली लगाते हैं और भुगतान नकद या चेक से किया जाता है, जबकि भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में ऑनलाइन होना चाहिए। सरकार केवल कागजों पर योजनाएं बनाकर किसानों को भ्रमित कर रही है। मंडी व्यवस्था को कमजोर करना और पारदर्शिता खत्म करना — ये सब योजनाएं किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर बनाने का षड्यंत्र हैं।
